Popular Front of India: लखनऊ हिंसा से चर्चा में आए PFI के बारे में जानिए, ईशनिंदा पर केरल में लेक्चरर का काटा था हाथ

दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ उत्तर प्रदेश में सबसे पहले राजधानी लखनऊ में पिछले सप्ताह गुरुवार को हिंसक प्रदर्शन हुए और अगले ही दिन जुमे की नमाज के बाद अन्य कई जिलों में प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी, आगजनी, फायरिंग, बमबाजी और पुलिस से भीड़ की झड़प हो गई। उत्तर प्रदेश में हुए हिंसक प्रदर्शन में 18 लोगों की मौत हो गई। सबसे पहली मौत लखनऊ हिंसा में ही हुई जिसमें 50 अन्य घायल हो गए। लखनऊ में हिंसा भड़काने में पॉपुलर फ्रंट इंडिया नाम के संगठन का नाम सामने आया। पुलिस ने संगठन के प्रेसिडेंट वसीम अहमद, खजांची नदीम और पदाधिकारी अशफाक को गिरफ्तार कर लिया। लखनऊ एसएसपी कलानिधी नैथानी ने कहा कि पीएफआई के सदस्यों ने लखनऊ में कई सभाएं कीं, भड़काऊ पर्चे बांटे और इसके सबूत और गवाह दोनों पुलिस के पास हैं। एसएसपी ने बताया कि पीएफआई ने लखऩऊ हिंसा में प्रदर्शन के लिए लोगों को जुटाने और भड़काने का काम किया। मेरठ में भी पुलिस ने पीएफआई के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया। इसी के साथ यह संगठन चर्चा में आ गया जिसका नाम बहुत लोगों ने पहली बार सुना। आइए जानते हैं पीएफआई के बारे में:

सिमी, एनडीएफ, पीएफआई, केडीएफ और सीएफआई

सिमी, एनडीएफ, पीएफआई, केडीएफ और सीएफआई

स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI), नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (NDF), पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी (KDF) और कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI), इन सभी संगठनों के तार एक-दूसरे से जुड़े हैं। बैन आतंकी संगठन सिमी के संस्थापक सदस्यों में से एक पी कोया एनडीएफ की माउथपीस मलयालम पत्रिका के संपादक रहे। सिमी से जुड़े कई लोग पीएफआई संगठन में पदाधिकारी बने जिसमें पीएफई के नेशनल चेयरमेन रहे अब्दुल रहमान सिमी के पूर्व नेशनल सेक्रेटरी थे। मुस्लिम संगठन एनडीएफ 1994 में केरल में बना। 2006 में पीएफआई बना और इसमें एनडीएफ समेत दक्षिण भारत के केडीएफ जैसे कई संगठनों का विलय कर दिया गया। पीएफआई के अंदर इसके कई विंग हैं जो अलग-अलग लोगों के लिए हैं जैसे महिलाओं के लिए नेशनल वुमन्स फ्रंट, विद्यार्थियों के लिए कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया। पीएफआई का कहना है कि वह देश में अन्य मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर समाज में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों के लिए काम कर रहा है और उनके हक की लड़ाई लड़ रहा है।

केरल में लेक्चरर का हाथ काटने से आई चर्चा में

केरल में लेक्चरर का हाथ काटने से आई चर्चा में

4 जुलाई 2010 को केरल के एर्नाकुलम जिले के निर्मला कॉलेज के लेक्चरर टी जे जोसफ का हाथ ईशनिंदा करने की सजा देने के लिए काट दिया गया। इस वारदात का आरोप पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के सदस्यों पर लगा जिनको गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद यह संगठन चर्चा में आया। केरल के उस समय के लेफ्ट फ्रंट सरकार मुख्यमंत्री वी एस अच्युतानंदन ने कहा था कि पीएफई केरल को अगले 20 सालों में मुस्लिम स्टेट बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है और इसके लिए पानी की तरह पैसा बहा रहा है। उस समय कांग्रेस ने वाम मोर्चे की सरकार पर मुस्लिम समुदाय को टारगेट करने का आरोप लगाया था। लेक्चरर के हाथ काटने के मामले में कोर्ट ने पीएफआई के 13 सदस्यों को दोषी पाया और सजा सुनाई। 2012 में केरल सरकार ने इस संगठन को बैन करने के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की थी लेकिन कोर्ट ने मना कर दिया। जुलाई 2018 में एर्नाकुलम में एसएफआई के नेता अभिमन्यु की हत्या के आरोप में एसआईटी ने पीएफआई के जिलाध्यक्ष के गिरफ्तार किया। 2006 में संगठन के बनने के बाद इस पर 24 राजनीतिक हत्या में शामिल होने के आरोप हैं।

