चेन्नई जा रही मालगाड़ी की दो बोगी पटरी से उतरी, टला बड़ा हादसा

मिर्जापुर। असोम के चंगसारी से चेन्नई जा रही सीएमएलके मालगाड़ी को चुनार स्टेशन पर सात नम्बर यार्ड में ले जाते समय ट्रेन की दो बोगी प्वाइंट के पास पटरी से उतर गए। इससे अप एवं डाउन लाइन पर ट्रेनों का परिचालन ठप हो गया। बुधवार को दोपहर बाद 5.45 पर पटना से लोकमान्य टर्मिनल जा रही एलएमटी एक्सप्रेस को आगे रवाना करने के लिए इस ट्रेन को यार्ड में ले जाया जा रहा था। दुर्घटना की जानकारी होते ही रेलवे के आला अधिकारियों में हड़कंप मच गया। रेल कर्मियों ने किसी तरह शाम को 7.25 बजे डीरेल हुई बोगियों से शेष बोगियों को अलग कर पीछे ले जाने के बाद मिर्जापुर के लिए रवाना कर दिए। तब जा कर अप एवं डाउन लाइन पर ट्रेनों का परिचालन शुरू किया जा सका। इस हादसे की जानकारी होते ही इलाहाबाद मण्डल के डीआरएम ने मौके का जायजा लेने के लिए दुर्घटना राहत ट्रेन से तीनों विंग के एडीआरएम को रवाना कर दिए।

mirzapur Two bogies of the goods train coming from the main line to the yard, derailed

कई स्टेशनों पर खड़ी रही गाड़ियां
कंट्रोल ने अप एवं डाउन लाइन पर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया। इसके बाद स्थानीय रेल कर्मी तत्काल राहत कार्य में जुट गए। रेल कर्मियों ने इंजन से 13 वीं बोगी को अलग कर किसी तरह दूसरे इंजन के सहारे पीछे ले जाने के बाद मिर्जापुर के लिए रवाना कर दिए। तब जा कर शाम को 7.25 बजे अप एवं डाउन लाइन पर ट्रेनों के परिचालन शुरु हो सका। इस दौरान लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस को जिवनाथपुर स्टेशन पर लगभग दो घंटे तक रोके रखा गया। वहीं डाउन की तरफ गुजरने वाली मालगाड़ियों को मिर्जापुर, झिंगुरा, पहाड़ा व डगमगपुर आदि स्टेशनों पर रोका गया।

यात्री ट्रेन होती तो हो सकता था भारी हादसा
रेल प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद ट्रेन हादसों पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। यह तो संयोग रहा कि सात नम्बर ट्रैक से गुजर रही ट्रेन सवारी गाड़ी नहीं थी वरना भारी हादसा हो सकता था। फिलहाल मालगाड़ी के दो बोगियों के डीरेल होने पर रेलवे के अफसरों ने राहत की सांस ली है। रेलवे के स्थानीय अधिकारी व कर्मचारी हादसे के तत्काल बाद राहत कार्य में जुट गए। मालगाड़ी की शेष बोगियों को अलग करने के बाद अप एवं डाउन लाइन पर ट्रेनों का परिचालन शुरू करा दिया गया। यह दीगर बात रही कि इस हादसे के चलते हावड़ा-दिल्ली मार्ग पर 1.40 घंटे ट्रेनों का परिचालन ठप हो जाने से ट्रेनों के परिचालन पर बुरा असर पड़ा। पहले से ही लेट चल रही ट्रेनों के लिए 1.40 मिनट परिचालन रोका जाना काफी भारी साबित हुआ।

कहीं गलत ट्रैक पर लेने से तो नहीं हुई दुर्घटना
रेल कर्मचारियों की मानें तो इस मालगाड़ी को गलत ट्रैक पर ले जाने के कारण दो बोगियां पटरी से उतर गई। इस मालगाड़ी की बोगियों की लंबाई अधिक होने के कारण इसे चार या पांच नम्बर रेल पटरी पर रोकना चाहिए था, पर इसे पता नहीं क्यों सात नम्बर ट्रैक पर ले जाया गया। अप लाइन से सात नम्बर ट्रैक पर कर्ब अधिक होने के कारण अक्सर चालक को काफी दिक्कत होती है। कर्ब अधिक होने के कारण ट्रेन को कदम ताल की गति से ले जाया जाता है, ताकि दुर्घटना न होने पाए, पर अप लाइन से सीधे सात नम्बर पर रवाना की गई मालगाड़ी की गति भी कदम ताल से अधिक थी। यही वजह रही कि प्वाइंट पर ट्रैक बदलते समय आठवीं बोगी के पहिए फिसल गए और बोगी बे पटरी हो गई। रेल कर्मियों की माने तो इस मालगाड़ी को चार या पांच नम्बर ट्रैक पर खड़ी कराया जाना चाहिए था।

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