किसानों की जल जाए फसल तो अपनाएं ये तरीका, मिलेगी तुरंत आर्थिक मदद
ऐसा करने वाले किसान को सौ प्रतिशत गारंटी के साथ सरकारी मदद दी जाती है। आवेदन में खलिहान दुर्घटना योजना का नाम अवश्य लिखें। ये रकम भी नुकसान के अनुरूप दी जाती है।
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश में हर साल सैकड़ों हेक्टेयर फसल आग की भेंट चढ़ जाती है। गर्मी की शुरुआत के साथ ही प्रतिदिन सूबे के अलग-अलग हिस्से से आगजनी की घटनाएं सामने आ रही हैं। जिसमें किसानों को भारी नुकसान हो रहा है लेकिन उनमे से कुछ किसानों को ही आर्थिक मदद मिल पाती है। आज OneIndia पीड़ित किसानों के लिए राहत की खबर लाया है। ये खबर हमारे पाठकों व किसानों को वो तरीका बता रही है। जिससे उन्हें सरकार नुकसान के हिसाब से आर्थिक मदद करेगी। हम आपको सरकार की 'खलिहान दुर्घटना योजना' के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

मंडी परिषद में 15 दिन के अंदर करें आवेदन
फसल अगर आग में जल जाए तो घटना के दिन से लेकर 15 दिनों के भीतर स्थानीय मंडी परिषद से संपर्क करना चाहिए। मंडी परिषद में पीड़ित किसान को स्वयं अथवा किसी माध्यम से अपने हस्ताक्षर युक्त आवेदन पर आर्थिक मदद के लिए आवेदन करना चाहिए। ऐसा करने वाले किसान को सौ प्रतिशत गारंटी के साथ सरकारी मदद दी जाती है। आवेदन में खलिहान दुर्घटना योजना का नाम अवश्य लिखें।
कितनी मिलेगी मदद?
आग से फसल का पूरा नुकसान भले ही किसान को न मिले लेकिन आर्थिक मदद के तौर पर किसान को 15-30 हजार रुपए मिलते हैं। ये रकम भी नुकसान के अनुरूप दी जाती है। जैसे एक हेक्टेयर की फसल जलने पर 15 हजार रुपए की मदद दी जाती है। जबकि एक से अधिक व दो हेक्टेयर तक की फसल जलने पर 20 हजार रुपए की मदद मिलेगी। जबकि दो हेक्टेयर से अधिक का नुकसान होने पर 30,000 रुपए तक पीड़ित किसान को आर्थिक मद्द मिलती है। सरकार की ये योजना सामान्य, लघु सीमान्त और सीमान्त किसानों के लिए चलाई जा रही है।
बजट का नो झंझट
इस योजना का सबसे बड़ा लाभ ये है की इसमें किसानों को तात्कालिक सहायता पहुंचाई जाती है। इस योजना में सरकारी बजट का कोई झंझट नहीं होता की बहाना बनाया जा सके की 'बजट नहीं है मदद कैसे करे?', ये किसानों की मदद के लिए बहुत बड़ी योजना है। इस योजना का सबसे आश्चर्यजनक पहलू ये है की इसमें कोई लक्ष्य और बजट का आवंटन नहीं होता है बल्कि अधिकाधिक किसानों को तात्कालिक सहायता या कहें की लाभ पहुंचाने का लक्ष्य होता है।
जानकारी के अभाव में भटकते किसान
ये योजना सिर्फ योगी सरकार में ही नहीं लागू है बल्कि सूबे की पूर्ववर्ती सरकार के समय में भी इस योजना से किसान लाभांवित हुए हैं। लेकिन जानकारी के अभाव में किसान भटकते हैं और लाभ से वंचित रह जाते है। मंडी परिषद के सचिव बताते हैं की अधिकांश किसानों को योजना की जानकारी ही नहीं है और जिन्हें जानकारी है भी वो समय से आवेदन नहीं करते हैं। इससे किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल पाता है। पीड़ित किसान को घटना के पंद्रह दिन के अंदर मंडी परिषद में आवेदन कर देना चाहिए।

क्यों निरस्त हो जाता है आवेदन
बहुत से किसान सरकारी विभाग के चक्कर से परेशान रहते हैं क्योंकि उनका आवेदन निरस्त हो जाता है। उसका एक बहुत बड़ा कारण ये है की किसान नियम का पालन नहीं करते और तय 15 दिन की समय अवधि के अंदर आवेदन नहीं करते। ये भी कहीं न कहीं जानकरी के अभाव में होता है। ऐसे में OneIndia अपने पाठकों से अपील करता है की वो इस खबर को पढ़ने के बाद किसानों को भी खलिहान दुर्घटना योजना के बारे में बताएं ताकि आर्थिक रूप से कमजोर हो रहे हमारे देश के किसान को लाभ हो सके।
इसे याद रखें
जैसा की आप जानते हैं किसानों की फसल अगर आग में जल जाती है तो पीड़ितों को सरकार की ओर से आर्थिक मदद के तौर पर राहत चेक दिए जाते हैं। ये चेक खलिहान दुर्घटना योजना के तहत आते हैं। इस योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलता है जो पंद्रह दिन के भीतर मंडी परिषद आवेदन करते हैं। तो अब कहीं कभी भी शॉर्ट सर्किट से या चूल्हे की चिंगारी से अथवा अन्य कारणों से फसल जल जाए तो किसान खलिहान दुर्घटना योजना का लाभ जरूर लें।












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