Meerut Khushi Murder: 'मुझे बचा लो, ये मार डालेंगे', हत्या से पहले बेटी की चीखों ने खोले सौतेली मां के राज!

Meerut Khushi Murder: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में 17 वर्षीय किशोरी खुशी (उर्फ खुशबू) की संदिग्ध हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, किशोरी के पिता कपिल भारद्वाज और सौतेली मां पिंकी पर हत्या का आरोप है। दोनों को हिरासत में ले लिया गया है। पूछताछ में कपिल ने कथित तौर पर जुर्म कबूल भी कर लिया है।

भवनपुर पुलिस स्टेशन में हत्या (धारा 302), साजिश और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। किशोरी के मामा ने आरोप लगाया है कि कई सालों से उसे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी जा रही थी। छिपकर करवा रहा था अंतिम संस्कार...

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सोमवार (25 मई) रात को भवनपुर इलाके की गोकुलधाम सोसाइटी स्थित घर में किशोरी की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई। पुलिस के मुताबिक, कपिल भारद्वाज ने शव को ब्रजघाट ले जाकर बिना मायके वालों को सूचित किए अंतिम संस्कार करवा दिया।

मंगलवार(26 मई) को किशोरी के मामा भूपेंद्र शर्मा (हापुड़ निवासी) को फोन पर सूचना मिली। वे तुरंत मेरठ पहुंचे और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने साफ आरोप लगाया कि पिता और सौतेली मां ने मिलकर किशोरी की हत्या की। एडिशनल सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (ग्रामीण) अभिजीत कुमार ने बताया कि शिकायत मिलते ही टीम ने कार्रवाई शुरू की। कपिल भारद्वाज को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर अपना अपराध स्वीकार कर लिया। सौतेली मां पिंकी को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।

ऑडियो रिकॉर्डिंग में चीखों का हिसाब...

पुलिस को एक ऑडियो क्लिप मिली है, जिसमें किशोरी अपनी मामी से कह रही है कि मुझे यहां से ले जाओ, वरना ये लोग मुझे मार डालेंगे। यह क्लिप जांच में महत्वपूर्ण सबूत मानी जा रही है। पुलिस इसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेज रही है।

9 साल पहले पत्नी की मौत, फिर की दूसरी शादी

कपिल भारद्वाज की पहली पत्नी प्रीति का 2017 में निधन हो गया था। उनके दो बच्चे बेटी खुशी (17) और बेटा राधे हैं। प्रीति की मौत पर भी मायके पक्ष को संदेह है। भूपेंद्र शर्मा ने पुलिस को बताया कि उनकी बहन की मौत भी संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी, लेकिन उस समय कोई शिकायत नहीं की गई।

प्रीति की मौत के बाद कपिल ने पिंकी से दूसरी शादी कर ली। परिवार का आरोप है कि शादी के बाद से ही सौतेली मां पिंकी ने खुशी को परेशान करना शुरू कर दिया। किशोरी को पढ़ाई, खान-पान और रोजमर्रा की जिंदगी में भी प्रताड़ना का सामना करना पड़ता था।

पुलिस की जांच

  • शव का अंतिम संस्कार कर दिए जाने के कारण प्रत्यक्ष सबूत सीमित हैं।
  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार। अगर, शव का अवशेष उपलब्ध हुआ तो फॉरेंसिक जांच होगी।
  • मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट्स और कॉल रिकॉर्ड्स की जांच।
  • पड़ोसियों और रिश्तेदारों से पूछताछ।
  • बेटे राधे का भी बयान दर्ज किया जाएगा।

ASP अभिजीत कुमार ने कहा कि मामले की गहन जांच की जा रही है। दोनों आरोपियों से हर पहलू पर पूछताछ जारी है।

सौतेली मां और सौतेले माता-पिता की समस्या: एक सामाजिक यथार्थ

भारत में सौतेली मां-बेटी के रिश्तों पर कई अध्ययन और केस सामने आते रहे हैं। कई मामलों में संपत्ति, ध्यान का बंटवारा या व्यक्तिगत द्वेष के चलते बच्चे प्रभावित होते हैं। NCRB के आंकड़ों के अनुसार, घरेलू हिंसा और परिवार के सदस्यों द्वारा बच्चों पर अत्याचार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

17 वर्षीय किशोरी की उम्र संवेदनशील होती है। इस उम्र में पढ़ाई का दबाव, शारीरिक बदलाव और भावनात्मक जरूरतें बहुत ज्यादा होती हैं। यदि घर में समर्थन के बजाय प्रताड़ना मिले तो स्थिति गंभीर हो जाती है।

कानूनी पहलू क्या?

  • धारा 302 (हत्या): अधिकतम सजा उम्रकैद या फांसी।
  • POCSO और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के प्रावधान भी लागू हो सकते हैं क्योंकि पीड़िता नाबालिग थी।
  • अगर प्रीति की मौत में भी संलिप्तता साबित हुई तो अलग से केस दर्ज हो सकता है।
  • पुलिस को शव के अंतिम संस्कार में देरी या गड़बड़ी पर भी जवाबदेही तय करनी होगी।

परिवार की मांग

भूपेंद्र शर्मा ने न्याय की मांग की है। उन्होंने कहा, 'मेरी भतीजी कई सालों से त्रस्त थी। अगर समय रहते कार्रवाई होती तो आज वह जिंदा होती।' परिवार दूसरे पोस्टमार्टम और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।

मेरठ का यह मामला एक बार फिर परिवार के भीतर की हिंसा और बच्चे की असुरक्षा को उजागर करता है। पुलिस की जांच अभी जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक सबूत और गवाहों के बयान आने के बाद सच्चाई पूरी तरह सामने आएगी। अगर, आरोप साबित हुए तो दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए, ताकि ऐसे अपराधों पर अंकुश लगे।

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