Pension Yojana: किन बुजर्गों से वापस ली जाएगी वृद्धावस्था पेंशन की रकम? किस वजह से विभाग ने उठाया ये कदम?

Pension Yojana UP Scam: यूपी के मोहनलालगंज तहसील में बुजुर्गों की वृद्धावस्था पेंशन मामले ने हलचल मचा दी है। शनिवार को आयोजित समाधान दिवस पर पता चला कि 64 बुजुर्गों की पेंशन में गड़बड़ी हुई है और अब उनसे वसूली की तैयारी शुरू हो गई है। जांच में सामने आया कि कुछ बुजुर्गों ने आयु प्रमाण पत्र या आधार और आय प्रमाण पत्र में हेराफेरी करके पेंशन प्राप्त की थी।

जिलाधिकारी ने इस मामले में जिला समाज कल्याण अधिकारी को कारण बताओ नोटिस भेजा। उन्होंने इस मामले में वसूली में देरी होने का कारण पूछा। 2023 से पहले के इन मामलों में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ था, जबकि अब बायोमीट्रिक और आधार लिंक सिस्टम के कारण यह संभव नहीं है। यह मामला न केवल बुजुर्गों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि विभाग और लोक सेवा केंद्रों की जवाबदेही पर भी सवाल उठाता है।

Pension Yojana UP

जांच में मिली गड़बड़ी

अगस्त के अंतिम सप्ताह में तहसील दिवस के दौरान यह मामला सामने आया था। तत्काल ग्राम विकास अधिकारी को जांच के आदेश दिए गए थे। पिछले महीने जांच रिपोर्ट जिला समाज कल्याण अधिकारी अंजनी कुमार को सौंप दी गई। जांच में पाया गया कि कुछ लोगों ने आयु प्रमाण पत्र में गलती की थी, तो कुछ ने आधार कार्ड और आय प्रमाण पत्र में हेराफेरी करके पेंशन का आवेदन किया था।
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वसूली का रास्ता साफ

वृद्धावस्था पेंशन की नियमावली में पहले वसूली के बारे में स्पष्ट निर्देश नहीं थे। अब जिलाधिकारी के निर्देश पर 64 बुजुर्गों से वसूली करने का रास्ता तय कर लिया गया है। सभी मामले 2023 के पहले के हैं। 2024 से आधार लिंक आवेदन प्रणाली होने के कारण फर्जी दस्तावेज लगाना मुश्किल हो गया है। अब बायोमीट्रिक सत्यापन के बाद ही ऑनलाइन आवेदन आगे बढ़ता है। पहले दस्तावेज स्कैन करके आवेदन किए जाते थे और बैंक स्टेटमेंट के आधार पर पेंशन का निर्धारण हो जाता था।

पेंशन की राशि और मुश्किलें

समाज कल्याण विभाग की ओर से बुजुर्गों को 1,000 रुपये प्रति माह पेंशन दी जाती है। एक साल में यह राशि 12,000 रुपये तीन किस्तों में उनके खाते में भेजी जाती है। अब 64 बुजुर्गों से वसूली की तैयारी चल रही है। इनमें कई ऐसे बुजुर्ग हैं जिनके पास न जमीन है और न मकान। ये झोपड़ी में रहते हैं और मजदूरी करते हैं, इसलिए वसूली करना विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण है। आवेदन करने वाले जन सुविधा केंद्र और लोकवाणी के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। विभाग यह पता लगा रहा है कि आवेदन में कोई गड़बड़ी किसने और कैसे की।
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