"निरहुआ" की तरह कई दिग्गज नेता गाजीपुर छोड़कर चुनाव में फहरा चुके हैं परचम, जानिए
लखनऊ, 27 जून: उत्तर प्रदेश के रामपुर और आजमगढ़ में हुए लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी को शानदार जीत हासिल हुई है। इस जीत में गाजीपुर की भी चर्चा हो रही है। वो इस वजह से क्योंकि बीजेपी के उम्मीदवार निरहुआ गाजीपुर के ही रहने वाले हैं। गाजीपुर और आजमगढ़ जिला हालांकि एक दूसरे से सटा हुआ है लेकिन चुनाव में निरहुआ पर भी बाहरी होने के आरोप लगाए गए लेकिन उन्होंने हर तरीके से उसका जवाब दिया। दरअसल , निरहुआ गाजीपुर के पहले नेता नहीं हैं जो गाजीपुर से बाहर जाकर चुनाव में अपना परचम लहराया हो। इससे पहले कई राजनीतिक दिग्गज गाजीपुर से बाहर जाकर वहां के लोगों का दिल जीतने में सफल रहे हैं।

निरहुआ उर्फ दिनेश लाल यादव ने आजमगढ़ में हासिल की जीत
गाजीपुर के रहने वाले दिनेश लाल यादव निरहुआ ने पहली बार 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे। हालाकि इस चुनाव में उनके सामने अखिलेश यादव थे। अखिलेश के सामने निरहुआ का कद छोटा पड़ गया और चुनाव हार गए। हालाकि निरहुआ ने हिम्मत नहीं छोड़ी और चुनाव प्रचार में लगे रहे। विधानसभा चुनाव में खाली हुई आजमगढ़ सीट से बीजेपी ने उपचुनाव में फिर निरहुआ को टिकट दे दिया। इस बार समीकरण कुछ यूं बना कि निरहुआ इस बार संसद पहुंचने में कामयाब हो गए।

कलराज मिश्र देवरिया से बने थे सांसद
बीजेपी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र भी गाजीपुर के रहने वाले हैं। कलराज मिश्र 2014 के लोकसभा चुनाव देवरिया से लड़े थे। गाजीपुर से जाकर कलराज मिश्र ने कुशीनगर में परचम लहराने का काम किया था। 2014 के चुनाव के बाद उम्र ज्यादा होने की वजह से अगली बार कलराज मिश्र का टिकट काट गया लेकिन बीजेपी के आला कमान ने उनको सम्मान देते हुए राजस्थान का गवर्नर बना दिया। अभी भी वो राजस्थान के राज्यपाल हैं। कलराज मिश्रा भी यूपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे थे और यूपी की राजनीति में काफी कद्दावर नेता माने जाते हैं।

महेंद्र पांडे ने चंदौली में लहराया परचम
गाजीपुर के रहने वाले महेंद्र पांडे भी अपने काम और रसूख के दम पर बीजेपी ने उनको उत्तर प्रदेश बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उनको बीजेपी की कमान सौंपी गई थी। खुद उनको चंदौली से टिकट दिया गया। वहां जाकर उन्होंने जीत हासिल की। हालाकि महेंद्र पांडे के लिए यहां चुनौती ज्यादा थी क्योंकि इससे पहले 2014 में इस सीट से राजनाथ चुनाव लड़कर संसद पहुंच चुके थे। हालाकि विपरीत परिस्थितियों में जीत हासिल की थी।

दयाशंकर दयालु योगी सरकार में बने बनारस से विधायक
उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में बनारस से लड़ने वाले दयाशंकर दयालु भी गाजीपुर के रहने वाले हैं। गाजीपुर से बनारस जाकर उन्होंने राजनीति में एक जगह बनाई और चुनाव में बेहतर प्रबंधन के बल पर आला कमान का विश्वास हासिल किया था। योगी की दूसरी सरकार में दयाशंकर दयालु जितने में कामयाब रहे। चुनाव जीतने के बात दयाशंकर को इनाम मिला और उनको योगी सरकार में मंत्री बना दिया गया।

मनोज सिन्हा के पास है जम्मू कश्मीर की कमान
गाजीपुर से सांसद रहे बीजेपी के वरिष्ठ नेता मनोज सिन्हा को भी जम्मू कश्मीर में एलजी बनाकर काफी अहम जिम्मेदारी मोदी ने दी थी। आज वो जम्मू कश्मीर में सरकार का चेहरा बने हुए हैं। हालाकि 2019 के लोकसभा चुनाव में उनको गाजीपुर से ही टिकट दिया गया था लेकिन वो चुनाव हार गए थे। चुनाव हारने के बाद से ही अटकलें लगाई जा रही थीं कि उन्हें मोदी राज्यसभा भेजेंगे। बाद ने यूपी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष को लेकर भी तेजी से उनका नाम उछला था। लेकिन आखिरकार पीएम मोदी ने उनको जम्मू कश्मीर जैसे अहम राज्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है।












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