Pooja Pal Struggle: पंचर वाले की बेटी को BJP ने दी बड़ी जिम्मेदारी, Mulayam सरकार में Atiq ने उजाड़ा था सिंदूर

UP BJP Vice President Pooja Pal Struggle Story: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी बिसात बिछाने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने गुरुवार (25 जून) को अपनी नई प्रदेश टीम का ऐलान कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने 64 पदाधिकारियों की लिस्ट जारी की है। इसमें सबसे अहम नाम है- पूजा पाल का। एक पंचर बनाने वाली की बेटी, आखिरकार बीजेपी सत्ता में उपाध्यक्ष चुनी गई।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 'पूजा पाल', (Pooja Pal), अपनी दृढ़ता के लिए जानी जाती हैं। मुलायम की सरकार में शादी के 9 दिन बाद ही मांग का सिंदूर उजड़ गया। पति राजू पाल की हत्या कर दी गई। इसमें माफिया अतीक अहमद और उसके गुर्गों का नाम सामने आया। हाथों की मेहंदी भी नहीं सूखी थी, पति की हत्या का इंसाफ सफेद विधवा के लिबाज में दर-दर भटकती रही। मायावती ने हाथ थामा और पहली बार, इलाहाबाद पश्चिम सीट से टिकट दिया। पूजा ने अतीक अहमद के भाई अशरफ को हराकर विधायक की कुर्सी अपने नाम की। आइए जानते हैं कि कैसे एक पंचर बनाने वाले की बेटी को भाजपा ने बड़ी जिम्मेदार सौंपी?

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Who Is Pooja Pal: पूजा पाल कौन हैं? पंचर वाले की बेटी की MLA से शादी, मुलायम की सरकार में उजड़ा सिंदूर

पूजा पाल का जन्म 25 जुलाई 1979 को प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता अमृत लाल पाल पंचर बनाने का काम करते थे। आर्थिक तंगी के कारण पूजा ने निजी अस्पताल में नौकरी शुरू की। यहीं उनकी मुलाकात राजू पाल से हुई। 2004 में राजू पाल (Raju Pal) ने मायावती की पार्टी बसपा के टिकट पर प्रयागराज पश्चिम सीट से अतीक अहमद के भाई अशरफ को हराकर विधायक बने। जनवरी 2005 में राजू पाल ने पूजा से शादी की। लेकिन खुशियां महज 9 दिन ही चलीं। 25 जनवरी 2005 को दिनदहाड़े राजू पाल की अतीक अहमद (Atiq Ahamd) के गुर्गों ने हत्या कर दी। उस वक्त प्रेदश में मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) की सरकार थी। हाथों की मेहंदी अभी सूखी भी नहीं थी कि पूजा जीवन भर के लिए विधवा हो गईं। यह घटना पूजा की जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बनी।

Pooja Pal Husband Raju Pal Murder: शादी के 9 दिन बाद विधवा: मायावती ने थामा हाथ

हत्या के बाद पूजा पाल टूट गईं, लेकिन सास रानी पाल और मायावती के सहयोग से उन्होंने राजनीति में कदम रखा। 2007 में बसपा ने उन्हें प्रयागराज पश्चिम से टिकट दिया। अतीक के भाई अशरफ अहमद को हराकर पूजा पहली बार विधायक बनीं। 2012 में उन्होंने सीट बरकरार रखी। उन्होंने पति की हत्या के मामले में सीबीआई जांच की मांग की और अतीक-गैंग के खिलाफ लगातार आवाज उठाई। 2017 में भाजपा के सिद्धार्थनाथ सिंह से हारने के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी जॉइन की और 2022 में कौशांबी की चायल सीट से विधायक चुनी गईं।

18 साल का संघर्ष और Yogi Government का न्याय

पूजा पाल के लिए अतीक अहमद सिर्फ एक माफिया नहीं, बल्कि पति का हत्यारा था। कई बार सार्वजनिक मंज से पूजा ने कहा कि 18 साल तक मैं अतीक के आतंक के साए में रही। कोई सुनने वाला नहीं था। योगी आदित्यनाथ की सरकार में स्थिति बदली। जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के तहत अतीक और अशरफ समेत गैंग के कई सदस्यों पर शिकंजा कसा गया। 2023 में अतीक और अशरफ की जेल से अस्पताल जाते समय हत्या हो गई। पूजा पाल ने इसे 'न्याय' बताया। अगस्त 2025 में विधानसभा में पूजा पाल ने खुलकर सीएम योगी की तारीफ की। कहा कि अतीक को मिट्टी में मिलाने का काम योगी जी ने किया। उन्होंने मुझे और मेरे समुदाय को न्याय दिलाया। कुछ घंटों बाद सपा ने उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में निष्कासित कर दिया। इसके बाद, पूजा की सक्रियता भाजपा की तरफ नजर आई। सपा से निष्कासन के बाद पूजा ने योगी से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वह उन लोगों के साथ हैं जिन्होंने उन्हें न्याय दिया।