दक्षिण भारत में पीएफआई की उपद्रवी गतिविधियां: NIA

दक्षिण भारत में पीएफआई की उपद्रवी गतिविधियां: NIA

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने भी गृह मंत्रालय को सौंपे गए एक रिपोर्ट में बताया था कि पीएफआई देश में आतंकी गतिविधियां कर रहा है, टेरर कैंप चला रहा है, बम बनाने की ट्रेनिंग दे रहा है इसलिए इसको एंटी टेररिज्म लॉ UAPA के तहत बैन करना चाहिए। एनआईए ने सितंबर 2017 में गृह मंत्रालय में सौंपी गई रिपोर्ट में चार घटनाओं के बारे में बताया था जिस आधार पर पीएफआई को बैन करने की सिफारिश की थी। एनआईए ने इन घटनाओं में पीएफआई की संलिप्तता के बारे में बताया- केरल के एर्नाकुलम में ईशनिंदा पर एक प्रोफेसर का हाथ काट दिया गया, कन्नूर में एक ट्रेनिंग कैंप मिला जहां से तलवारें, देसी बम और आईईडी बनाने की सामग्री बरामद हुए, बंगलुरू में आरएसएस नेता रुद्रेश की हत्या हो गई और इस्लामिक स्टेट अल हिंदी संगठन के साथ मिलकर पूरे दक्षिण भारत में टेरर अटैक करने की साजिश रची।

पीएफआई पर कांग्रेस और भाजपा की 'राजनीति'

पीएफआई पर कांग्रेस और भाजपा की 'राजनीति'

भाजपा कांग्रेस पर पीएफआई के प्रति नरमी बरतने का आरोप लगाती रही है। 2015 में कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार ने दक्षिण भारत में आपराधिक गतिविधियों के आरोप में बुक किए गए 1600 पीएफआई और केएफडी एक्टिविस्ट पर से केस को वापस लेने का फैसला लिया था। सरकार का कहना था कि जांच के बाद यह पाया कि जिन एक्टिविस्ट के खिलाफ चार्जशीट लगाई गई वो शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के लिए जमा हुए थे। हिंसा में उनकी कोई भूमिका नहीं थी और वे भीड़ का हिस्सा नहीं थे। भाजपा ने आलोचना करते हुए कहा था कि कांग्रेस सरकार वोट बैंक के लिए ऐसा कर रही है जबकि पुलिस ने पीएफआई और केएफडी के असामाजिक और हिंसक गतिविधियों में लिप्त होने की रिपोर्ट राज्य कैबिनेट को दी थी।

झारखंड सरकार ने लगाया बैन

झारखंड सरकार ने लगाया बैन

फरवरी 2018 में पीएफआई को झारखंड सरकार ने बैन कर दिया। सरकार ने कहा कि यह संगठन इस्लामिक स्टेट से प्रभावित है। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया संगठन केरल में बना। झारखंड सरकार के मुताबिक, जांच में पता चला है कि इस संगठन के कई सदस्य चोरी-छुपे सीरिया गए और फिर लौटकर दक्षिण भारत के राज्यों में इस्लामिक स्टेट के लिए काम कर रहे हैं। झारखंड सरकार में प्रिंसिपल सेक्रेटरी (कानून) रहे दिनेश कुमार सिंह के मुताबिक, पीएफआई के बारे में मिली कई रिपोर्टों यह बताती हैं कि अल्पसंख्यकों के सामाजिक कल्याण की आड़ लेकर यह संगठन सीधे-सीधे उपद्रवी गतिविधियों में लिप्त है इसलिए इसको झारखंड में बैन किया गया। झारखंड में लगे बैन को पीएफआई ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने संगठन पर लगा बैन हटा दिया। फरवरी 2019 में झारखंड सरकार ने फिर से इस पर बैन लगा दिया।

पीएफआई आरोपों से करता रहा है इनकार

पीएफआई आरोपों से करता रहा है इनकार

पीएफआई संगठन बनने के बाद इस पर देशद्रोही गतिविधियां करने, इस्मालिक आतंकी संगठनों से संबंध रखने, हथियार रखने; अपहरण, हत्या, धमकाने, नफरत फैलाने, हिंसा करने और अन्य चरमपंथी गतिविधियां करने के आरोप लगते रहे हैं। पीएफए पर लव जिहाद के जरिए लोगों के धर्म परिवर्तन कराने का भी आरोप है। लेकिन इसके पदाधिकारी इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। एऩआईए के आरोपों पर पीएफआई का कहना था कि इन गतिविधियों के बारे में एजेंसी ने कभी संगठन से बात करने की कोशिश नहीं की।

सीएए पर बवाल से फिर पीएफआई चर्चा में

सीएए पर बवाल से फिर पीएफआई चर्चा में

उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर पिछले सप्ताह हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन को भड़काने के आरोप में पीएफआई फिर चर्चा में है और इसके कई सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पीएफआई ने अपनी साइट popularfrontofindia.org पर इस बारे में कहा है कि प्रदेश की भाजपा सरकार संगठन के खिलाफ साजिश कर रही है और प्रदर्शन को लेकर उस पर झूठे आरोप लगाकर उसके सदस्यों को फंसा रही है।

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