ज्ञानवापी मस्जिद का विवाद क्या है? हिंदू पक्ष के हक में कौन-कौन से प्रतीक मिले? जिसपर उठी ASI सर्वे की मांग

Varanasi Gyanvapi Masjid controversy in Hindi: वाराणसी जिला अदालत ने शुक्रवार को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वैज्ञानिक और पुरातात्विक सर्वे की अनुमति दे दी है। एएसआई के इस वैज्ञानिक सर्वे से जुड़े स्टडी रिपोर्ट को 4 अगस्त से पहले अदालत में पेश करना होगा।

वाराणसी अदालत का यह फैसला हिंदू महिला श्रद्धालुओं की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई के बाद आया है। इसमें पूरे मस्जिद परिसर के सर्वे की मांग की गई थी। यह सर्वे वजूखाने को छोड़कर पूरे मस्जिद परिसर का होगा।

gyanvapi masjid controversy

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद
वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद लगभग उसी तरह का है, जैसा अयोध्या का भगवान राम मंदिर जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद था। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की वजह से 9 नवंबर, 2019 वह मसला हमेशा के लिए सुलझ चुका है।

1991 में ही डाली गई थी याचिका
1991 में वाराणसी के स्थानीय पुजारियों की ओर से वाराणसी की अदालत में कई याचिकाएं दायर की गईं। इसमें दावा किया गया था कि मुगल शासक औरंगजेब के आदेश पर 1669 में काशी विश्वनाथ मंदिर का हिस्सा तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण किया गया था। उन्होंने मांग की थी कि मस्जिद हटाकर वह जमीन हिंदुओं को दी जाए।

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पुनर्जीवित हुआ केस
उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद क्षेत्र में पूजा-अर्चना की भी अनुमति मांगी थी। यह मामला निष्क्रिय रहा और इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इसकी सुनवाई निलंबित कर दी थी। लेकिन, अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद 2019 के दिसंबर में एक बार फिर से ज्ञानवापी केस पुनर्जीवित हो गया। तब वाराणसी के एक वकील, विजय शंकर रस्तोगी ने ज्ञानवापी मस्जिद को बनाने में अवैधता का दावा करते हुए निचली अदालत में एक अर्जी दायर की थी और उसके पुरातात्विक सर्वेक्षण की मांग की थी। वह अदालत में भगवान स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर के प्रतिनिधि के तौर पर पेश हुए थे।

मां श्रृंगार गौरी की पूजा से जुड़ा है मामला
वैसे यह मामला मां श्रृंगार गौरी की पूजा से जुड़ा है, जो 8 अप्रैल, 2021 को सुर्खियों में आया था। इसमें दिल्ली की पांच महिलाओं- राखी सिंह, लक्ष्मी देवी, सीता साहू और अन्य ने मुकदमा दर्ज करके मां श्रृंगार गौरी, भगवान गणेश, भगवान हनुमान और नंदी की प्रतिदिन पूजा करने और अन्य धार्मिक अनुष्ठान की मांग की। ये देवी-देवता ज्ञानवापी मस्जिद की बाहरी दीवार पर स्थापित हैं। याचिकाकर्ताओं ने प्रतिमाओं को किसी तरह से नुकसान पहुंचाए जाने से रोकने की भी गुहार लगाई थी।

2022 में हुए सर्वे में 'शिवलिंग' मिलने का दावा
इसके बाद 12 मई, 2022 को वाराणसी की अदालत ने एएसआई को परिसर का सर्वे करके रिपोर्ट सौंपने को कहा था। शुरुआती कानूनी अड़चनों के बाद सर्वे किया गया। इस दौरान हिंदू पक्ष ने दावा किया कि मस्जिद परिसर में स्थित वजूखाने में एक 'शिवलिंग' मिला है। लेकिन, मुस्लिम पक्ष इसे फाउंटेन कहकर हिंदू पक्ष के दावे को नकारता रहा है। शिवलिंग को लेकर विवाद बढ़ गया। बाद में वाराणसी जिला अदालत ने उस क्षेत्र को सील करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस स्थान को संरक्षित रखने पर मुहर लगा दी।

कार्बन डेटिंग और पुरातात्विक सर्वे की अनुमति
शुक्रवार के फैसले के बाद पूरे मस्जिद परिसर के सर्वे का रास्ता साफ हो गया है। सिर्फ वजूखाने वाले इलाके को इसमें शामिल नहीं किया गया है, जो कि सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। जिला जज डॉक्टर अजय कुमार विश्वेस की अदालत ने पूरे मस्जिद परिसर की वैज्ञानिक विधि से कार्बन डेटिंग और पुरातात्विक सर्वे की अनुमति दी घई है।

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सर्वे में क्या-क्या मिला था?
पिछले साल हुए सर्वे के बाद हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि 12 फुट के एक 'शिवलिंग' के अलावा तालाब से कई और अहम साक्ष्य मिले हैं। सर्वे के बाद वीडियोग्राफरों ने बताया था कि मस्जिद परिसर के सारे वीडियो मेमोरी कार्ड में हैं और करीब 15 सौ तस्वीर इसमें शामिल हैं और सभी साक्ष्यों को कोर्ट कमिश्नर को सौंपा गया है। वीडियोग्राफर के मुताबिक उसके बारे में बताने की अनुमति नहीं है। कथित 'शिवलिंग' के बारे में दावा किया गया कि यह नंदी के ठीक सामने वजूखाने से मिला है।

बाद में सर्वे से जुड़े कुछ वीडियो भी टीवी चैनलों पर चले थे, जिसमें मस्जिद परिसर में हिंदू आस्था से जुड़े कई प्रतीक चिन्ह मिलने की बातें सामने आई थीं। जैसे कि त्रिशूल के निशान, फूल, घंटी की आकृति आदि। यही वजह है कि इसके बाद हिंदू पक्ष ने पूरे मस्जिद परिसर के सर्वे और उसके वैज्ञानिक विश्लेषण की मांग तेज कर दी थी।

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