जिनसे थी सबसे ज्यादा उम्मीद उन्होंने UP चुनाव में किया निराश, पहली बार वोट करने वालों ने मतदान से बनाई दूरी
लखनऊ, 09 मार्च। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव संपन्न हो गए हैं और 10 मार्च को चुनाव के नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। नतीजों के सामने आने के बाद प्रदेश में नई सरकार का गठन भी हो जाएगा। लेकिन इस बीच एक दिलचस्प आंकड़ सामने आया है जो एक बेहतर भविष्य और अच्छे लोकतंत्र के लिहाज से कतई अच्छा नहीं है। दरअसल भारत में युवा आबादी किसी भी देश की तुलना में सबसे अधिक है, ऐसे में युवाओं से उम्मीद होती है कि वह देश के भविष्य को बेहतर करने के लिए अपना योगदान दें और इस दिशा में सबसे अहम कदम है कि मतदान में हिस्सा लेना। लेकिन उत्तर प्रदेश के युवाओं ने इस लिहाज से काफी निराश किया है।

19-29 साल के मतदाताओं में बड़ी गिरावट
उत्तर प्रदेश में युवा वोटर्स जिनकी उम्र 18-29 साल है उनकी संख्या में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। 2017 में कुल 14.12 मतदाता थे, जिनकी संख्या में इस चुनाव में 90.30 लाख का इजाफा हुआ है। लेकिन 18-29 साल के मतदाताओं की बात करें तो 2017 में इनकी कुल संख्या 4.06 करोड़ थी जो कम होकर इस बार 3.44 करोड़ पहुंच गई। यानि 2017 की तुलना में इस बार 18-29 साल के वोटर्स की संख्या में 61.28 लाख ही रही। यानि 2017 की तुलना में 18-29 साल के मतदाताओं की कुल संख्या में तकरीबन 5 फीसदी की गिरावट आई है। 2017 में 18-29 साल के कुल मतदाताओं का प्रतिशत 28.73 था जोकि 2022 में 22.93 फीसदी हो गया।

पहली बार के मतदाताओं में गिरावट
आंकड़ों को खंगाले तो यह बात सामने आती है कि इसमे सर्वाधिक गिरावट पहली बार के मतदाताओं की संख्या में आई है। 2017 में कुल 24.25 लाख मतदाता ऐसे थे जिन्होंने पहली बार वोट दिया था जबकि 2022 में यह संख्या कम होकर 17.95 फीसदी हो गई। 2017 में पहली बार वोट करने वालों की कुल संख्या 24.25 लाख थी जोकि 2022 में 19.89 लाख पहुंच गई। यानि पहली बार के मतदाताओं का इस बार कुल फीसदी 1.32 रहा जोकि 2017 में 1.72 था।

कई राज्यों में दिख रहा है ये ट्रेंड
चुनाव आयोग के आंकड़ों पर नजर डालें तो 18-29 साल के मतदाताओं की औसत संख्या में 15205 की गिरावट हुई है। वहीं अगर हर सीट पर जीतने वाले उम्मीदवार के औसत अंतर की बात करें तो यह 29505 है। ना सिर्फ यूपी बल्कि झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल में इसी तरह के आंकड़े देखने को मिले थे और युवा मतदाताओं की संख्या में गिरावट हुई थी। झारखंड में 14.03 फीसदी, बिहार में 12.48 फीसदी, पश्चिम बंगाल में 1.3 फीसदी की गिरावट देखने को मिली थी।

30-39 साल के वोटर्स सबसे अधिक
सर्वाधिक वोट फीसदी की बढ़ोतरी की बात करें तो यह 30-39 साल के आयु वर्ग में हुई है। 57.15 लाख यानि तकरीबन 16.39 फीसदी की बढ़ोतरी इस वर्ग में हुई है। 2017 में इसकी कुल संख्या 3.48 करोड़ थे जोकि 2022 में बढ़कर 4.06 करोड़ हो गई है। यानि कुल वोटर्स की तुलना में इस आयु वर्ग का वोटर का प्रतिशत 24.69 फीसदी से बढ़कर 27.01 फीसदी हो गया है। जोकि सबसे बड़ा मतदाता वर्ग है।

20-29 साल के मतदाताओं की भी सख्या गिरी
इससे पहले 20-29 साल के मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक थी लेकिन अब इसमे गिरावट देखने को मिली है, 2017 में इस वर्ग के कुल मतदाता 3.81 करोड़ थे जोकि 2022 में कम होकर 3.24 करोड़ रह गए हैं। यानि इसमे 56.92 लाख यानि 14.92 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। 2017 में 27.02 फीसदी के साथ यह इस आयु वर्ग में सबसे अधिक मतदाता थे। इस बार 20-29 साल के मतदाताओं का कुल फीसदी 21.60 फीसदी है।

50-59 साल के मतदाता बढ़े
अगर 50-59 साल के मतदाताओं की बात करें तो इसमे भी बड़ा उछाल देखने को मिला है। इसमे 37.41 लाख नए वोटर्स जुड़े हैं यानि यह 19.71 पीसदी है। 2017 में इस वर्ग के कुल मतदाता 1.89 करोड़ थे जोकि 2022 में बढ़कर 2.27 करोड़ हो गए हैं। 40-49, 60-69, 70-79 और 80 साल से अधिक उम्र के वोटर्स में 6.29 से लेकर 25.23 फीसदी तक का उछाल देखने को मिला है।

क्यों हुई गिरावट
माना जा रहा है कि 29 साल से कम उम्र के वोटर्स की संख्या में गिरावट की बड़ी वजह बेरोजगारी दर है। यूपी में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय स्तर से भी अधिक है। एनएसओ और पीएलएफआरएस के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी-मार्च 2021 के बीच यूपी में 15-29 साल के युवाओं में शहरी बेरोजगारी दर 23.2 फीसदी है जोकि 2020 में इसी क्वार्टर में 21.8 फीसदी थी। वहीं राष्ट्रीय बेरोजगारी दर की बात करें तो यह 10.6 फीसदी है।












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