UP में तबादलों के खेल में नपे जितिन प्रसाद के OSD, विजिलेंस जांच व विभागीय कार्रवाई की भी अनुशंसा
लखनऊ, 19 जुलाई: उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से तबादलों में खेल को लेकर उठे तुफान को दबाने को लेकर बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू हो गई है। इसकी शुरूआत लोक निर्माण विभाग (PWD)विभाग से हुई है। लोक निर्माण विभाग में तबादलों में हुई अनियमितताओं की जांच के बाद सीएम योगी के निर्देश पर बड़ा कदम उठाते हुए यूपी के कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद के ओसीडी यानी विशेष कार्याधिकारी अनिल कुमार पांडेय को हटा दिया गया है। हालांकि विभाग के सूत्रों की माने तो अभी और लोगों पर कार्रवाई की गाज गिरनी तय है। इस ओएसडी को हटाये जाने को लेकर जितिन ने अभी कोई बयान नहीं दिया है।

दरअसल अनिल कुमार पांडेय हाल ही में केंद्र सरकार से प्रतिनियुक्ति पर यूपी आए थे। आदेश के अनुसार पाण्डेय के विरुद्ध विजिलेंस जांच और विभागीय कार्यवाही भी की जाएगी। इसी तरह यूपी में उपचिकित्साधिकारियों के तबादले के बाद पीडब्ल्यूडी में इंजीनियरों के तबादले में खेल का मामला सामने आया था। ये मामले मुख्यमंत्री के पास पहुंचे थे जिसे लेकर जांच कराई जा रही थी। जांच होने के बाद अब सीएम के स्तर से यह कार्रवाई की गई है।
दरअसल जितिन प्रसाद चुनाव से पहले ही कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे और यूपी में एक ब्राह्मण चेहरे के तौर पर यूपी में जगह मिली थी। अब वो योगी सरकार में मंत्री हैं। तबादलों में अनियमितताएं सामने आने के बाद से ही बहुत हंगामा मचा हुआ था। आरोप था कि विभाग ने ऐसे लोगों का भी तबादला कर दिया अब जिवित ही नहीं हैं। वहीं तीन वर्ष पूर्व हुए कनिष्ठ अभियंता घनश्याम दास का तबादला झांसी में कर दिया गया है।
दरअसल योगी सरकार की ओर से नई तबादला नीति जारी की गई है। इसके तहत ही कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादले होने हैं। इसके तहत एक जगह पर 3 साल से ज्यादा और एक डिवीजन में 7 साल से ज्यादा तक कोई भी कर्मचारी तैनात नहीं रह सकता है। इसी अधार पर हर विभाग में तबादले किए गए हैं। जबकि कुछ विभागों में इसकी अनदेखी का मामला सामने आने पर मुख्यमंत्री ने काफी सख्ती दिखाई है।
इससे पहले तबादले को लेकर ही यूपी के स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक और विभाग के सबसे बड़े अधिकारी अमित मोहन प्रसाद के बीच ठन गई थी। पाठक ने बकायदा पत्र लिखकर अमित मोहन प्रसाद से तबादलों की जानकारी मांगी थी। जिसपर अमित मोहन प्रसाद ने कहा था कि सभी तबादले मंत्री के अनुमोदन से ही किए गए हैं। इसके बाद यह मामला भी सीएम के दरबार में पहुंच गया था। हालांकि इस मामले में अभी दोनों तरफ से चुप्पी साध ली गई है।












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