नोटबंदी: 'बैंक में कैश समाप्त, ना करें अपना समय व्यर्थ'

एक ओर जहां जनता नकदी की कमी से जूझ रहा है वहीं उत्तर प्रदेश में एक बैंक ने बाहर एक नोट चस्पा कर रखा है जिसमें लिखा है अपना समय व्यर्थ न करें।

बुलंदशहर। 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद 500 और 1000 के नोट चलन से बाहर हो गए। इस प्रक्रिया को डिमोनेटाइजेशन या नोटबंदी का नाम दिया गया।

नोटबंदी के बाद पूरे देश भर में मजदूर और किसान वर्ग के लोग काफी परेशान हैं। बैंकों और एटीएम के बाहर लंबी लंबी कतारें लगी हुई हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले का हाल भी कुछ जुदा नहीं है। ग्रामीण इलाकों में लोग काफी परेशान नजर आ रहे हैं और रोजाना बैंकों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

किसान जहां यूरिया और डाई के लिए परेशान है तो वहीं मजदूर को काम नहीं मिल पा रहा है। कई जगहों पर तो रात दो-तीन बजे से ही लाइनें लग जाती हैं।

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बाहर खड़े मिले लोग

बाहर खड़े मिले लोग

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर स्थित दरियापुर गांव के रहने वाले दिलशाद हमें बैंक ऑफ बड़ौदा की अकबरपुर शाखा के बाहर खड़े मिले। पूछने पर बताया कि धान बोना है, यूरिया और डाई चाहिए लेकिन हाथ में महज 2000 रुपये हैं। बैंक में इससे अधिक रुपये नहीं मिल रहे हैं। रोजाना लाइन में इस उम्मीद में लगते हैं कि आज शायद पैसा मिल जाए लेकिन 10 दिन में महज दो दिन ही पैसा मिल पाया है। वे बताते हैं कि करीब 15 हजार की ज़रूरत है लेकिन 4 हजार से कैसे काम बनेगा, नहीं पता।

बैंको में नही है कैश

बैंको में नही है कैश

दरियापुर गांव में एक ही बैंक है। BOB शाखा के बाहर कागज का एक पुरजा चिपका है जिसको देख कर लोग निराश हो कर चले जाते हैं। बैंक में कैश नहीं है। गांव के अब्दुल मकसूद बताते हैं कि उनके भतीजे को गुर्दे की बीमारी है। इलाज के लिए हाथ में पैसा नहीं है। सब्जी और दूध तक उधार लेना पड़ रहा है। उधारी 22 हजार हो गई तो उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए। अब बैंक के बाहर बैठने के अलावा कोई काम नहीं हो पा रहा है। इंतजार है तो सिर्फ कैश वैन का।

कैसे चुका पाएंगे कर्जा

कैसे चुका पाएंगे कर्जा

हारुन का हाल भी जुदा नहीं है। पेशे से किसान हारुन बताते हैं कि कैश ना होने के कारण फसल लेट हो रही है। जहां गेंहू दिए थे वहां से अभी तक पेमेंट नहीं हुआ है और हाथ खाली होने के कारण नई फसल के लिए ज़रूरी सामान नहीं खरीद पा रहे हैं। गेंहू की फसल के लिए कुछ कर्जा भी लिया था अब सबसे बड़ी परेशानी जो सामने है वो ये कि कर्जा कैसे चुकाया जाएगा। वहीं, कांपती हुई आवाज में किसान हरीश शर्मा बताते हैं, जब वक्त से फसल को दवाई, खाद, पानी नहीं मिलेगा तो कैसे अच्छी होगी फसल। जो कर्जा लिया है बैंकों से वो कैसे चुका पाएंगे। अब किसान के सामने कोई विकल्प नहीं बचा है। हम किसान खून के आंसू रोने के लिए मजबूर हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी

क्या कहते हैं अधिकारी

जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार ने बताया कि पिछले कुछ दिन कैश की दिक्कत थी लेकिन अब बैंक में कैश पहुंच गया है और उम्मीद है कि सबको ज़रूरत के लिए पैसे मिल जाएगा। इस वक्त हमें किसान की चिंता है। प्रदेश सरकार की ओर से भी इस बाबत निर्देश मिले हुए हैं।

वो 12 जगहें, जहां अभी चलते रहेंगे 500 के पुराने नोट

हम रोज कर रहे हैं समीक्षा

हम रोज कर रहे हैं समीक्षा

कहा गया कि रोजाना इस पर हम समीक्षा कर रहे हैं। किसानों को समय से खाद मिल सके इसके लिए हमने बैठक की थी। कृभको और कोऑपरेटिव सेक्टर भी आगे आ रहा है। किसान क्रेडिटकार्ड धारक को 10 प्रतिशत क्रेडिट लिमिट बढाई गई है।

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