Lemon man raebareli: MNC में 11 लाख की जॉब छोड़कर नींबू से छप्परफाड़ कमाई कर रहे आनंद मिश्रा

Lemon man raebareli: MNC में 11 लाख की जॉब छोड़कर नींबू से छप्परफाड़ कमाई कर रहे आनंद मिश्रा

रायबरेली, 29 मई। एमएनसी की नौकरी छोड़कर बागवानी में हाथ आजमाना शुरू किया तो लोगों ने मजाक बनाया। घर वालों ने भी विरोध किया। सबको लगता था कि मल्‍टीनेशनल कंपनी में एसी के कमरों में बैठकर काम करने वाले इस युवक को बागवानी में बिल्कुल भी 'आनंद' नहीं आएगा। मगर इंसान की सोच बड़ी हो और लीक से हटकर काम करने का जुनून हो और कामयाबी हासिल करने के लिए खूब मेहनत की जाए तो सब कुछ संभव है।

लैमन मैन रायबरेली आनंद मिश्रा

लैमन मैन रायबरेली आनंद मिश्रा

कहते हैं बड़ी सफलता हासिल करने के लिए कई बार बड़े जोखिम आपको उठाने पड़ते है। कुछ ऐसी ही कहानी उत्तर प्रदेश के रायबरेली शहर के आनंद मिश्रा की है। सालाना करीब 11 लाख रुपए का पैकेज छोड़कर नींबू की बागवानी कर रहे आनंद न केवल खुद छप्परफाड़ कमाई कर रहे हैं बल्कि यूपी हीं नही अन्‍य प्रदेश के दूर-दराज गांवों के किसानों और युवाओं को भी इसके गुर सिखा रहे हैं और उन्हें मालामाल करवा रहे हैं।

लैमन मैन आनंद मिश्रा यूपी का साक्षात्कार

लैमन मैन आनंद मिश्रा यूपी का साक्षात्कार

वन इंडिया हिंदी से बातचीत में आनंद मिश्रा ने मल्‍टीनेशन कंपनी में मैनेजर पद पर जॉब करने से लेकर अब यूपी के किसानों में लैमन मैन के रूप में पहचान बनाने तक का पूरा सफर बयां किया। इन्हें लैमन मैन इसलिए कहा जाता है कि ये दो एकड़ जमीन में नींबू की खेती करके लाखों रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं।

लैमन मैन ने क्‍यों चुनी नींबू की ही बागवानी

लैमन मैन ने क्‍यों चुनी नींबू की ही बागवानी

यूपी के लैमन मैन के नाम से मशहूर आनंद मिश्रा ने 13 साल मल्‍टीनेशन कंपनी में नौकरी की। इस दौरान वो जब भी अपने गांव जाते तो देखते उनका परिवार ही नहीं बल्कि बाकी किसान हर साल वर्षों से जो पारंपरिक खेती कर रहे हैं उससे उन्‍हें अधिक मुनाफा नहीं हो रहा। कई किसान ऐसे भी थे जो केवल अपने खेत की फसल से केवल लागत ही निकाल पाते थे। ये सब देखकर मन दुखी होता था। आनंद बताते हैं मैंने पहले काफी शोध के बाद पाया कि बागवानी में अच्‍छी कमाई हो सकती है, चूंकि केला, अमरूद, आंवला समेत अन्‍य फलों की बागवानी तो यूपी में प्रचलित थी लेकिन नींबू की खेती कोई नहीं कर रहा था। नींबू उत्‍तर प्रदेश की मंडियों में दक्षिण भारत और दूर दराज के राज्‍यों से आता था इसलिए मैंने थाइलैंड के बीज रहित नींबू की खेती करने का निर्णय लिया।

बीज‍रहित नींबू की बागवानी से 3 साल में हुआ जबरदस्‍त मुनाफा

बीज‍रहित नींबू की बागवानी से 3 साल में हुआ जबरदस्‍त मुनाफा

आनंद ने कहा उस समय मेरे शुभचिंतकों को लग रहा था कि खेती/ बागवानी करने वाले क्या कमाई करेगा? उनको जबाब देने में अपना समय बरबाद करने के बजाय मैं 2017 में कंपनी की नौकरी छोड़कर अपने गांव गया और वहां पर थाईलैंड से सीडलेस नींबू की खेती की शुरूआत एक एकड़ जमीन पर की। लगभग 400 पौधे नीबू के लगाए। एक पेड़ की कीमत 85 से 100 रुपए थी। पहली फसल में मुझे बहुत लाभ नहीं हुआ क्‍योंकि उस बार पेड़ लगाने की कीमत भी उसमें शामिल थी इसलिए 52 हजार का फायदा हुआ, लेकिन दूसरी फसल में मुझे 80 हजार का फायदा जब हुआ तो मेरा मनोबल बढ़ा और मैंने पूरे दो एकड़ में नीबू की खेती शुरू कर दी। जिससे अब मुझे लाखों की कमाई सलाना हो रही है।

