IITian Baba Caste: 4 साल के इश्क में धोखा या किस्मत का खेल? जाति बनी थी रोड़ा? अब जिंदगी को मिला दूसरा सहारा?
IITian Baba Abhey Singh Caste: प्रयागराज महाकुंभ 2025 में भगवा वस्त्र पहने, शांत स्वभाव और गहरी आध्यात्मिक बातों के साथ वायरल हुए IITian बाबा अभय सिंह अब एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनका संन्यास नहीं, बल्कि उनका शादी करने का फैसला है। पहली नजर में यह कहानी एक साधु के गृहस्थ बनने की लग सकती है, लेकिन असल में यह उससे कहीं ज्यादा गहरी है। यह 4 साल के एक गहरे इश्क की, परिवार की उथल-पुथल की, और शायद जाति-परिवार की अपेक्षाओं की भी कहानी है।
क्या वो पुराना रिश्ता टूटा क्योंकि अभय ट्रॉमा में चले गए थे? या फिर अभय और उनकी गर्लफ्रेंड के बीच जाति ने अनदेखा रोड़ा बनाया? अब अभय ने अपने नए जीवन की शुरुआत नए साथी के साथ शुरू कर दी है, जो उनकी जिंदगी का दूसरा और मजबूत सहारा बन गया है।

Abhey Singh Caste: 4 साल का इश्क और अचानक अलगाव, क्या था असली कारण?
प्रयागराज महाकुंभ 2025 में काफी सुर्खियां बटोरने के दौरान, मीडिया को अभय सिंह ने खुलकर अपनी जिंदगी का वो हिस्सा बताया जिसे पहले कम लोग जानते थे। उन्होंने कहा था कि घर में काफी झगड़े होते थे। माता-पिता आपस में लड़ा करते थे। पढ़ाई में भी दिक्कत होती थी। इस घरेलू माहौल पर उन्होंने एक फिल्म भी बनाई। फिल्म बनाने के बाद अभय ट्रॉमा में चले गए। कुछ भी महसूस नहीं होता था। शादी और परिवार का मन नहीं कर रहा था। मैंने अपनी गर्लफ्रेंड को सब बताया और हम दोनों अलग हो गए।
अभय ने साफ कहा कि अब उनकी पूर्व गर्लफ्रेंड की शादी हो चुकी है। चार साल तक चला यह रिश्ता अचानक खत्म हो गया। उन्होंने कभी स्पष्ट रूप से जाति का जिक्र नहीं किया, लेकिन सवाल उठता है कि क्या हरियाणा के जाट परिवार की और घरेलू तनाव ने रिश्ते को आगे बढ़ने नहीं दिया? या फिर यह सिर्फ किस्मत का खेल था, जिसमें अभय को अध्यात्म की पुकार पहले सुनाई दी?
IITian Baba Abhey Singh Caste: किस जाति से हैं आईआईटीएन बाबा अभय सिंह?
अभय सिंह मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले के सासरौली गांव के रहने वाले हैं। वे ग्रेवाल गोत्र के जाट परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता कर्ण सिंह वरिष्ठ वकील हैं और झज्जर बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान भी रह चुके हैं।
जाट समुदाय हरियाणा में बहुसंख्यक और प्रभावशाली माना जाता है। अभय की शुरुआती पढ़ाई झज्जर में हुई। परिवार उन्हें कोटा भेजना चाहता था, लेकिन उन्होंने दिल्ली में कोचिंग ली। फिर आईआईटी बॉम्बे में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में बीटेक, उसके बाद डिजाइनिंग में मास्टर डिग्री। कनाडा में एयरप्लेन बनाने वाली कंपनी में 3 लाख रुपये मासिक सैलरी वाली नौकरी की।
लेकिन 2021 के लॉकडाउन ने सब बदल दिया। भारत लौटकर अभय फोटोग्राफी, यात्राओं (केरल, उज्जैन कुंभ) में खो गए। 2024 में परिवार से संपर्क तक तोड़ लिया। काशी में गुरु सोमेश्वर पुरी से मुलाकात के बाद महाकुंभ पहुंचे और 'IITian बाबा' बनकर देश-विदेश में चर्चा में आए।
IITian Baba Abhey Singh Wife: अब नया सहारा बनी इंजीनियर पत्नी, दोनों अब एक ही सपना
15 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि पर हिमाचल के अघंजर महादेव मंदिर में प्रतीका से शादी, 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज। प्रतीका कर्नाटक की रहने वाली इंजीनियर हैं। अभय के साथ एक साल पहले मुलाकात हुई थी।
झज्जर पहुंचकर अभय ने भावुक होकर कहा कि पत्नी प्रतीका ही मुझे बैंक KYC और परिवार से मिलने लेकर आईं। दंपति फिलहाल हिमाचल की धर्मशाला में सादगी से रह रहा है। दोनों का सपना है कि सनातन यूनिवर्सिटी बनाना, जहां अध्यात्म और आधुनिक विज्ञान का मेल हो। प्रतीका ने कहा कि अभय बेहद सरल, ईमानदार और सच्चे इंसान हैं। हम सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाएंगे। गुरु और साधकों को एक जगह लाने की कोशिश है।
क्या जाति थी रोड़ा? या ट्रॉमा ने बदली कहानी?
अभय ने कभी स्पष्ट रूप से नहीं कहा कि पूर्व रिश्ता जाति के कारण टूटा। लेकिन हरियाणा के जाट परिवार में पारंपरिक अपेक्षाएं, घरेलू झगड़ों का ट्रॉमा और खुद की आध्यात्मिक खोज ने रिश्ते को आगे नहीं बढ़ने दिया। वहीं प्रतीका के साथ रिश्ता अलग क्षेत्र, अलग बैकग्राउंड से शुरू हुआ और आज दोनों एक साथ मिशन पर हैं।
किस्मत का खेल या दूसरा मौका?
IITian बाबा की कहानी बताती है कि जिंदगी कभी सीधी रेखा में नहीं चलती। 4 साल का इश्क टूटा, परिवार की उथल-पुथल ने ट्रॉमा दिया, जाति-परिवार की अपेक्षाएं शायद रोड़ा बनीं, लेकिन महाकुंभ की आध्यात्मिक ऊर्जा ने उन्हें नया रास्ता दिखाया। प्रतीका अब उनके साथ हैं।












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