मुजफ्फरनगर जेल में कलाकार कैदी बनाता है जीवंत तस्वीरें, बीवी की वजह से काट रहा 10 साल की सजा
मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर की जेल में दहेज हत्या के प्रयास में 10 साल की सजा काट रहे कैदी मोहमद सादिक जैदी (40 साल) इन दिनों अपनी कलाकारी की वजह से खूब चर्चाओं में हैं। जेल में रह कर जैदी ने जेल की दीवारों पर अपनी कला के रंग बिखेर दिए हैं। जैदी की एक खूबसूरत पेंटिंग जिसमे एक माँ अपने बच्चे को गोद में लिए हुए जबकि दूसरी गोद मे बकरी का बच्चा लिए हुए नज़र आ रही है, के बारे में कहते है कि नारी को जन्मदाता, उदारता और ममता का प्रतीक कहा जाता है। उन्होंने यही अपनी कला के जरिए दिखाने के कोशिश की है।

पेंटिंग की वजह से हो रही है तारीफ
मामला मुजफ्फरनगर की जेल का है जहां जैदी की पेंटिंग से खुश हो कर जेल प्रशासन और ngo उसकी मदद के लिए आगे आए हैं जहाँ एक ओर जेल प्रशाशन उसे पेंटिंग के लिए सामान मुहैया करवाता है। वहीं दूसरी ओर ngo ने जेल में जा कर उसे शॉल ओढ़ा कर समानित कर उसे कानूनी मदद देने की बात कही है।

दहेज मामले में मिली है 10 साल की सजा
जैदी को मुज़फ्फरनगर की अदालत से 10 साल की सज़ा हुई है उसने हाई कोर्ट में अपील भी की हुई है। जेल प्रशासन ने कहा है कि वो भी इन कोशिश में है कि जेल में जो पेंटिंग तैयार कर रहा है उसकी बिक्री हो ताकि उसे फाइनेंशल मदद मिल सके। जैदी 12 तक पढ़ा है और आगे पढ़ कर आर्ट की दुनिया मे नाम कमान चाहता है।

हाइकोर्ट में की है अपील
जैदी के अनुसार वो शादी के एक सप्ताह बाद ही दोनों पति पत्नि में अनबन जरूर रहने लगी थी लेकिन कभी भी उसने ना तो दहेज मंगा ओर ना ही अपनी पत्नी को मारने की कोशिश की, गौरतलब है कि जैदी 498, ओर 307 जैसी धाराओं में अदालत में दोषी पाया गया तो उसे सजा हुई।

मार्च 2017 में हुई सजा
सादिक ज़ैदी की शादी शामली जनपद के कैराना में सन 2004 में हुई थी और शादी के कुछ दिन बाद ही दोनों पति पत्नी में विवाद शुरू हो गया था, ज़ैदी की पत्नी जेहरा ने ज़ैदी के खिलाफ दहेज मांगने ओर हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज करवा दिया जिसके चलते ज़ैदी की गिरफ्तरी भी हुई और और कुछ दिन बाद ज़मानत पर बाहर आ गया। एक लंबे कोर्ट प्रोसीजर के बाद ज़ैदी को मार्च 2017 में कोर्ट ने 10 साल की सज़ा सुना दी। ज़ैदी तब से जेल में बंद है अभी उसने हाई कोर्ट की शरण ली है।












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