सहेलियों को करती थी तंग, समलैंगिक होने के आरोप में BHU ने छात्रा को हॉस्टल से निकाला

समलैंगिंक होने के आरोप के चलते छात्रा को छात्रावास से निकाला बाहर, कॉलेज प्रशासन ने दी सफाई

वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से संबद्ध महिला महाविद्यालय में कथित तौर पर एक समलैंगिक छात्रा को हॉस्टल से निकाल दिया गया है। कॉलेज प्रशासन को जब इस बात का जानकारी मिली कि छात्रा समलैंगिंक है और उसके भीतर इस तरह की भावना है तो उसे छात्रावास से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। हालांकि छात्रा को कॉलेज से नहीं निकाला गया है, उसे सिर्फ छात्रावास से बाहर निकाला गया है। छात्रा को छात्रावास से बाहर निकाले जाने की कॉलेज प्रशासन ने सफाई यह दी है कि छात्रा अपनी सहपाठियों के लिए मुश्किल बन रही थी और वह उन्हें परेशान कर रही थी। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि छात्रा गलत समलैंगिंक व्यवहार करती थी और छात्रावास में अनुशासन को तोड़ती थी। एक तरफ जहां आरोप यह लग रहा है कि छात्रा को महज समलैंगिंक होने की वजह से छात्रावास से बाहर का रास्ता दिखाया गया है तो दूसरी तरफ कॉलेज प्रशासन ने इस बात से इनकार किया है।

 अनुशासन बनाए रखने के लिए किया निष्कासित

अनुशासन बनाए रखने के लिए किया निष्कासित

कॉलेज प्रशासन का कहना है कि छात्रा के गलत व्यवहार के चलते छात्रावास छोड़ने को कहा गया है। कॉलेज के एक प्रोफेसर और कॉलेज की अनुशासन कमेटी के सदस्य ने कहा कि छात्रा को छात्रावास से निष्कासित कर दिया गया है क्योंकि वह अपने साथ की छात्राओं को काफी परेशान कर रही थी। यह छात्रा बीए ऑनर्स की प्रथम वर्ष की छात्रा है। छात्रा की हरकतों के चलते छात्रावास में शांति और अनुशासन को बनाए रखने के लिए उसे निष्कासित किया गया है।

आत्महत्या की देती थी धमकी

आत्महत्या की देती थी धमकी

कॉलेज की असिस्टैंट प्रोफेसर और पांच हॉस्टल की चीफ कॉर्डिनेटर नीलम आत्री ने छात्रा के खिलाफ यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। उनका कहना है कि तकरीबन 16 छात्रावास की छात्राओं ने मुझे लिखित रूप में यह शिकायत दी थी कि छात्रा उन्हें परेशान कर रही है, वह अपनी हरकतों से उन्हें डराती है, यही नहीं छात्रा अन्य छात्राओं को धमकी देती थी कि अगर उसकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वह आत्महत्या कर लेगी।

समलैंगिक नहीं थी छात्रा

समलैंगिक नहीं थी छात्रा

हालांकि नीलम ने इस बात से इनकार किया है कि छात्रा समलैंगिंक है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई बात नहीं है, जो लोग यह आरोप लगा रहे हैं कि छात्रा को समलैंगिंक होने की वजह से निष्कासित किया गया है वह कॉलेज को बदनाम करना चाहते हैं। यह एक आंतरिक मामला है। पिछले हफ्ते छात्रा के माता-पिता को बुलाया गया था और उन्हें इसकी बीमारी की इलाज कराने को कहा गया था।


नीलम ने बताया अन्य छात्राओं को आरोपी छात्रा यह धमकी देती थी कि अगर वह उसका होमवर्क या अन्य काम नहीं करेंगी तो वह आत्महत्या कर लेगी, छात्रा बीमार है, वह अवसाद से ग्रसित है, वह खुद को भी चोट पहुंचाने की कोशिश कर चुकी है, जिसके चलते हमने छात्रा के घरवालों से उसका इलाजा कराने को कहा है, हमने उन्हें बताया है कि जब वह ठीक हो जाए तो वापस छात्रावास आ सकती है।

शिकायतें रुक नहीं रही थीं

शिकायतें रुक नहीं रही थीं

वहीं एक अन्य प्रोफेसर का कहना है कि छात्रा की गतिविधियां काफी अजीब हैं, हालांकि हम यह नहीं कह सकते हैं कि वह समलैंगिंक है , लेकिन हमें उसे निष्कासित करना इसलिए जरूरी था ताकि छात्रावास में शांति और अनुशासन को बनाए रखा जा सके। उन्होंने बताया कि छात्राओं ने हमें लिखित शिकायत दी थी कि छात्रा उन्हें परेशान करती है धमकी देती है, हमने छात्राओं से कहा कि स्थिति को समझने की कोशिश करें और छात्रा को समझाएं, लेकिन जब इसके बाद भी लगातार शिकायतें आती रहीं तो हमें छात्रा को निष्कासित करना पड़ा।

बिना जांच पड़ताल के निकाल दिया बाहर

छात्रावास में रहने वाली एक अन्य छात्रा ने बताया कि इस छात्रा को एक आंख से दिखाई नहीं देता था, वह दिव्यांग थी, कॉलेज प्रशासन को उसके साथ अधिक नरमी से पेश आना चाहिए था, इन लोगों ने छात्रा की काउंसलिंग कराए बिना और बिना किसी जांच पड़ताल के उसे निष्कासित कर दिया, अब वह कैसे क्लास में लोगों का सामना करेगी, उसे उन्हीं छात्राओं के साथ आगे की पढ़ाई करनी है। छात्रा के माता-पिता यूपी के ही हैं और वह काफी सदमे में हैं।

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