मिलिए लखनऊ के पहले पेशेवर बसकिंग सिंगर यश अग्रवाल से, एक अजनबी ने दिया जिंदगी को नया मोड़
विदशों में चर्चित 'बसकिंग' को नवाबों की नगरी लखनऊ की सुगंध में घोल रहे यश अग्रवाल। अपनी कला से लोगों का दिल जीत रहे हैं।

'बसकिंग' वह व्यक्ति होता है, जो सड़कों और अन्य पब्लिक प्लेस पर अपनी कला(सिंगिंग, डांस, पेंटिंग, एक्टिंग) को भुनाकर लाभ कमाता है। विदेशों में इस कला का प्रदर्शन आम बात है। लेकिन, इस कला के कदरदान अब इंडिया में भी देखने को मिलने लगे हैं। देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली इस बात की गवाह है।
खास बात यह है कि अब इस कला ने नवाबों की नगरी लखनऊ में भी पैर जमाने शुरु कर दिए हैं। जिसका जीता-जागता उदाहरण बनकर उभरे हैं 'यश अग्रवाल'। जी, हां... लखनऊ के निवासी यश लगातार स्ट्रीट सिंगिंग से लोगों का दिल जीत रहे हैं। सबसे पॉश और व्यस्त इलाके हजरतगंज में अपनी परफॉर्मेंस देकर लोगों को लुभाने में लगे हैं। आइए जानते हैं कैसे इनकी जिंदगी में यह मोड़ आया...
पहली बार शो किया, 600 रुपए कमाए
बसकिंग संगीतकार यश अग्रवाल कहते हैं कि मुझे सलाह दी जाती है कि अगर मैं अपनी इस कला को आगे ले जाना चाहता हूं, तो मुझे दिल्ली जाना चाहिए, लेकिन यह मेरे लिए कोई विकल्प नहीं है। आपको बता दें कि अग्रवाल ने पिछले साल हजरतगंज में रॉयल कैफे के बाहर अपनी परफॉर्मेंस दी थी। उन्होंने रोजाना लगभग 600 रुपए कमाए, लेकिन यश का मानना है कि एक कंफर्टेबल लाइफ के लिए बार बार स्ट्रीट सिंगिंग करना ही पर्याप्त नहीं होगा।
एक अजनबी ने दिया जिंदगी को नया मोड़
यह एक संयोग था कि मैंने स्ट्रीट सिंगिंग शुरू कर दी। मुझे याद है कि एक वक्त था, जब बुरे दिनों से गुजर रहा था। उस दौरान एक अजनबी (पेशे से डांसर) मेरे पास और मुझसे उसके लिए गाने को कहा। उसके बाद उसने ही मुझे सुझाव दिया कि मैं लोगों का फीडबैक जानने के लिए स्ट्रीट सिंगिंग करना शुरू कर दूं। साथ ही सोशल मीडिया पर अपनी इस कला का प्रचार करना भी शुरू कर दूं। इस टेक्नीक ने विदेशों में और भारत के कुछ महानगरीय शहरों में भी अच्छा काम किया है, लेकिन इस संस्कृति का विस्तार लखनऊ में अभी नहीं हुआ है।
ताने सुनने के बाद भी अपनी लगन में मगन यश
अग्रवाल ने कहा कि शुरुआत में, लोगों का फीडबैक बहुत ही हतोत्साहित करने वाला था और मुझे अक्सर मजाक का सामना करना पड़ता था। इतना ही नहीं लोग मेरे गाने की नकल तक उतारते थे। लेकिन कभी भी मायूस नहीं हुआ, अपनी मन की बात सुनता गया। आज लोग मुझे देखने के आदी हो गए हैं।
लखनऊ में बसकिंग कला एक चुनौती
वहीं, स्ट्रीट सिंगिंग का लखनऊ में भविष्य को लेकर यश ने बताया कि मुट्ठी भर कुछ लोग हैं, जिन्होंने लखनऊ की सड़कों पर छिटपुट रूप से इसे आजमाया, लेकिन समुदाय बेहद बिखरा हुआ है। ज्यादातर लोग करके इसे तुरंत बाद छोड़ देते हैं। एक बसकिंग कलाकार के लिए लखनऊ के लोग बडी चुनौतीपूर्ण है। यश अग्रवाल के पास लगभग दो हजार फॉलोअर्स के साथ एक यूट्यूब चैनल भी है, जहां उन्होंने चार गाने अपने अपलोड कर रखे हैं।
माता-पिता की जिम्मेदारी और लखनऊ के मोहब्बत
यश बताते हैं कि एक बार मुझे सुझाव दिया गया कि दिल्ली चले जाओ, वहां इस तरह की कला के लिए अपार संभावनाएं हैं। लेकिन, मैं लखनऊ छोड़ने का जोखिम नहीं उठा सकता, क्योंकि एक तो बहुत महंगा है। दूसरा, मेरा पूरा परिवार लखनऊ में ही है। माता-पिता की जिम्मेदारी है और उनकी देखभाल है।
सॉन्ग राइटिंग और सिंगिंग में बनाऊंगा करियर
यश कहते हैं कि कठिनाइयां बहुत आएंगी लेकिन, मैं अपना काम जारी रखूंगा। इस बात से जरूर परेशान हूं कि बसिंग को कैसे भुनाया जाए। लेकिन, हजरतगंज में परफॉर्म करना जारी रखूंगा और सॉन्ग राइटिंग में करियर बनाऊंगा।












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