Noida में फर्जी पुलिस थाने का पर्दाफाश: ‘इंटरनेशनल पुलिस’ बनकर कैसे करते थे उगाही? 6 अरेस्ट
Noida Police Busted Fake Police Station: नोएडा में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जहां गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने 'इंटरनेशनल पुलिस एंड क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो' के नाम पर चल रहे फर्जी पुलिस थाने का भंडाफोड़ किया। यह फर्जी दफ्तर सेक्टर-70 में चल रहा था, जहां पश्चिम बंगाल के 6 ठगों ने नकली दस्तावेजों, पुलिस जैसे लोगो, और जाली प्रमाणपत्रों के दम पर लोगों से चंदा उगाही का गोरखधंधा चला रखा था।
पुलिस ने 10 अगस्त 2025 को छापा मारकर इस गिरोह को धर दबोचा और भारी मात्रा में फर्जी सामग्री बरामद की। आइए, इस धमाकेदार खबर को मसालेदार अंदाज में जानते हैं!

फर्जी थाने का गेम: 'इंटरनेशनल पुलिस' बनकर ठगी
नोएडा के सेक्टर-70 में बीएस-136 में यह फर्जी दफ्तर 'इंटरनेशनल पुलिस एंड क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो' के नाम से चल रहा था। पुलिस की वर्दी, लोगो, और नकली स्टांप का इस्तेमाल कर यह गिरोह खुद को अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसी का हिस्सा बताता था। इन ठगों ने www.intlpcrib.in नाम की एक वेबसाइट बनाई थी, जहां जाली राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र दिखाकर लोगों को भरोसा दिलाया जाता था।
ये लोग वेरिफिकेशन और जांच के नाम पर लोगों को डराकर या भ्रमित कर पैसे ऐंठते थे। इंटरपोल, यूरेशिया पोल, और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से जुड़े होने का दावा कर ये ठग ब्रिटेन में भी दफ्तर होने की बात कहते थे। लेकिन नोएडा पुलिस की पैनी नजर ने इनके इस फर्जीवाड़े को शुरू होने के 10 दिन बाद ही धराशायी कर दिया।
पुलिस की दबंग कार्रवाई: 6 ठग गिरफ्तार
थाना फेस-3 पुलिस को गुप्त सूचना मिली, जिसके आधार पर रविवार आधी रात को सेक्टर-70 में छापा मारा गया। डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि यह गिरोह 2 महीने पहले इस फर्जी दफ्तर को शुरू कर चुका था, लेकिन इसका जाल फैलने से पहले ही पुलिस ने इसे नेस्तनाबूद कर दिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:-
- - विभाष चन्द्र अधिकारी (बीए, नोएडा में रह रहे)
- - अराग्य अधिकारी (बीए, एलएलबी, विभाष का बेटा)
- - बाबुल चन्द्र मंडल (12वीं पास)
- - पिंटू पाल (27, 12वीं पास)
- - सम्पदा मल (29)
- - आशीष कुमार (57)
सभी आरोपी पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं और सेक्टर-70 में किराए के मकान में रह रहे थे।
बरामद सामग्री: फर्जीवाड़े का खजाना
पुलिस ने छापेमारी में भारी मात्रा में जाली सामग्री बरामद की, जिसमें शामिल हैं:
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- 9 मोबाइल फोन (ओप्पो, सैमसंग, वीवो, आईफोन आदि)
- - 17 फर्जी स्टांप/मोहर
- - 6 चेकबुक, 9 फर्जी ID कार्ड, 6 एटीएम कार्ड
- - 42,300 रुपये नकद
- - जाली लेटरहेड, वोटर कार्ड, पैन कार्ड
- - मंत्रालयों के फर्जी सर्टिफिकेट और इंटरनेशनल पुलिस के नाम से 4 बोर्ड
- - वेरिफिकेशन के नाम पर डराते-धमकाते।
- - फर्जी ID और सर्टिफिकेट दिखाकर भरोसा जीतते।
- - वेबसाइट और सोशल मीडिया के जरिए चंदा मांगते।
- - मंत्रालयों और इंटरपोल जैसे नामों का दुरुपयोग करते।
पुलिस ने बताया कि ये लोग जनजातीय मामलों, आयुष मंत्रालय, और सामाजिक न्याय मंत्रालय के जाली सर्टिफिकेट्स का इस्तेमाल करते थे।
गाजियाबाद के फर्जी दूतावास से कनेक्शन?
यह मामला गाजियाबाद में हाल ही में पकड़े गए फर्जी दूतावास रैकेट से मिलता-जुलता है। वहां हर्षवर्धन जैन नाम के शख्स को वेस्टआर्कटिका और अन्य माइक्रोनेशन का राजदूत बनकर ठगी करते पकड़ा गया था। जैन ने फर्जी राजनयिक नंबर प्लेट, जाली दस्तावेज, और हवाला रैकेट के जरिए लोगों को ठगा था। नोएडा का यह फर्जी पुलिस थाना भी उसी तरह सरकारी नामों और प्रतीकों का दुरुपयोग कर रहा था। उत्तर प्रदेश STF ने जैन को 23 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था, और अब नोएडा पुलिस इस गिरोह के नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
कैसे काम करता था यह गिरोह?
डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि यह गिरोह पुलिस जैसे रंग और लोगो का इस्तेमाल कर लोगों को प्रभावित करता था। ये लोग:
पुलिस का मानना है कि इस दफ्तर ने अभी कुछ ही लोगों को निशाना बनाया था, लेकिन इसका नेटवर्क बढ़ सकता था। थाना फेस-3 के प्रभारी ध्रुव भूषण दुबे की अगुआई में इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
कानूनी कार्रवाई
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 204, 205, 318, 319, 336, 339, 338, और 3(5), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C, 66D, और प्रतीक एवं नाम (अनुचित प्रयोग निवारण) अधिनियम, 1950 की धारा 3 और 4 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब इनके वित्तीय लेनदेन और नेटवर्क की जांच कर रही है।
यह क्यों अहम?
यह मामला नोएडा और गाजियाबाद में बढ़ते फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है। फर्जी दूतावास से लेकर फर्जी पुलिस थाने तक, ठग सरकारी नामों का दुरुपयोग कर लोगों को लूट रहे हैं। नोएडा पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बड़े धोखाधड़ी नेटवर्क को उजागर किया है, और अब सवाल यह है कि क्या इस तरह के और रैकेट सामने आएंगे?
आप क्या सोचते हैं? क्या नोएडा में ऐसे फर्जीवाड़े और बढ़ रहे हैं? और पुलिस की इस कार्रवाई को कितना बड़ा मानते हैं? कमेंट्स में अपनी राय शेयर करें!
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