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Kedareshwar Temple: अखिलेश यादव बनवा रहे शिवाला, महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा, पढ़ें मंदिर से जुड़ी खास बातें

Kedareshwar Temple: समाजवादी पार्टी के मुखिया और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इटावा में एक भव्य शिव मंदिर का निर्माण करवा रहे हैं। यह मंदिर केदारनाथ धाम की तर्ज पर बनाया जा रहा है और इसे केदारेश्वर मंदिर नाम दिया गया है। महाशिवरात्रि के अवसर पर अखिलेश यादव ने इस मंदिर की एक झलक अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की, जिससे यह मंदिर सुर्खियों में आ गया।

महाशिवरात्रि के मौके पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव और अखिलेश यादव के चचेरे भाई अंशुल यादव अपनी पत्नी के साथ मंदिर पहुंचे। उन्होंने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और हवन-पूजन में भाग लिया। यह धार्मिक अनुष्ठान विशेष रूप से तमिलनाडु से आए पुजारियों द्वारा संपन्न कराया गया।

Kedareshwar Temple

भक्तों की उमड़ी भीड़, कांवड़ियों ने किया जलाभिषेक

इटावा सफारी पार्क के सामने बन रहे इस मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर में सुबह से ही कांवड़ियों का तांता लगा रहा, जिन्होंने भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
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तमिलनाडु से आए विशेष पुजारी

इस धार्मिक आयोजन को भव्य बनाने के लिए तमिलनाडु से विशेष पुजारियों को बुलाया गया था। उन्होंने पारंपरिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करवाई। सुबह से लेकर देर शाम तक ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

नहीं पहुंचे अखिलेश यादव और डिंपल यादव

महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव को मंदिर में आना था, लेकिन किसी कारणवश वे नहीं पहुंच सके। इसी तरह शिवपाल यादव भी इस आयोजन में शामिल नहीं हो सके। हालांकि, समाजवादी परिवार के अन्य सदस्यों ने इस अवसर को पूरी भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाया।

दक्षिण भारतीय शैली में बन रहा भव्य मंदिर

इस मंदिर की डिजाइन दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिरों की तर्ज पर की जा रही है। निर्माण कार्य अभी जारी है, लेकिन पूजा-पाठ पहले ही शुरू कर दिया गया है। माना जा रहा है कि यह मंदिर इटावा में एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में उभरेगा और यहां आने वाले भक्तों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होगा।

केदारेश्वर मंदिर की खास बातें

  • स्थान: लोहन्ना चौराहे से ग्वालियर हाईवे पर, लायन सफारी के सामने, 2 एकड़ में निर्माण।
  • भूमि पूजन: 2020 में अखिलेश यादव ने किया।
  • विशेष स्थान: शिव शक्ति अक्ष रेखा पर स्थित, जहां देश के 8 प्रमुख शिव मंदिर भी बने हैं।
  • डिजाइन: उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर की तर्ज पर बनाया जा रहा है।
  • निर्माणकर्ता: मदुरै और कन्याकुमारी के वही शिल्पकार, जिन्होंने तिरुवल्लुवर की प्रतिमा बनाई थी।
  • शिल्पकारों की टीम: 50 शिल्पकार इटावा में, 300 कारीगर तमिलनाडु में काम कर रहे हैं।
  • लागत: अब तक अनुमानित लागत ₹50-₹55 करोड़।
  • ऊंचाई: मंदिर की ऊंचाई 72 फीट होगी।

विशेष नंदी प्रतिमाएं:

  • पहला नंदी (13 फीट) - मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर।
  • दूसरा नंदी (7 फीट) - मंदिर परिसर में।
  • तीसरा नंदी (3 फीट) - गर्भगृह में।

विशेष पत्थर:

  • कृष्ण पुरुष शिला पत्थर - तमिलनाडु से 500 ट्रक में लाया गया, कुल वजन 75,000 टन।
  • बिना ईंट, लोहा, सीमेंट के निर्माण, तमिल ट्रेडिशन श्रीबंधन तकनीक से पत्थर जोड़े जा रहे।

संरचना:

  • 15 फीट ऊंची, 5 फीट चौड़ी पत्थर की बाउंड्री वॉल।
  • 4 प्रवेश द्वार (25 फीट ऊंचे) - आंध्र प्रदेश के भव्य मंदिरों की तर्ज पर।
  • मंदिर परिसर में औषधीय पौधे।

गर्भगृह की खासियत:

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