मोदी की काशी में दिव्यांग भी चलाएंगे कार, योगी के गोरखपुर में छात्रों ने किया कारनामा
OneIndia से बात करते हुए इस 'ट्राईसाइकिल विद कार' को बनाने वाले स्टूडेंट शिवम मिश्रा ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने दिव्यांगों के लिए जो कदम उठाया है ये उसी के लिए किया गया एक सहयोग है।
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस मॉडर्न इंडिया की कल्पना करते हैं उसे पूरा करने के लिए गोरखपुर के छात्रों ने वाराणसी में एक अच्छी पहल शुरू की है। बनारस के कशी हिंदू विश्वविद्यालय में गोरखपुर के बुद्ध इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी के पांच छात्रों ने कार की तरह स्टीयरिंग से चलने वाले ट्राईसाइकिल को बनाया है। जिसे चलाकर दिव्यांग कार चलाने के शौक को पूरा कर सकते हैं। बस इसके लिए उन्हें महज 3,500 रुपए खर्च करने होंगे। यही नहीं ये ऐसी कार होगी जिसमें फ्यूल भी नहीं डलवाना पड़ेगा। इसे बनाने वाले छात्रों का मकसद है कि दिव्यांग आम जिंदगी जीने में किसी तरह से पीछे न रहें।

क्या कहते हैं इसे बनाने वाले शिवम?
OneIndia से बात करते हुए इस 'ट्राईसाइकिल विद कार' को बनाने वाले स्टूडेंट शिवम मिश्रा ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने दिव्यांगों के लिए हजारों ट्राईसाइकिल बांटी जो हाथों से पैडल मारने पर चलती है। लेकिन हम लोगों ने इसे बनाते समय ये ख्याल रखा कि वो हाथों से पैडल की बजाए स्टीयरिंग वाली कार चलाएं। हमारा पूरा सिस्टम एक ही स्लिप लीवर से जुड़ा है, इसमें स्टीयरिंग हैंडल भी लगाया गया है। यही नहीं लीवर सिस्टम यानि जब इसके स्टीयरिंग को ऊपर करेंगे, घुमाएंगे, पीछे करेंगे तो आवश्यकता अनुसार पहिया आगे-पीछे दाएं, बाएं घुमाया जा सकेगा।


इस ट्राईसाइकिल कि स्पीड भी स्टीयरिंग के आगे पीछे करने से तेज होगी। साइकिल के पैडल स्लिप लीवर से जोड़ा गया है ताकि स्टीयरिंग पर हलके मूवमेंट आसानी से हो सके। इसके आलावा लीवर को बेयरिंग से जोड़ा गया है, एक बार जब स्टीयरिंग को आगे या पीछे करते हैं तो वो एक राउंड पैडल का काम करता है। पिछला दोनों चक्का बेयरिंग लीवर कनेक्ट, स्टीयरिंग को आगे पीछे करने से चलने लगेगा। सीट को इस तरह से बनाया गया है की इसे चलाने वाला अपने आवश्यकता अनुसार एडजेस्ट कर सके और स्टीयरिंग ब्रेक भी लगा सके।


विशेषज्ञयों की राय में अच्छी है पहल
यूनिवर्सिटी के एचओडी शिवाचन्द्र विश्वकर्मा ने इसे बनाने वाले छात्रों के इस अथक प्रयास को काफी सराहा है। उन्होंने कहा कि आम तौर पर ट्राईसाइकिल इस्तेमाल करने वालों को कई तरीके की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दिव्यांगों के लिए बाजारों में बिकने वाले ट्राईसाइकिल में एक हाथ से पैडल दूसरे हाथ से पहिए को कमांड देना पड़ता है, इसके आलावा ब्रेक लगाना भी कठिन होता है, ऐसे में बैक करने की सुविधा भी नहीं होती और सीट पर बैठने वाला अपने को कम्फर्ट नहीं महसूस करता। इसी के मद्देनजर इन छात्रों ने जो नई तकनीक विकसित की है वो दिव्यांगों के लिए वरदान साबित हो सकती है।












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