PHOTOS: ताजमहल के पास 400 करोड़ रु. में बनी ये खूबसूरत इमारत, 114 साल से चल रहा है काम
आगरा। दुनिया के 7वें अजूबे ताजमहल के पास ही एक और लाजवाब इमारत देखने को मिली है। यह इमारत पिछले 114 साल बन रही थी, ताज की तरह ही इसकी नींव भी कुओं पर रखी गई। साथ ही निर्माण कार्य में सफेद संगमरमर इस्तेमाल किया गया। इमारत के गुम्बद का कलश धूप में दूर से ही चमकता है, जिसकी वजह है उस पर लगा सैकड़ों किलो सोना। वर्ष 1904 में करने आई मजदूरों की चौथी पीढ़ी अब इसे अंतिम रूप देने में लगी हुई है।

स्वामी बाग इमारत में हुआ 5 तरह के पत्थरों का इस्तेमाल
आगरा में राधास्वामी मत के संस्थापक पूरन धनी स्वामी महाराज की समाधि के रूप में स्थापित इस इमारत का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब इसे और तराशा व पोता जा रहा है। निर्माताओं ने इमारत के निर्माण कार्य में 5 तरह के पत्थरों का इस्तेमाल किया। सफेद संगमरमर ज्यादा लगा है।

स्वामी बाग के चेयरमैन संजय कपूर के अनुसार, इमारत में करीब 400 करोड़ की लागत आई। उन्हें इसे बनवाने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। आज डबल लेयर की गुंबद के अंदर लगी लाइट इसे दमका देती है। हालांकि, इसकी बड़ी खासियत है इसके गुम्बद पर मौजूद 155 किलो सोना। इसे लोग स्वामी बाग के नाम से पहचानते हैं। बकौल संजय, "स्वामी महाराज का जन्मदिन अगस्त में आता है तो इसी साल उस महीने इसका 99 फीसदी काम पूरा कर लिया गया था। बीते अगस्त स्वामी महाराज का 200वां जन्म समारोह भी यहां आयोजित हुआ था।

ऐसे लगाया गया सोना
यह इमारत बनने में 100 से ज्यादा साल इसलिए भी लगे क्योंकि, सफेद एवं गुलाबी रंग का संगमरमर मकराना राजस्थान से मंगवाकर लगाया गया। हरे रंग का संगमरमर बड़ौदा से लाया गया। अबरी संगमरमर पाली, जैसलमेर से लाए। दारचीनी पत्थर ग्वालियर, पच्चीकारी और जड़ाई के लिए कीमती पत्थर अकीक, मरगज, सिमाक, रतक, गवा, बिल्लौर, लाजवर्द, गौरी, पितोनिया, डूंगासरा, यशब बगैरा साउथ इंडिया से आया। सालों की मेहनत के बाद तो मंदिर का गुम्बद ही तैयार हुआ। गुंबद पर 15 किलो सोने की परत एवं 140 किलो सोने की नक्काशी की गई है।

हर रोज 300 मजदूरों ने काम किया
इमारत से जुड़े अधिकारी कहते हैं कि इस गगन चुम्भी एवं भारी भरकम इमारत को बनाने में हर रोज करीब 300 मजदूरों ने काम किया है। यह इमारत 52 कुओं पर बनाई गई है।












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