Dimple Yadav Mainpuri:समाजवादी पार्टी की राजनीति में डिंपल यादव कब पास हुईं, कब फेल ? जानिए
Dimple Yadav political career: समाजवादी पार्टी ने मुलायम सिंह यादव के निधन से खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में उनकी बहू और अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को उतारा है। उपचुनावों से डिंपल यादव का रिश्ता 13 साल पुराना है। सपा में उनकी राजनीतिक यात्रा लोकसभा उपचुनावों से ही शुरू हुई थी। इससे पहले भी वह दो-दो बार लोकसभा उपचुनाव लड़ चुकी हैं और दोनों ही सीटें उनके पति अखिलेश यादव के समय से पहले इस्तीफा देने की वजह से खाली हुई थीं। डिंपल यादव दो बार लोकसभा आम चुनाव भी लड़ चुकी हैं। उनका अबतक का चुनावी करियर 50-50 का रहा है। यानि उन्हें जितनी बार जीत मिली है, उतनी ही बार उन्हें हार का भी मुंह देखना पड़ा है।

मैनपुरी में सपा ने डिंपल को बनाया है उम्मीदवार
उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने 5 दिसंबर को होने वाले मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में पार्टी की पूर्व सांसद डिंपल यादव को उम्मीदवार बनाया है। यह सीट सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन की वजह से खाली हुई है। डिंपल मुलायम की बड़ी बहू और समाजवादी पार्टी के प्रमुख और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में मुलायम ने मैनपुरी से भाजपा प्रत्याशी प्रेम सिंह शाक्य को 94 हजार से भी ज्यादा वोटों से हराया था। वह चुनाव सपा मायावती की बसपा के साथ गठबंधन करके लड़ी थी। यानि इस सीट पर बीएसपी ने मुलायम के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था।
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2009 और 2019 में डिंपल को मिल चुकी है हार
2019 के लोकसभा चुनाव में डिंपल यादव भी कन्नौज लोकसभा सीट से सपा-बसपा गठबंधन की संयुक्त उम्मीदवार थीं। लेकिन, इसके बावजूद बीजेपी के सुब्रत पाठक ने उन्हें 12 हजार से कुछ ज्यादा वोटों से पराजित किया था। डिंपल यादव की किसी लोकसभा चुनाव में यह पहली हार नहीं थी। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर का पहला चुनाव 2009 में लड़ा था। वह फिरोजाबाद से लोकसभा उपचुनाव में सपा उम्मीदवार थीं, लेकिन कांग्रेस के राज बब्बर से हार गई थीं। 2009 के लोकसभा चुनावों में अखिलेश यादव ने फिरोजाबाद और कन्नौज दोनों जगहों से जीत दर्ज की थी। लेकिन, उनके फिरोजाबाद सीट छोड़ने की वजह से वहां उपचुनाव करवाए गए थे।

2012 में कन्नौज से निर्विरोध उपचुनाव जीती थीं डिंपल
करीब तीन साल बाद यानि 2012 में डिंपल यादव को कन्नौज लोकसभा उपचुनाव में फिर से भाग्य आजमाने का मौका मिला। एक बार फिर यह सीट अखिलेश यादव के इस्तीफे की वजह से ही खाली हुई थी। वह यूपी के मुख्यमंत्री बनने के बाद विधान परिषद के सदस्य बने थे। इसबार कन्नौज का चुनाव डिंपल के लिए भाग्यशाली रहा और वह निर्विरोध सांसद चुनी गईं। डिंपल यूपी की चौथी और देश की 44वां लोकसभा सांसद थीं, जो निर्विरोध निर्वाचित घोषित हुई थीं। क्योंकि, भाजपा और कांग्रेस ने उम्मीदवार नहीं दिए और दो प्रत्याशियों ने नाम वापस ले लिए।

डिंपल यादव की जीत का रिकॉर्ड 50-50
2014 के लोकसभा चुनावों में जब मोदी लहर की वजह से उत्तर प्रदेश में भाजपा का भगवा लहराया था तो सपा से जीत दर्ज करने वाले 5 प्रत्याशियों में डिंपल यादव भी शामिल थीं। उन्होंने फिर से कन्नौज सीट से चुनाव जीता था। यहां पर उन्होंने भाजपा के सुब्रत पाठक को 20 हजार से कुछ कम वोटों से पटखनी दी थी। तब कांग्रेस ने यहां कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था और बीएसपी उम्मीदवार निर्मल तिवारी को सवा लाख से अधिक वोट मिले थे। इस तरह से लोकसभा के दो उपचुनावों में डिंपल को एक बार हार का सामना करना पड़ा है तो दूसरी बार निर्विरोध चुनी गई हैं। उपचुनावों में दोनों ही सीट सपा की सीटिंग सीटें ही थीं। जबकि, दो आम चुनावों में एक बार वह बिना बसपा के साथ गठबंधन में जीती थीं तो दूसरे में गठबंधन के बावजूद हार का सामना किया था।

मैनपुरी में पहली बार भाग्य आजमा रही हैं डिंपल
लोकसभा के सदस्य के तौर पर डिंपल यादव जल संसाधन मामलों की स्थाई समिति की सदस्य रह चुकी हैं। वह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की सलाहकार समिति की सदस्य की भी भूमिका निभा चुकी हैं। अगर वह मैनपुरी से उपचुनाव जीतती हैं तो यह कन्नौज के अलावा उनका दूसरा लोकसभा क्षेत्र होगा, जहां का वह दो लोकसभाओं 15वीं (उपचुनाव )और 16वीं (दूसरा कार्यकाल) में प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। 15 जनवरी, 1978 को महाराष्ट्र के पुणे में जन्मीं डिंपल यादव के पिता का नाम रामचंद्र सिंह रावत और मां का नाम चंपा रावत है। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के साथ उनकी चार साल के लव अफेयर के बाद 24 नवंबर, 1999 को शादी हुई थी। वह लखनऊ यूनिवर्सिटी से पढ़ी हैं और अपना पेशा सोशल वर्कर बताती हैं।












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