बिल ना चुकाने पर प्राइवेट नर्सिंग होम ने गर्भवती महिला को 4 दिन तक बनाया बंधक
शाहजहांपुर। यूपी के शाहजहांपुर में एक प्राइवेट अस्पताल की शर्मनाक करतूत सामने आई है। यहां चार दिन से डॉक्टर एक गरीब महिला मरीज को बंधक बनाए हुए थे। मरीज के परिजन चार दिन से हाथ जोड़कर मरीज को छोड़ने की गुहार लगाते रहे, लेकिन उसकी मदद करने वाला कोई नहीं आया। मामला सिद्धि विनायक अस्पताल का है, जहां डॉक्टर पैसों की लालच में हैवान की तरह मरीज से बर्ताव कर रहे हैं। अस्पताल में पीड़ित महिला को चार दिन तक बंधक रखा। जब पति ने डीएम, एसपी और सीएमओ से शिकायत कर मदद मांगी तो लेकिन कोई अधिकारी सामने नहीं आया।

4 दिन तक महिला को बाहर नहीं आने दिया
दरअसल जनपद लखीमपुर खिरी के ग्राम इचौलिया के रहने वाले धर्मेन्द्र सिंह की पत्नी सुनीता को प्रसव पीड़ा हुई। धर्मेन्द्र सबसे पहले पत्नी को शाहजहांपुर के जिला अस्पताल लाया, लेकिन यहां सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन करने से इंकार कर दिया। उसके बाद सुनीता को सिद्धि विनायक अस्पताल में भर्ती कराया। नौ दिन भर्ती के बाद अस्पताल के डाक्टरों ने खेल शुरू कर दिया। इलाज के नाम पर पहले 28 हजार रुपये जमा करने को कहा। महिला ने बच्ची को जन्म दिया लेकिन उसकी मौत हो गई। पांच दिन महिला को भर्ती रखने के बाद डाक्टरों ने 40 हजार रुपये की मांग की। इतना पैसा धर्मेन्द्र ने देने मना कर दिया। जिसके बाद डाक्टरों का शर्मनाक चेहरा सामने आया। डाक्टरों ने मरीज को वार्ड में बंधक बना लिया। चार दिन से महिला को अस्पताल से बाहर नहीं आने दिया और अस्पताल के निकासी गेट पर ताला डाल दिया गया। बेबस गरीब पति अपनी पत्नी को छुड़ाने के लिए हाथ जोड़कर गुहार लगाता रहा लेकिन उसकी मदद करने के लिए जिले के बड़े अधिकारी भी सामने नहीं आए।

पीड़ित धर्मेन्द्र ने बताया कि पत्नी को छुड़ाने के लिए हम 40 हजार रुपये नहीं ला सकते हैं। चार दिन से अस्पताल के बाहर बैठे हूं। एसपी को फोन किया तो उन्होंने तहसील दिवस में होने कि बात कहकर फोन काट दिया। उसके बाद एडीएम को फोन किया तो उन्होंने 'देखते हैं' कहकर फोन काट दिया। उसके बाद जब सीएमओ को फोन किया तो उन्होंने कहा कि तहसील दिवस में है। एप्लीकेशन दे दो कार्रवाई करेंगे। लेकिन जिस महिला को छुड़ाने की गुहार उसका पति लगाता रहा लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी।

अस्पताल के मैनेजर ने कही ये बात
वहीं अस्पताल के मैनेजर तौहीद ने बताया कि महिला मरीज को भर्ती किया था। उसका सीजर हुआ था। उसके पास पैसे नहीं थे, लेकिन हमने अपना फर्ज निभाकर उसको भर्ती कराया और उसका ऑप्रेशन कराया। मरीज के पति ने भर्ती करने के दूसरे पैसा लाकर देने की बात की थी। इस बात पर हम राजी हो गए। लेकिन नौ दिन महिला मरीज को भर्ती करने के बाद भी मरीज के पति ने कोई पैसा अस्पताल में जमा नहीं किया। अस्पताल पर लगाए गए आरोप गलत है।

एसपी, एडीएम को किया फोन लेकिन
एसपी, एडीएम को किया फोन लेकिन पीड़ित धर्मेन्द्र ने बताया कि पत्नी को छुड़ाने के लिए हम 40 हजार रुपये नहीं ला सकते हैं। चार दिन से अस्पताल के बाहर बैठे हूं। एसपी को फोन किया तो उन्होंने तहसील दिवस में होने कि बात कहकर फोन काट दिया। उसके बाद एडीएम को फोन किया तो उन्होंने 'देखते हैं' कहकर फोन काट दिया। उसके बाद जब सीएमओ को फोन किया तो उन्होंने कहा कि तहसील दिवस में है। एप्लीकेशन दे दो कार्रवाई करेंगे। लेकिन जिस महिला को छुड़ाने की गुहार उसका पति लगाता रहा लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी।
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