लखनऊ पुलिस की कस्टडी में युवक की मौत, CM योगी ने परिवार को दी 10 लाख की मदद, बोले- आरोपी बख्शे नहीं जाएंगे
दिवाली पर्व से तीन दिन पहले, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस हिरासत में मारे गए व्यापारी मोहित पांडे के परिवार से मुलाकात की। सीएम योगी ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने पांडे के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च उठाने का वादा किया और परिवार को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ देने का आश्वासन दिया। 30 वर्षीय मोहित पांडे की शनिवार को पुलिस हिरासत में मौत हो गई, जिसके बाद से राजनीतिक हलकों में आक्रोश है।

मुख्यमंत्री का परिवार को समर्थन और आश्वासन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए परिवार को आवास, बच्चों की मुफ्त शिक्षा और सरकारी योजनाओं तक पहुंच देने का निर्देश दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मुलाकात में बक्शी का तालाब के विधायक योगेश कुमार शुक्ला और पार्षद शैलेन्द्र वर्मा भी मौजूद थे।
मुलाकात के बाद मोहित पांडे की मां, तपेश्वरी देवी ने कहा, "मुख्यमंत्री से मिलकर हम संतुष्ट हैं। उन्होंने हमें भरोसा दिलाया है कि न्याय के लिए पूरी कोशिश की जाएगी और मामले में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।"
क्या है पूरी घटना ?
मोहित पांडे का परिवार चिनहट के जैनबाद क्षेत्र का निवासी है। उनका आरोप है कि पुलिस की पिटाई के कारण मोहित की मौत हुई। परिवार का दावा है कि पांडे को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उस पर हमला किया और इलाज में देरी की, जिसके कारण मोहित की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, पांडे को हिरासत में अस्वस्थ होने के बाद पहले एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर एक बड़े अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मृत्यु हो गई।
इस घटना के बाद, 27 अक्टूबर को, एक सीसीटीवी फुटेज वायरल हुआ जिसमें पांडे को लॉकअप में पड़े हुए दिखाया गया है। परिवार ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने केवल एक छोटा हिस्सा जारी किया है ताकि वास्तविकता को छिपाया जा सके। जनता के विरोध के बाद पुलिस स्टेशन के कर्मचारियों के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया है, और प्रभारी अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है।
विपक्ष ने यूपी सरकार को घेरा
इस घटना ने राजनीतिक दलों को उत्तर प्रदेश सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने राज्य में पुलिस की बढ़ती बर्बरता की निंदा करते हुए कहा कि पुलिस हिरासत का नाम बदलकर 'यातना घर' कर देना चाहिए। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी भाजपा पर कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब करने का आरोप लगाते हुए इसे 'कानूनहीन राज्य' करार दिया। बसपा प्रमुख मायावती ने भी घटना की कड़ी निंदा की और सरकार से प्रभावी कदम उठाने की मांग की, ताकि परिवार को न्याय मिल सके।
पुलिस हिरासत में मौत की बढ़ती घटनाएं और चिंता
लखनऊ में पुलिस हिरासत में मौत का इस महीने का दूसरा मामला है। इससे पहले, 11 अक्टूबर को दलित युवक अमन गौतम की भी हिरासत में मौत हो गई थी, जिसने राज्य में राजनीतिक हलचल मचा दी थी। इन घटनाओं से राज्य की पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं और जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।












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