BJP में एंट्री और उपाध्यक्ष पद: 2026 का बड़ा राजनीतिक बदलाव

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 (UP Vidhan Sabha Chunav 2027) के तहत 25 जून 2026 को भाजपा ने पूजा पाल को उत्तर प्रदेश की प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया। यह फैसला कई मायनों में महत्वपूर्ण है:

पाल समाज और पिछड़े वर्गों को संदेश: पूजा पाल पाल समुदाय से हैं। भाजपा 2027 में OBC और पिछड़े वोट बैंक को और मजबूत करना चाहती है।

  • महिला सशक्तिकरण: विधवा, संघर्षशील महिला को बड़ी जिम्मेदारी।
  • अपराध-मुक्त यूपी का प्रतीक: अतीक जैसे माफिया के खिलाफ लड़ाई का चेहरा।
  • सपा को झटका: सपा से निष्कासित पूजा का भाजपा में जाना विपक्षी गठबंधन को नुकसान पहुंचाएगा।

Pooja Pal Political Career: पूजा पाल का सियासी सफर कैसा? सपा से बगावत, CM योगी बने मसीहा?

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  • 2005: प्रयागराज पश्चिम से बसपा विधायक रहे पति राजू पाल की हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूजा पाल को राजनीति में ला दिया।
  • 2007: बसपा ने पूजा पाल को इलाहाबाद पश्चिम सीट से टिकट दिया। उन्होंने अतीक अहमद के भाई अशरफ को हराकर पहली बार विधायक बनीं।
  • 2012: दूसरी बार इलाहाबाद पश्चिम से विधायक चुनी गईं और राजू पाल हत्याकांड में न्याय की लड़ाई जारी रखी।
  • 2017: विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा और उनकी सक्रिय राजनीति में कुछ समय के लिए ठहराव आया।
  • 2022: समाजवादी पार्टी में शामिल हुईं और कौशांबी की चायल सीट से विधायक चुनी गईं।
  • 2024: राज्यसभा चुनाव में कथित क्रॉस वोटिंग और भाजपा के प्रति नरम रुख को लेकर सपा नेतृत्व से दूरी बढ़ी।
  • अगस्त 2025: विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath)की 'जीरो टॉलरेंस' नीति की तारीफ की और कहा कि उन्हें न्याय मिला।
  • सपा से निष्कासन: योगी की तारीफ के कुछ घंटों बाद समाजवादी पार्टी ने उन्हें अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया।
  • योगी से मुलाकात: निष्कासन के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की, जिससे उनके भाजपा में जाने की अटकलें तेज हुईं।
  • 2026: भाजपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश इकाई में प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया, जिससे उनकी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत हुई।

Pooja Pal Net Worth: कितनी अमीर पूजा पाल?

चुनावी हलफनामों के अनुसार पूजा पाल की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई:

  • 2012: कुल संपत्ति लगभग 1 करोड़ रुपये।
  • 2017: लगभग 1 करोड़ रुपये।
  • 2022: कुल संपत्ति 17.28 करोड़ रुपये (मूवेबल + इमूवेबल), देनदारियां 1.89 करोड़ रुपये।
  • अपराधिक मुकदमे: 3
  • कितनी पढ़ी-लिखी? 2015-16 में स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ से ग्रेजुएशन

संपत्ति में जमीन, कृषि भूमि, इमारतें और अन्य निवेश शामिल हैं। विपक्षी आरोप लगाते रहे, लेकिन पूजा ने इसे मेहनत और राजनीतिक संघर्ष का नतीजा बताया।

पूजा पाल की कहानी साधारण परिवार से शुरू होती है, माफिया के गोलीबारी से टूटती है, लेकिन न्याय की लड़ाई में फिर खड़ी हो जाती है। पंचर वाले की बेटी आज यूपी भाजपा की उपाध्यक्ष हैं। यह कहानी बताती है कि राजनीति में संघर्ष, धैर्य और सही समय का साथ कितना महत्वपूर्ण है।

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