Meerut Fake CSC Center का भंडाफोड़: 2 जालसाज अरेस्ट, कैसे चुनते थे टारगेट? बैंक खाते से उड़ाते थे रकम?

Meerut Fake CSC Center Busted, 2 Arrest: मेरठ में साइबर क्राइम की एक बड़ी गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने रविवार (13 जून) को दो आरोपियों को नकली कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) चलाने और अनजान लोगों के नाम पर जाली दस्तावेज तैयार कर बैंक खाते खोलने के आरोप में गिरफ्तार किया। यह सेंटर गरीबों और जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर फर्जीवाड़े का अड्डा बन गया था।

पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी नकली आधार, वोटर आईडी, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज बनाकर ऑनलाइन फ्रॉड करते थे। उनके पास से सैकड़ों जाली दस्तावेज, डेबिट-क्रेडिट कार्ड और बैंक पासबुक बरामद हुए हैं। इस मामले ने एक बार फिर साइबर फ्रॉड और आईडेंटिटी थेफ्ट की बढ़ती समस्या को उजागर किया है।

Meerut Fake CSC Center Busted

कैसे दबोचे गए ठग? क्या-क्या बरामद?

मेरठ के लिसाड़ी गेट पुलिस स्टेशन और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने रविवार को छापेमारी कर दो लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपी अरकम और निजामुद्दीन दोनों मेरठ के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत गोला कुआं की अंसार कॉलोनी के रहने वाले हैं।

स्टेशन हाउस ऑफिसर दलबीर सिंह ने बताया कि गुप्त सूचना पर टीम ने अंसार कॉलोनी में दबिश दी। छापेमारी के दौरान नकली CSC सेंटर का पूरा सामान बरामद हुआ। आरोपी लंबे समय से इस फ्रॉड को अंजाम दे रहे थे।

बरामद सामान की सूची:

  • 2 मोबाइल फोन
  • 92 डेबिट और क्रेडिट कार्ड
  • 10 बैंक पासबुक
  • 5 चेक बुक
  • 139 वोटर आईडी कार्ड
  • 16 खाली हेल्थ कार्ड
  • 180 आधार कार्ड
  • 97 पैन कार्ड
  • 10 रबर स्टैंप और मुहरें

पुलिस के अनुसार, इनमें से कई दस्तावेज असली लोगों के थे, जिन्हें आरोपी विभिन्न तरीकों से हासिल करते थे। एक बैंक खाते से जुड़ी शिकायत असम से नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज थी, जिसने पूरे मामले को उजागर किया।

आरोपी कैसे चलाते थे नकली CSC?

कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके जरिए गांव-कस्बों में रहने वाले लोग आधार, पैन, बैंक खाता, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र जैसी सेवाएं आसानी से ले सकते हैं। लेकिन आरोपी इसी व्यवस्था का गलत फायदा उठा रहे थे।

धोखाधड़ी का तरीका:

  • आरोपी गरीब, निरक्षर और जरूरतमंद लोगों को लक्ष्य बनाते थे।
  • उनके असली दस्तावेज (आधार, वोटर आईडी आदि) हासिल करते थे।
  • नकली CSC सेंटर पर जाली मुहरों और रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर नए दस्तावेज तैयार करते थे।
  • इन जाली दस्तावेजों से बैंक खाते खुलवाते थे।
  • डेबिट-क्रेडिट कार्ड निकालकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स (UPI, ई-कॉमर्स, फाइनेंशियल ऐप्स) पर ट्रांजेक्शन करते थे।
  • धोखाधड़ी की कमाई को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर सबूत मिटाते थे।

यह फ्रॉड सिर्फ मेरठ तक सीमित नहीं था। असम से आई शिकायत बताती है कि आरोपी पूरे देश में लोगों को निशाना बना रहे थे।

साइबर फ्रॉड का बढ़ता खतरा

भारत में CSC फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सरकार ने लाखों CSC केंद्र खोले हैं, लेकिन इनकी निगरानी कमजोर होने का फायदा फ्रॉडस्टर्स उठा रहे हैं।

ऐसे फ्रॉड से नुकसान:

  • आम आदमी का बैंक खाता खाली हो जाता है।
  • लोन और क्रेडिट कार्ड फ्रॉड के मामले बढ़ते हैं।
  • पहचान चोरी से भविष्य में कानूनी परेशानी।
  • सरकारी योजनाओं का लाभ असली जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, साइबर धोखाधड़ी के मामले हर साल 20-30% की दर से बढ़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद जैसे शहर ऐसे फ्रॉड के हॉटस्पॉट बन गए हैं।

पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई

मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और आधार अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपी और कितने लोग शामिल थे? कितने बैंक खाते खोले गए? कितने लोगों के साथ धोखाधड़ी हुई? फ्रॉड की कमाई कहां लगाई गई? साइबर सेल की टीम बरामद मोबाइल और डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच करा रही है।

आम लोगों के लिए सावधानियां क्या-क्या?

  • दस्तावेज साझा न करें: किसी भी अनजान CSC या व्यक्ति को अपना आधार, पैन, वोटर आईडी बिना जरूरत के न दें।
  • ऑथेंटिकेशन चेक करें: CSC केंद्र की वैधता digilocker.gov.in या mygov.in पर वेरिफाई करें।
  • बैंक SMS अलर्ट: हर ट्रांजेक्शन पर अलर्ट सक्रिय रखें।
  • संदिग्ध गतिविधि रिपोर्ट करें: 1930 या National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत करें।
  • डिजिटल लिटरेसी: परिवार के बुजुर्गों को भी ऑनलाइन फ्रॉड के बारे में जागरूक करें।

मेरठ पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क को तोड़ा है, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। ऐसे गिरोह लगातार नई तकनीकों से काम कर रहे हैं। सरकार को CSC केंद्रों की बेहतर निगरानी, नियमित ऑडिट और डिजिटल सिक्योरिटी बढ़ाने की जरूरत है।

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