Pankaj chaudhary Salary: यूपी BJP अध्यक्ष पंकज चौधरी की कितनी होगी कमाई? सैलरी और पेंशन का पूरा हिसाब
UP BJP President Pankaj chaudhary Salary: केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री और महाराजगंज से सात बार सांसद रह चुके पंकज चौधरी अब उत्तर प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष बनाए गए हैं। पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के करीबी माने जाने वाले पंकज चौधरी का निर्विरोध चुने जाएंगे। पंकज चौधरी महाराजगंज से सात बार लोकसभा सांसद चुने जा चुके हैं और अब तक दो बार केंद्र सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
ओबीसी वर्ग की कुर्मी जाति से आने वाले पंकज चौधरी ने पार्षद के तौर पर अपना पहला चुनाव लड़ा, इसके बाद वह गोरखपुर के डिप्टी मेयर भी रहे। साल 1991 में उन्होंने पहली बार लोकसभा का चुनाव जीतकर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा। पंकज चौधरी की कुल संपत्ति करीब 41 करोड़ रुपये है। पंकज चौधरी राहत रूह तेल कंपनी के मालिक हैं। शैक्षणिक योग्यता के तौर पर उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की है। ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यूपी बीजेपी अध्यक्ष बनने पर उन्हें सैलरी कितनी मिलेगी, पेंशन का क्या सिस्टम होगा और कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी।

🔵 कितनी मिलेगी UP BJP अध्यक्ष पंकज चौधरी को सैलरी? (UP BJP President salary)
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष कोई सरकारी या संवैधानिक पद नहीं होता। यह पूरी तरह पार्टी का संगठनात्मक पद है। इसी वजह से इस पद के लिए सरकार की ओर से कोई तय सैलरी, पे स्केल या सैलरी स्लिप नहीं मिलती। यानी यूपी बीजेपी अध्यक्ष को सरकारी खजाने से एक भी रुपया वेतन के रूप में नहीं दिया जाता।
फिर कमाई कैसे होती है
हालांकि औपचारिक सैलरी नहीं होने के बावजूद पार्टी अपने बड़े पदाधिकारियों को मानदेय और ऑपरेशनल सपोर्ट देती है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को हर महीने लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये का मानदेय मिलने की बात सामने आती रही है। राज्य अध्यक्षों के लिए कोई आधिकारिक आंकड़ा घोषित नहीं है, लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक यूपी बीजेपी अध्यक्ष को भी हर महीने करीब एक से डेढ़ लाख रुपये तक का मानदेय मिल सकता है। इसके अलावा रोजमर्रा के खर्चों के लिए पार्टी फंड से भत्ते भी दिए जाते हैं।
🔵 पंकज चौधरी को क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी?
सैलरी भले तय न हो, लेकिन सुविधाओं के मामले में यूपी बीजेपी अध्यक्ष किसी वरिष्ठ मंत्री से कम नहीं होता। पार्टी की ओर से पूरी तरह फर्निश्ड ऑफिस दिया जाता है। इसके साथ एक पर्सनल सेक्रेटरी, राजनीतिक सलाहकार और सपोर्ट स्टाफ भी मिलता है। पार्टी के कामकाज को संभालने के लिए पूरा सिस्टम उपलब्ध कराया जाता है।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में संगठन की जिम्मेदारी संभालने वाले अध्यक्ष के लिए लगातार यात्राएं करनी पड़ती हैं। भाजपा पार्टी से जुड़े सभी आधिकारिक दौरों का खर्च खुद उठाती है। हवाई, रेल या सड़क यात्रा का पूरा इंतजाम पार्टी करती है। ड्राइवर के साथ वाहन, होटल में ठहरने और खाने-पीने का खर्च भी पार्टी की ओर से होता है। रहने के लिए फर्निश्ड आवास की सुविधा भी दी जाती है।
यूपी बीजेपी अध्यक्ष को मेडिकल सुविधा या तो पार्टी के जरिए मिलती है या फिर उनके मौजूदा सरकारी पद के आधार पर सरकारी नियमों के तहत। इसके अलावा निजी स्टाफ की सैलरी भी पार्टी फंड से दी जाती है।

🔵 पंकज चौधरी को सांसद रहने पर अलग सैलरी और भत्ते
पंकज चौधरी फिलहाल महाराजगंज से सांसद हैं और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री भी हैं। ऐसे में उन्हें सांसद के तौर पर मिलने वाली सैलरी और भत्ते अलग से मिलते रहेंगे। भारत में एक सांसद का मासिक वेतन 1,24,000 रुपये है। इसके साथ 2,500 रुपये दैनिक भत्ता, 87,000 रुपये निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और 75,000 रुपये कार्यालय खर्च मिलता है। नई दिल्ली में मुफ्त आवास या 2 लाख रुपये मासिक हाउस रेंट अलाउंस भी मिलता है। सांसदों को 150 टेलीफोन कॉल, 50,000 यूनिट बिजली, 24,000 लीटर पानी, 34 हवाई यात्राएं और एसी ट्रेन यात्रा जैसी सुविधाएं मिलती हैं।
🔵 मंत्री पद का अतिरिक्त लाभ
राज्य मंत्री के तौर पर पंकज चौधरी को अलग से भत्ता भी मिलता है। नियमों के अनुसार कैबिनेट मंत्री को 2.32 लाख रुपये, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार को 2.31 लाख रुपये और राज्य मंत्री को करीब 2,30,600 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं।
🔵 पेंशन का क्या होगा?
मंत्री पद छोड़ने पर अलग से कोई पेंशन नहीं मिलती। पेंशन सांसद या विधायक के रूप में किए गए कार्यकाल के आधार पर तय होती है। पूर्व सांसदों को फिलहाल 31,000 रुपये प्रति माह पेंशन मिलती है, जो पांच साल से ज्यादा सेवा होने पर बढ़ती जाती है। यानी पंकज चौधरी को भविष्य में पेंशन का लाभ उनके लंबे संसदीय अनुभव के आधार पर मिलेगा, न कि मंत्री या पार्टी अध्यक्ष पद के कारण।
कुल मिलाकर यूपी बीजेपी अध्यक्ष का पद सैलरी से ज्यादा ताकत, प्रभाव और सुविधाओं का होता है। पंकज चौधरी के लिए यह जिम्मेदारी राजनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है।












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