Election 2024: बीजेपी के लिए इस बार बरेली नहीं आसान! गठबंधन प्रत्याशी प्रवीण ऐरन दे रहे टक्कर, जानिए कैसे?

Bareilly Lok Sabha Seat: '400 पार' के नारे के साथ लोकसभा चुनाव 2024 में दम भर रही भाजपा के लिए बरेली सीट पर जीत का राह आसान नजर नहीं आ रही। जानकारों की मानें तो उत्तर प्रदेश की बरेली लोकसभा सीट पर भाजपा इस बार अपनी अबतक की सबसे मुश्किल चुनावी जंग लड़ रही है। इसके पीछे के कई कारण हैं, जो भाजपा के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं।

भाजपा ने जहां इस सीट से नया प्रत्याशी उतारा है तो दूसरी तरफ इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार ने भी भगवा खेमे की मुश्किलें बढ़ा दी है। ऐसे में जानिए उन सभी समीकरणों के बारे में, जिसने बरेली सीट को और कड़ा टक्कर का बना दिया है।

Bareilly Lok Sabha Seat

8 बार के सांसद का कटा टिकट

बरेली सीट पर 2009 के अलावा 1989 से लगातार बीजेपी का कब्जा रहा है। लेकिन इस बार पार्टी के मौजूदा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार जो कि 8 बार यहां से सांसद रहे चुके चुके हैं। उनको उम्र के लिहाज से टिकट नहीं दिया है। पार्टी ने उनकी जगह छत्रपाल सिंह गंगवार को प्रत्याशी बनाया है।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या संतोष गंगवार की तरह छत्रपाल सिंह गंगवार भी पार्टी को जीत दिला पाएंगे? क्योंकि इस बार उनकी टक्कर प्रवीण सिंह ऐरन से हैं, जो कि कांग्रेस और सपा के इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि साल 1984 के बाद से अब तक सिर्फ एक बार ही संतोष गंगवार को हार का सामना करना पड़ा और वो भी उनको प्रवीण सिंह ऐरन ने ही हराया था।

प्रवीण सिंह ऐरन की स्थिति मजबूत

उस वक्त प्रवीण सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में थे। ऐसे में इस बार संतोष गंगवार के चुनाव मैदान में ना होने और गठबंधन प्रत्याशी होने के चलते प्रवीण सिंह ऐरन की स्थिति भी और मजबूत दिखाई दे रही है। सियासी जानकार तो यहां तक कह रहे हैं कि संतोष गंगवार के ना होने से कहीं ना कहीं इस बार प्रवीण सिंह एरन की राह जीत की तरफ बढ़ सकती है।

हालांकि भाजपा ने जिन पर संतोष सिंह की जगह दांव लगाया है, वो दो बार के विधायक और यूपी सरकार में मंत्री रह चुके हैं। लेकिन जानकारों की मानें तो बरेली सीट को संतोष गंगवार से ही हमेशा जोड़ा जाता रहा है। लेकिन कहा जा रहा है कि छत्रपाल की पकड़ संतोष गंगवार जितनी मजबूत नहीं है।

2009 में गंगवार को दी थी शिकस्त

इधर, प्रवीण सिंह एरन जो कि गठबंधन के प्रत्याशी हैं, उनको लेकर कहा जा रहा है कि वो जनता के बीच रहते आए हैं। इसी वजह है कि 2009 में उन्हें संतोष सिंह गंगवार को शिकस्त देने में मदद मिली थी। एरन सांसद के अलावा 2 बार के विधायक भी रहे चुके हैं।

जानिए प्रवीण सिंह एरन के क्या है दांवे?

इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी प्रवीण सिंह पेशे से वकील हैं। इसके अलावा वो पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी के संरक्षण में गठित ग़ैर राजनीतिक संस्था जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय युवा केंद्र से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। 2009 में जब प्रवीण सिंह सांसद बने तो बरेली में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, औद्योगिक गलियारा शुरू कराया। इसके अलावा बरेली जिले के लिए 92 करोड़ की स्वीकृति लेकर स्वच्छ पेय जल की सुविधा मुहैया करवाई। साथ ही बरेली एयरपोर्ट का प्रस्ताव पारित भी करवाया। ऐसे में जहां प्रवीण सिंह अपने पुराने कामों पर जनता के बीच जा रहे हैं तो दूसरी तरफ भाजपा प्रत्याशी मोदी की गारंटी को लेकर समर्थन मांग कर रही है।

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