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महंत नरेंद गिरि की मौत की गुत्थी: आनंद गिरि के वकील का दावा-मौत के पीछे बड़ी साजिश,एक तीर से हुए दो शिकार

महंत नरेंद गिरि की मौत की गुत्थी: आनंद गिरि के वकील का दावा-मौत के पीछे बड़ी साजिश,एक तीर से हुए दो शिकार

नई दिल्ली। 20 सितंबर को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हलात में मौत हो गई। आश्रम के कमरे में उनकी लाश मिली, जिसके बाद से मौत की गुत्थी उलझती जा रही है। इस मामले में सीबीआई ने अपनी जांच शुरू कर दी हैं। वहीं महंत नरेन्द्र गिरि की हत्या मामले में उनके करीबी शिष्य आनंद गिरि को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। महंत नरेंद्र गिरि के कमरे में मिले सुसाइट नोट के आधार पर उनके शिष्य रहे आनंद गिरि के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। बाघंबरी मठ के व्यवस्थापक अमर गिरि ने आनंद गिरि पर आरोप लगाया गया है कि महंत नरेंद्र गिरि आनंद गिरी के चलते पिछले कुछ समय से तनाव में चल रहे थे और इसी के कारण उन्होंने अपनी जान दे दी। वहीं इस सुसाइड नोट पर भी सवाल उठ हैं।

 Narendra Giri death:Anand Giris lawyer claims - Big conspiracy behind death, many people behind this

आनंद गिरि के वकील विजय द्विवेदी ने वनइंडिया के साथ बात करते हुए कहा कि महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या कर ही नहीं सकते। उन्होंने उनकी मौत पर कई सवाल उठाए और कहा कि पूरे मामले की विश्वसनीय एजेंसी से जांच होनी चाहिए। विजय द्विवेदी ने कहा कि इस पूरे मामले में बहुत बड़ी साजिश रची गई है, जिसके कारण महंत नरेंद्र गिरी की मौत हुई हैं और उसी साजिश के कारण आनंद गिरि को फंसाया गया है। उन्होंने आशंका जाहिर करत हुए कहा कि इस साजिश में एक-दो नहीं बल्कि दर्जनों लोग शामिल हैं। इस पूरे साजिश का मकसद एक तीर से दो शिकार करना था। विजय द्विवेदी ने कहा कि इस साजिश में शामिल लोगों ने ऐसी पठकथा रची हैं, कि महंत नरेंद्र गिरि के करीबी शिष्य, जिसे वो पुत्र के समान मानते थे उन्हें फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि आनंद गिरि और नरेंद्र गिरि के बीच करीब चार-पांच महीने से बातचीत नहीं हो रही थी। वो लंब वक्त से हरिद्वार में थे।

उन्होंने कहा कि अगर महंग नरेंद्र गिरि किसी तनाव में होते तो वो उनके व्यवहार पर भी दिखता, जो बिल्कुल भी नहीं दिख रहा था। वो मौत से एक दिन पहले भी कई लोगों से मिले, उन्हें सलाह दी। उन्होंने सुसाइड नोट पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि महंत नरेंद्र गिरि इतनी लंबी-चौड़ी सुसाइड नोट लिख ही नहीं सकते थे। वो बहुत कम लिखते थे और लिखने का अधिकांश काम अपने शिष्यों से करवाते थे। वहीं उन्होंने कहा कि जिस तरह से सुसाइड नोट के हर पन्ने पर हस्ताक्षर किए गए गए थे, ऐसा लग रहा है कि जैसे पूरी तसल्ली के साथ और पूरी योजना के साथ इस काम को अंजाम दिया गया है। उन्होंने कहा कि महंत नरेंद्र गिरि की सुरक्षा में गार्ड तैनात थे, जिसकी भी पूछताछ होनी चाहिए। उनके कमरे के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं उसकी भी जांच होनी चाहिए। वहीं इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि क्या कमरे में आने का गुप्त रास्ता भी है। उन्होंने कहा कि आनंद गिरि से जल्द मुलाकात कर वो सारी जानकारी लेंगे। वहीं उन्होंने प्रदेश सरकार का सीबीआई जांच की सिफारिश करवाने के फैसले का आभार जताया। इस मामले की जांच शुरू हो गई है। जल्द ही इस राज से पर्दा उठेगा।

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