PM मोदी के गढ़ में BJP ने किया क्लीन स्वीप तो अखिलेश ने कैसे दिया करारा जवाब, जानिए
लखनऊ, 12 मार्च: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत देने वाली डबल इंजन सरकार के मुखिया पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और सीएम योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में एकतरफा जीत हासिल की है। वहीं, दूसरी ओर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ के साथ ही गाजीपुर की सभी सीटों पर जीत हासिल कर भाजपा को करारा जवाब दिया है। यही नहीं पूर्वांचल के करीब आधा दर्जन जिले ऐसे हैं जहां सपा ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी है। एक तरफ जहां काशी में मोदी की लहर दिखायी दी वहीं गोरखपुर में सीएम योगी की लहर ने बीजेपी को फायदा पहुंचाया।

काशी में दिखा मोदी लहर का असर
मोदी वाराणसी से सांसद हैं और जिले में कुल आठ विधानसभा क्षेत्र हैं। भाजपा और उसके सहयोगी अपना दल (एस) ने सभी आठ सीटों पर जीत हासिल की है। वाराणसी के सेवापुरी निर्वाचन क्षेत्र से नील रतन सिंह पटेल ने सपा के सुरेंद्र पटेल को 22,531 मतों से हराया। वाराणसी कैंट निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के सौरभ श्रीवास्तव ने सपा की पूजा यादव को 86,844 मतों के अंतर से हराया। वाराणसी उत्तर में राज्य मंत्री एवं भाजपा प्रत्याशी रवींद्र जायसवाल ने सपा के अशफाक को 40,776 मतों के अंतर से और वाराणसी दक्षिण सीट से भाजपा के डॉ. नीलकंठ तिवारी ने सपा के कामेश्वर दीक्षित को 10,722 मतों के अंतर से हराया. पिंडरा सीट पर भाजपा के डॉ. अवधेश सिंह ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बाबूलाल को 35,559 मतों के अंतर से हराया। इसी जिले के अजगरा निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के त्रिभुवन राम ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे सुनील सोनकर को 9,160 मतों के अंतर से हराया, जबकि अपना दल (सोनेलाल) के डॉ सुनील पटेल ने रोहनिया सीट पर भाजपा के सहयोगी दल को हराया। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी दल (कामेरावाड़ी) के अभय पटेल को 46,472 मतों के अंतर से हराया।

ओम प्रकाश राजभर के बेटे पर भारी पड़े अनिल राजभर
शिवपुर में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अनिल राजभर ने सुभासपा प्रत्याशी और ओम प्रकाश राजभर के बेटे अरविंद राजभर को 27831 मतों के अंतर से हराया। 2017 के चुनाव में, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और अपना दल (सोनेलाल) के उम्मीदवारों ने क्रमशः अजगरा और सेवापुरी सीटों से जीत हासिल की। अपना दल (एस) से सेवापुरी से जीतने वाले नीलरतन पटेल इस बार भाजपा उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे। वाराणसी में अंतिम चरण में 7 मार्च को मतदान हुआ था। मोदी ने वहां एक विशाल रोड शो किया और चुनाव से पहले वाराणसी में कुछ रैलियों को भी संबोधित किया।
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योगी के गढ़ में बीजेपी ने सभी 9 सीटें जीतीं
उधर, प्रसिद्ध गोरक्षपीठ के महंत योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में नौ विधानसभा सीटें हैं। यहां की सभी सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की है। योगी ने गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सपा की सुभावती शुक्ला को एक लाख से अधिक मतों के अंतर से हराया। गोरखपुर की सभी नो सीटों पर कब्जा जमान के अलावा गोरखपुर मंडल में भी योगी का असर देखने को मिला है। पूरे गोरखपुर मंडल में बीजेपी एक भी सीट नहीं हारी है। बीजेपी ने इसी रणनीति के तहत योगी को गोरखपुर से उतारा भी था जिसका फायदा भी बीजेपी को मिला।

आजमगढ़ और गाजीपुर में चली अखिलेश की हवा
अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी ने पूरे जिले की सभी 10 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है। आजमगढ़ सदर सीट पर सपा के दुर्गा प्रसाद यादव ने भाजपा के अखिलेश कुमार मिश्रा को 15,119 मतों के अंतर से हराया, अतरौलिया में सपा के डॉ. संग्राम यादव ने 17,247 मतों के अंतर से जीत हासिल की। निजामाबाद में सपा के आलम बदी ने भाजपा के मनोज यादव को 33,578 मतों के अंतर से हराया। सगड़ी विधानसभा क्षेत्र में सपा के डॉ एचएन पटेल ने भाजपा की वंदना सिंह को 21,778 मतों के अंतर से हराया। दीदारगंज सीट पर सपा के कमलाकांत राजभर ने भाजपा के कृष्ण मुरारी विश्वकर्मा को 13,21 के अंतर से हराया।

मनोज सिन्हा की मंदिर पॉलिटिक्स भी काम नहीं आयी
वहीं दूसरी ओर गाजीपुर की सात सीटों पर भी बीजेपी का सफाया हो गया है। यहां कद्दावर नेता मनोज सिन्हा को मोदी का बेहद खास माना जाता है। लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी मोदी ने मनोज सिन्हा को जम्मू कश्मीर का उप राज्यपाल बनाया था। लेकिन विधानसभा के अंतिम चरण से ठीक पहले मनोज सिन्हा गाजीपुर पहुंचे थे। उन्होंने आधिकारिक तौर पर तो किसी प्रत्याशी का प्रचार नहीं किया लेकिन गाजीपुर में मंदिर मंदिर जाकर लोगों से मिलते जरूर नजर आए। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो यह भी प्रचार का ही एक तरीका होता है। बहरहाल मनोज सिन्हा पर दबाव इसलिए था कि उनके कहने पर ही गाजीपुर की ज्यादातर सीटें दी गईं थीं। हालांकि गाजीपुर से बीजेपी के साफ होने के पीछे जिलाध्यक्ष की कमजोरी और गोलबंदी भी रही।












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