अपने एक मंत्री को हटाने की योगी के सामने आई बड़ी मजबूरी
अगले एक महीने के भीतर योगी आदित्यनाथ के एक मंत्री का जाना तय, 19 सितंबर से पहले योगी सरकार को लेना होगा फैसला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद कई ऐसे नेताओं को मंत्रिपद दिया गया जोकि ना तो विधानसभा और ना ही विधान परिषद के सदस्य हैं, ऐसे में छह महीने के भीतर इन मंत्रियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उन्हें किसी ना किसी एक सदन का सदस्य होना पड़ेगा। योगी सरकार में पांच ऐसे मंत्री हैं जोकि किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, जिसमें खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या, उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा भी शामिल हैं। उनके अलावा स्वतंत्र देव व मोहसिन रजा भी ऐसे मंत्री हैं जोकि किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।

19 सितंबर अंतिम तारीख
यूपी सरकार में पांचों मंत्रियों को 19 सितंबर से पहले किसी ना किसी एक सदन का अनिवार्य रुप से सदस्य होना जरूरी है। लेकिन इस राह में योगी सरकार के सामने जो सबसे बड़ी चुनौती है वह यह कि योगी सरकार के पास संख्या के आधार पर मौजूदा समय में सिर्फ चार सदस्यों को ही विधान परिषद में भेजने की क्षमता है, लिहाजा इन पांच मंत्रियों में से किसी एक की छुट्टी होना तय है। इसमें से भी एक खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं तो दूसरे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या व दिनेश शर्मा है। लिहाजा बचे दो मंत्री मोहसिन रजा और स्वतंत्र देव, लिहाजा इन दोनों ही मंत्रियों में से किसी एक मंत्री का मंत्रालय छिनना लगभग तय माना जा रहा है।

मोहसिन रजा या फिर स्वतंत्र देव सिंह
यूपी के सियासी गलियारे में हो रही चर्चा की बात करें तो इस बात की चर्चा काफी तेज हो गई है कि मोहसिन रजा और स्वतंत्र देव में से किसकी मंत्रालय से छुट्टी होगी। माना जा रहा है कि विरोधी सुर से बचने के लिए स्वतंत्र देव को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का जिम्मा सौंपा दजा सकता है या फिर जिस तरह से तमाम शिकायतों के घेरे में मोहसिन रजा हैं, उनकी मंत्रीमंडल से छुट्टी की जा सकती है।

चुनाव आयोग ने जारी की अधिसूचना
चुनाव आयोग ने विधान परिषद की चार सीटें जोकि खाली हुई हैं उसके लिए अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 सितंबर है। यहां एक दिलचस्प बात यह है कि योगी सरकार को कुल पांच सीटों की जरूरत थी, लेकिन इसमें चार सीटों को खाली करवा लिया गया। जानकारों की मानें तो अधिसूचना जारी होने के बाद अगर विधान परिषद से कोई सदस्य इस्तीफा देता है तो भी उस सीट के लिए अधिसूचना जारी नहीं की जा सकती है। आपको बता दें कि कानपुर देहात की सिकंदरा विधानसभा सीट से विधायक मथुरा पाल का निधन हो गया था, ऐसे में यह सीट खाली है

दलित चेहरे की तलाश
गौर करने वाली बात है कि यूपी में दलित वोटों की राजनीति को देखते हुए भाजपा ने केशव प्रसाद मौर्या के हाथों में यूपी की कमान संभाली थी, ऐसे में जब वह प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं तो मुमकिन है उनकी जगह पर दूसरे किसी दलित चेहरे की तलाश हो। लिहाजा इस तलाश को काफी हद तक स्वतंत्र देव पूरा करत हैं, माना जा रहा है कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष का पद सौंपने की तैयारी की जा चुकी है। स्वतंत्र देव के साप काफी लंबा राजनीतिक अनुभव है, वह मौजूदा समय में प्रदेश भाजपा के महामंत्री हैं, साथ ही उन्होंने पीएम मोदी और अमित शाह की रैलियों के आयोजन में भी खास भूमिका निभाई थी। पार्टी स्वतंत्र देव के जरिए कुर्मी वोटों को भी अपनी ओर लुभाने की कोशिश करेगी

यूपी में सियासी दंगल की संभावना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या मौजूदा समय में लोकसभा सांसद भी हैं, ऐसे में दोनों को लोकसभा की सीट छोड़नी होगी, लिहाजा इन दोनों की सीट गोरखपुर और फूलपुर में उपचुनाव कराए जाएंगे। कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही मायावती फूलपुर सीट से चुनाव लड़कर यूपी की राजनीति में अपनी ग्रैंड वापसी कर सकती हैं। बहरहाल यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा की ये तमाम रणनीति उसके पक्ष में जाती हैं या फिर उसका यह दांव उल्टा पड़ जाएगा। जिस तरह से पिछले कुछ दिनों में सपा यशवंत सिंह, बुक्कल नवाब, सरोजिनी अग्रवाल, अशोक वाजपेयी ने इस्तीफा दिया और भाजपा के लिए विधानपरिषद का रास्ता साफ किया है उसने भाजपा की रणनीति को साफ कर दिया है कि वह प्रदेश की सियासत में लंबी पारी पारी खेलने आई है।












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