ढाबे वाले बाबा के बाद अब वायरल हुए 'अंडे वाले अंकल', कहानी ऐसी कि आंखों से छलक जाएंगे आंसू
गगन अरोड़ा..., जिन्होंने जीवन में कई बार ठोकरें लेकिन, इसके बावजूद आज फिर अपनी मेहनत के बलबूते खड़े हैं।
नई दिल्ली, 16 नवंबर: अक्सर आपने सुना होगा कि कोई इंसान अपनी मेहनत और लगन के बल पर सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंच गया। इसके अलावा ये भी सुना होगा कि किसी शख्स ने अपने काम में लापरवाही बरती, जिसकी वजह से वो अर्श से फर्श पर आ गिरा। लेकिन, क्या आपने कभी कोई ऐसा मामला सुना है, जिसमें कोई इंसान पहले ऊपर उठा, फिर नीचे गिरा और इसके बाद एक बार फिर से ऊपर उठ गया। अगर नहीं, तो हम आपको आज एक ऐसे ही शख्स से मिलाने जा रहे हैं, जिसकी कहानी सुनकर शायद आपकी आंखें भी भीग जाएं।

कौन हैं ये 'अंडे वाले अंकल'?
इस शख्स का नाम है गगन कुमार अरोड़ा और जिन्हें दिल्ली के विकासपुरी के ब्लॉक सी इलाके में लोग 'अंडे वाले अंकल' के नाम से जानते हैं। फेसबुबक पेज 'Hmm' पर शेयर किए गए वीडियो में गगन कुमार अरोड़ा ने बताया कि उन्होंने दिल्ली में केबल का काम शुरू किया था, लेकिन बाद में वो काम बंद हो गया। इसके बाद उन्होंने करीब डेढ़ साल तक दिल्ली में ही ई-रिक्शा चलाया और अब इसी ई-रिक्शा पर वो अपनी अंडे की रेहड़ी लगाते हैं, जहां वो कई तरह के ऑमलेट बनाकर बेचते हैं। इस दौरान गगन के बड़े भाई का निधन हो गया और उनकी दो बेटियों की जिम्मेदारी भी उनके ही कंधों पर आ गई। आइए, आगे की कहानी गगन अरोड़ा के शब्दों में ही पढ़ते हैं।

'सात साल का था, तो पापा का निधन हो गया'
गगन अरोड़ा ने बताया, 'मेरे पापा और बड़े भाई शुरू से ही होटल लाइन में थे। किसी समय तिहाड़ में खाना बनाने का ठेका मेरे पापा के पास था। हमारे परिवार में सभी लोगों के शरीर फैटी थे, जिसकी वजह से हमें बीपी और हार्ट जैसी बीमारियां जल्दी लगती थीं। मैं जब सात साल का था, जब मेरे पापा का निधन हो गया। पढ़ाई-लिखाई ज्यादा हो नहीं पाई और मैंने टू-व्हीलर का काम सीखना शुरू किया। शाम को 5 बजे तक टू-व्हीलर का काम करता था और उसके बाद भाई के साथ होटल पर हाथ बंटाता था।'

'किस्मत ने पलटी मारी और मैं सड़क पर आ गया'
अपनी कहानी में गगन अरोड़ा ने आगे बताया, 'परिवार में दो बहनें हैं, जिनकी शादी हो चुकी है और मेरे एक जीजाजी केबल का काम करते थे। मैंने भी केबल का काम शुरू किया और करीब 16 साल तक बिजनेस बढ़िया चला। इसके बाद किस्मत ने पलटी मारी और सेट टॉप बॉक्स आए... कनेक्शन कम होने की वजह से मेरा काम बंद हो गया और मैं फिर से सड़क पर आ गया। उसी दौरान मेरे बड़े भाई का भी निधन हो गया और उनकी दोनों बेटियों की जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई। कभी-कभी ऐसा भी होता था कि मेरे पास खाना खाने के पैसे नहीं होते थे।'

'मैं कर्ज में दब गया और अपना घर बेच दिया'
अपने बुरे दिनों को याद करते हुए गगन अरोड़ा ने बताया, 'मेरे भाई बीमार रहते थे और एक दिन मुझसे बोले कि अगर मुझे कुछ हो गया तो क्या तू मेरे बच्चों को पाल लेगा। मेरी आखें भर आईं। उनकी दो बेटियों में से मैं एक की शादी कर चुका हूं और दूसरी की पढ़ाई-लिखाई भी अच्छी कराई है। खैर मैं अपनी कहानी पर वापस आता हूं, जब मेरा केबल का काम बंद हो गया तो मेरे एक दोस्त ने मुझे जुआ खेलना सिखाया। मैं 5 रुपए से जुआ खेला और 450 रुपए जीत गया। इसके बाद मुझे जुए की ऐसी लत लगी कि मेरे ऊपर लाखों का कर्जा हो गया और मैंने अपना 50 लाख का मकान 30 लाख रुपए में बेच दिया। मैं अपने परिवार के साथ सड़क पर आ गया।'

'बस इतनी इच्छा है कि बच्चों के सिर पर छत देकर जाऊं'
गगन अरोड़ा ने आगे बताया, 'मेरे बच्चों के सिर से छत चली गई और तब मुझे ऐहसास हुआ कि मैंने क्या कर दिया। इसके बाद मैंने ई-रिक्शा लिया और करीब डेढ़ साल तक इसे चलाया। फिर ये अंडे की रेहड़ी शुरू की। अब मैं जो कुछ भी कर रहा हूं, अपने बच्चों के लिए कर रहा, क्योंकि मैंने अपने लिए जो करना था, वो कर लिया। मुझे दुख है कि मैंने खुद अपने बच्चों के सिर से उनकी छत छीन ली। मुझे भरोसा नहीं कि मैं कब तक जिऊंगा, लेकिन बस इतना चाहता हूं कि जब तक जिऊं, अपने बच्चों के लिए कुछ करके जाऊं, उनके सिर पर छत देकर जाऊं।'

क्या है 'अंडे वाले अंकल' का एड्रेस
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सबसे आखिर में गगन अरोड़ा ने कहा, 'मैं और मेरा परिवार आज किराए के घर में रहते हैं, लेकिन खुश हूं। मेरे मन में बस एक ही इच्छा है कि मैं अपने बच्चों के लिए एक घर बना जाऊं।' ये थी गगन अरोड़ा की कहानी, जो जीवन में कई बार ठोकरें खाने के बावजूद आज फिर अपनी मेहनत के बलबूते खड़े हैं और लगातार संघर्ष कर रहे हैं। आपको बता दें कि गगन अरोड़ा दिल्ली के विकासपुरी इलाके के ब्लॉक सी में डीडीए मार्केट के ठीक सामने अंडे की रेहड़ी लगाते हैं, जहां वो ऑमलेट सहित अंडों से कई तरह के लजीज आइटम बनाकर बेचते हैं।'












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