मायावती ने सपा सांसद के घर पर हमले की तुलना गेस्ट हाउस कांड से की, जानिए क्या हुआ था बसपा सुप्रीमो के साथ?
Mayawati News: बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा सांसद रामजीलाल समुन के घर पर करणी सेना के कार्यकर्ताओं द्वारा किए हमले की तुलना गेस्ट हाउस कांड से की है। उन्होंने जबरदस्त हमला बोलते हुए सपा नेताओं पर दलित नेताओं को आगे कर राजनीति करने का आरोप लगाया है।
सपा सांसद रामजीलाल समुन के घर पर करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने बुधवार( 26 मार्च) को हमला कर दिया था। गौरतलब है कि सपा सांसद ने राणा सांगा पर विवादित टिप्पणी देते हुए उन्हें गद्दार बताया था। उनके इस बयान के बाद से करणी सेना के कार्यकर्ताओं में काफी आक्रोश थी। उन्होंने कहा था कि राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी को हराने के लिए बाबर के भारत बुलाया था। अगर मुसलमान बाबर की औलाद है तो तुमलोग गद्दार राणा सांगा के औलाद हो।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने X पर पोस्ट किया
बसपा सुप्रीमो मायावती ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा- आगरा की हुई घटना के साथ-साथ सपा मुखिया को इनकी सरकार में दिनांक 2 जून 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाऊस काण्ड में इस पार्टी द्वारा मेरे ऊपर कराया गया जानलेवा हमला भी इनको जरूर याद कर लेना चाहिये तथा इसका पश्चताप भी जरूर करना चाहिए।
आगे उन्होंने कहा सपा अपने राजनैतिक लाभ के लिए अपने दलित नेताओं को आगे करके जो घिनौनी राजनीति कर रही है अर्थात् उनको नुकसान पहुँचाने में लगी है, यह उचित नहीं। दलितों को इनके सभी हथकण्डों से सावधान रहना चाहिये। आगरा की हुई घटना अति चिन्ताजनक। साथ ही, सपा को अपने स्वार्थ में किसी भी समुदाय का अपमान करना ठीक नहीं, जिसके तहत अब इनको किसी समुदाय में दुर्गन्ध व किसी में सुगन्ध आ रही है। इससे समाज में अमन-चैन व सौहार्द बिगड़ेगा, जो ठीक नहीं।
क्या था गेस्ट हाउस कांड?
गेस्ट हाउस कांड भारतीय राजनीति के इतिहास की एक बेहद चर्चित और विवादास्पद घटना थी, जो 2 जून 1995 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में घटी थी। यह घटना बहुजन समाज पार्टी (BSP) और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच राजनीतिक टकराव का नतीजा था। 1993 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में बसपा और सपा ने मिलकर सरकार बनाई थी, और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन समय के साथ दोनों दलों के बीच मतभेद बढ़ने लगे। 1995 में, बसपा सुप्रीमो मायावती ने समाजवादी पार्टी से समर्थन वापस लेने का फैसला किया, जिससे मुलायम सिंह यादव की सरकार अल्पमत में आ गई।
2 जून 1995 को, मायावती अपने विधायकों के साथ लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस में थीं। सपा समर्थकों को यह पता चला कि बसपा सरकार गिराने जा रही है, तो कथित तौर पर सपा के कार्यकर्ताओं और विधायकों ने गेस्ट हाउस पर हमला कर दिया। इस घटना के दौरान बसपा विधायकों को गेस्ट हाउस में घेर लिया गया। मायावती को एक कमरे में बंद कर दिया गया और उनके साथ अभद्रता की गई। सपा समर्थकों ने गाली-गलौज और हाथापाई की। कहा जाता है कि बीजेपी विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने मायावती को बचाया और सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना के बाद मायावती ने समाजवादी पार्टी से गठबंधन तोड़कर बीजेपी के समर्थन से सरकार बना ली और खुद मुख्यमंत्री बन गईं।












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