यूपी: जब एक ही सीट पर आमने-सामने लड़े दो धर्मेंद्र, चुनाव के नतीजे आए तो हर कोई चौंका
जीत-हार का गणित लगा रहे सियासी जानकार उस वक्त चौंक गए, जब धर्मेंद्र यादव के नाम से दो नामांकन दाखिलए हुए।
नई दिल्ली, 18 नवंबर: पांच राज्यों- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर देश का सियासी पारा चढ़ा हुआ है और राजनीतिक दल अपनी-अपनी जीत की रणनीति बनाने में जुटे हैं। सियासी तौर पर इन पांचों राज्यों में सबसे ज्यादा हलचल उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रही है, जहां फिलहाल भाजपा की सरकार है। ऐसे में हम आपको उत्तर प्रदेश में इससे पहले के हुए कुछ ऐसे चुनावों की झलक दिखाने जा रहे हैं, जो कुछ खास वजहों से काफी चर्चा में रहे। 2009 के लोकसभा चुनाव में यूपी की बदायूं सीट पर हुआ चुनाव भी कुछ ऐसा ही था, जहां दो धर्मेंद्र यादव आमने-सामने थे।

शेरवानी का पत्ता कटा, मुलायम के भतीजे को मिला टिकट
2009 के लोकसभा चुनाव में देश की बाकी सीटों की तरह बदायूं सीट पर भी सियासी माहौल गरमाया हुआ था। इस सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा था और पिछले लगातार चार बार से सलीम इकबाल शेरवानी यहां से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंच रहे थे। हालांकि 2009 में समाजवादी पार्टी ने सलीम इकबाल शेरवानी का टिकट काटते हुए मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेंद्र यादव को बदायूं सीट से लोकसभा के चुनाव में उतारा। टिकट कटने से नाराज सलीम इकबाल शेरवानी ने समाजवादी पार्टी से बगावत कर दी और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में उतर गए।

धर्मेंद्र यादव के नाम से दाखिल हुआ एक और पर्चा
बदायूं का ये चुनाव उस वक्त और रोमांचक हो गया, जब बीएसपी ने यहां से बाहुबली नेता डीपी यादव को टिकट दिया। इस लोकसभा चुनाव में भाजपा ने गठबंधन के तहत बदायूं सीट जेडीयू को दी और पार्टी के नेता डीके भारद्वाज को चुनाव मैदान में उतारा गया। हालांकि इस सीट पर मामला पूरी तरह से त्रिकोणीय था और सपा, बसपा व कांग्रेस के मुकाबले में जेडीयू प्रत्याशी को कमजोर माना जा रहा था। चुनाव के लिए नामांकन शुरू हुए और बदायूं में जीत-हार का गणित लगा रहे सियासी जानकार उस वक्त चौंक गए, जब समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव के अलावा एक और पर्चा धर्मेंद्र यादव के नाम से ही दाखिल हुआ।

कौन थे दूसरे धर्मेंद्र यादव
दरअसल ये दूसरे धर्मेंद्र यादव कोई और नहीं, बल्कि बीएसपी उम्मीदवार डीपी यादव के भांजे थे, जिन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर बदायूं सीट से अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन पत्रों की जांच के बाद चुनाव आयोग ने जब चुनाव चिन्ह बांटे, तो निर्दलीय उम्मीदवार धर्मेंद्र यादव को 'स्कूटर' चुनाव निशान दिया गया। चुनाव संपन्न हुए और जब वोटों की गिनती की गई, तो सपा उम्मीदवार धर्मेंद्र यादव ने 2,33,744 वोट हासिल करते हुए जीत दर्ज की। बीएसपी के डीपी यादव दूसरे और कांग्रेस के सलीम इकबाल शेरवानी यहां तीसरे स्थान पर रहे।

चौंकाने वाले क्यों थे चुनाव नतीजे
इन चुनाव नतीजों में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि निर्दलीय उम्मीदवार धर्मेंद्र यादव को 10,368 वोट मिले। हालांकि, धर्मेंद्र यादव ने अपने चुनाव में कोई खास प्रचार नहीं किया था, लेकिन इसके बावजूद उनके वोटों का आंकड़ा 10 हजार के पार था। भाजपा-जेडीयू गठबंधन के तहत चुनाव मैदान में उतरे डीके भारद्वाज यहां 74,079 वोट हासिल कर चौथे नंबर पर रहे थे। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में भी बदायूं सीट पर समाजवादी पार्टी ने ही जीत दर्ज की, लेकिन 2019 में यहां से बीएसपी छोड़कर भाजपा में आए स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतकर सांसद बनीं।
ये भी पढ़ें- ढाबे वाले बाबा के बाद अब वायरल हुए 'अंडे वाले अंकल', कहानी ऐसी कि आंखों से छलक जाएंगे आंसू











Click it and Unblock the Notifications