लैमन मैन दें रहे सैंकड़ों किसानों को ट्रेनिंग

लैमन मैन दें रहे सैंकड़ों किसानों को ट्रेनिंग

आनंद मिश्रा की नींबू के बाद अमरूद की बागवानी भी शुरू कर दी है उनके हो रहे लाभ को देखकर पहले उनके गांव के आसपास के किसान और फिर धीरे-धीरे प्रदेश के कई जिलें जिनमें प्रतापगढ़, सुल्‍तानपुर, लखनऊ,पीलीभीत, कानपुर समेत अन्‍य जिलों के किसानों तक मीडिया के जरिए आनंद मिश्रा की बागवानी पॉपुलर हुई इसके बाद उन्‍होंने अपने साथ अन्‍य किसानों का लाभ हो इसके लिए किसानों की ट्रेनिंग देनी शुरू की। वर्तमान समय में लैमन मैन से ट्रेनिंग लेकर जिन किसानों ने नीबू की बागबानी शुरू की वो भी मालामाल हो चुके है और हो रहे हैं। इतना ही नहीं प्रदेश का कृषि विभाग द्वारा आयोजित ट्रेनिंग कार्यक्रमों में जाकर लैमन मैन किसानों को बागवानी का प्रशिक्षण दे रहे हैं।

एक बार के लगाए पेड़ से किसान ३० सालों तक मुनाफा कमाता है

एक बार के लगाए पेड़ से किसान ३० सालों तक मुनाफा कमाता है

आनंद बताते हैं कोरोना काल में नींबू की डिमांड बाजार में बहुत बढ़ गई है ऐसे में मेरा ये प्रयास रहता है कि बिना बिचौलियों के किसान का नींबू शहर की बाजार तक डॉयरेक्‍ट पहुंचे और उसे उसकी फसल की अच्‍छी कीमत मिले इसके लिए भी मार्केटिंग के गुर भी किसानों को सिखा रहे हैं। आनंद ने कहा मैं आजीविका का साधन नहीं बल्कि समाज के स्वघोषित बुद्धिजीवी व आमजनमानस में कृषि /बागवानी के प्रति व्याप्त संकीर्ण सोच व उदासीनता को खत्‍म करने के लिए कृषि/बागवानी के क्षेत्र में मैं आया हूं। बागवानी में ,शुरुआती लागत भी ज्यादा नहीं लगती हैं जो लगती हैं वो महज 1 से दो साल में ही वापस आ जायेगी, एक बार के लगाए पेड़ से किसान ३० सालों तक मुनाफा कमाता है। नींबू के पेड़ की रखवाली बस फल आने पर ही करनी होती है क्‍योंकि नींबू की पत्‍ती को बकरी या अन्‍य जानवर भी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।

लैमन मैन रायबरेली का लक्ष्‍य

लैमन मैन रायबरेली का लक्ष्‍य

आनंद सोशल मीडिया के जरिए विदेश में रह रहे लोगों के बीच भी फेमस हो चुके हैं लोग किचन गार्डेन में नींबू का पौधा लगाने के लिए सलाह लेने के लिए विदेश से भी फोन करते हैं। कोरोना काल में भी हर दिन लगभग 30 फोन बागवानी की जानकारी लेने के लिए आते हैं। 47 वर्षीय आनंद ने चाहते हैं जो युवा कृषि कार्यों में रुचि रखतें हैं आगे आए और बागवानी करें।उत्‍तर प्रदेश के रायबरेली जिले के डीह पोस्‍ट के अंतर्गत आने वाले कचनावा गांव में 2017 में नींबू की बागवानी की शुरूआत की। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चौधरी चरणसिंह किसान सम्मान से सम्मानित लैमन मैन आनंद उत्तर प्रदेश के प्रमुख नींबू उत्पादक तो है ही साथ महज तीन साल में बागवानी विशेषज्ञ, मोटिवेशनल स्पीकर, बागवानी के माध्यम से किसानों की आमदनी बढ़ावाने के लिए देश के प्रमुख बैंक के साथ Mou किसानों को बागवानी की ट्रेंनिग दे रहे हैं और "लेमन मैन किसान पाठशाला" का संचालन कर रहे हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश कृषि निर्यात नीति समिति और लखनऊ मंडल और किसान मंडी भवन ,गोमती नगर लखनऊ (उत्तर प्रदेश) के सदस्‍य भी हैं।

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