Mainpuri By Election: चुनाव तक ही रहेगा चाचा शिवपाल-भतीजे अखिलेश का प्यार या मिटेंगी दूरियां
Mainpuri By Election: कायम रहेगा चाचा शिवपाल-भतीजे अखिलेश का प्यार या वाकई मिटेंगी दूरियां
Mainpuri Loksabha By Election: उत्तर प्रदेश में मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। एक तरफ जहां बीजेपी (Bhartiya Janta Party) ने मैनपुरी में नेताओं की लंबी फौज उतार दी है वहीं इस समय सपा के मुखिया अखिलेश यादव अपने चाचा शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) को सहेजने में जुटे हुए हैं। पिछले दिनों अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और शिवपाल की मुलाकात के बाद मैनपुरी के सियासी समीकरण कुछ बदले जरूर हैं लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसको लेकर अभी कई तरह के कयास लगा रहे हैं। इन विश्लेषकों का कहना है कि अब देखना यह है कि क्या वाकई अखिलेश-शिवपाल के बीच बांडिंग नजर आती है और शिवपाल सपा के मंचों से डिंपल यादव (Dimpal Yadav) का प्रचार करते हैं या फिर अखिलेश-डिंपल की शिवपाल से मुलाकात महज एक फोटो सेशन ही बनकर रह जाएगा।

शिवपाल-अखिलेश की मुलाकात पर कई तरह के कयास
दरअसल समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव अपनी पत्नी डिंपल के साथ गुरुवार को सैफई में अपने चाचा शिवपाल यादव से मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी उत्सुकता पैदा कर दी है। एक सवाल जो सपा के प्रतिद्वंद्वियों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के दिमाग में समान रूप से घूम रहा है, वह यह है कि क्या अखिलेश और शिवपाल के बीच नया संबंध समय की कसौटी पर खरा उतरेगा या फिर पहले की तरह ही चुनाव के बाद बिखर जाएगा। हालांकि शिवपाल यादव डिंपल को जिताने का पूरा दावा ठोक रहे हैं।

क्या लंबा फासला तय करेंगे शिवपाल-अखिलेश
दरअसल गुरुवार को सैफई में यादव कुनबे में जो कुछ हुआ और उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले सामने आए घटनाओं के अनुक्रम में एक आश्चर्यजनक समानता दिखाई दे रही है और संदेह है कि क्या दो घटनाक्रम एक समान ही हैं और क्या ये उसी तरह से समाप्त हो जाएंगे या लंबा रास्ता तय करेंगे। यह पहली बार नहीं है जब दोनों चुनाव में एक-दूसरे का सहयोग करने का वादा कर रहे हैं। इससे पहले दोनों का एक-दूसरे पर निशाना साधने का इतिहास रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि केवल समय ही बताएगा कि दोनों 2024 के चुनावों तक साथ रह पाएंगे या नहीं।

दोनों के बीच पनपे प्यार का अंत सुखद होगा ?
जिस तरह गुरुवार को अखिलेश और डिंपल ने मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव के लिए शिवपाल के सैफई आवास पर मुलाकात की थी, ठीक उसी तरह विधानसभा चुनाव 2022 से इीक पहले अखिलेश यादव ने शिवपाल के लखनऊ स्थित आवास पर जाकर मुलाकात की थी। जब अखिलेश ने उनसे मुलाकात की थी। उस दौरान भी यादव खानदान ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा था। लेकिन बीजेपी सरकार बनने के महीनों बाद चाचा-भतीजा अलग हो गए थे। राजनीतिक पर्यवेक्षक अब उत्सुकता से देख रहे हैं कि शिवपाल और अखिलेश के बीच नए मिले प्यार का सुखद अंत होगा या नहीं।

सपा का दावा- इस बार लंबे समय तक चलेगी बांडिंग
हालांकि पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इस बार अखिलेश और शिवपाल का एक साथ आना लंबे समय तक चलने वाला है। सपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "अब, हम बेहतर समझते हैं कि भाजपा कैसे काम करती है और हमें इसका समाधान मिल गया है।" हालाँकि, भाजपा ने शिवपाल-अखिलेश के बीच मुलाकात और शिवपाल को स्टार प्रचारक बनाए जाने को लेकर कई तरह के दावे किए। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि मैनपुरी उपचुनाव में बीजेपी के सूपड़ा साफ करने के डर से ही सपा ने शिवपाल को अपना स्टार प्रचारक बनाया है।

ओम प्रकाश राजभर की पार्टी ने भी साधा निशाना
सपा के पूर्व सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) ने भी शिवपाल और अखिलेश के एक साथ आने पर कटाक्ष किया। SBSP के राष्ट्रीय प्रवक्ता अरुण राजभर ने ट्विटर पर सवाल किया कि क्या चाचा-भतीजा की मुलाकात संभव होती अगर यह मैनपुरी उपचुनाव नहीं होता। उन्होंने 27 जुलाई के ऑफिस मेमो को ट्वीट किया जो एसपी ने शिवपाल को जारी किया था और कहा था कि वह उन लोगों का पक्ष लेने के लिए स्वतंत्र हैं जो उन्हें अधिक सम्मान और सम्मान देना चाहते हैं। राष्ट्रपति चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ शिवपाल की मुलाकात के मद्देनजर मेमो जारी किया गया था।












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