Jan Akrosh Mahila Padyatra: महिला आरक्षण के विरोधियों को CM योगी की खुली चुनौती! निशाने पर कांग्रेस और सपा
Jan Akrosh Mahila Padyatra, UP: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने मंगलवार (21 अप्रैल 2026) को 'जन आक्रोश महिला पदयात्रा' का नेतृत्व किया। लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के असफल होने के बाद यह महिला आरक्षण बिल पर बीजेपी (BJP) का महा प्रोटेस्ट है।
दरअसल, 17 अप्रैल को इंडिया गठबंधन ने बिल को गिरा दिया था, अब 15,000 महिलाओं का हुजूम सड़कों पर उतर आया। सीएम आवास (5 कालिदास मार्ग) से शुरू होकर विधानसभा तक 3 किमी लंबी यह पदयात्रा महिला आरक्षण के समर्थन में निकाली गई।

इसमें उपमुख्यमंत्री, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, दोनों उपमुख्यमंत्री, महिला मंत्री और एनडीए के बड़े नेता शामिल हुए। हजारों महिलाओं ने नारे लगाए - 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास करो!, महिलाओं का हक लो, विपक्ष को भगाओ!' इस दौरान मार्ग पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। यात्रा के दौरान महिलाओं ने त्रिशूल, भगवा झंडे लहराए।
CM योगी के निशाने पर कांग्रेस और सपा
सीएम योगी ने कहा, 'आज यह बहनों द्वारा नेतृत्व की गई पदयात्रा पूरे देश, विशेषकर आधी आबादी के आक्रोश का प्रतीक बनेगी। कांग्रेस, SP, TMC, DMK की महिला विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज़ बुलंद हो रही है। आज हज़ारों बहनें प्रोटेस्ट का हिस्सा बनने आई हैं।
'महिलाओं के खिलाफ अघोषित एजेंडा'
मंत्री अशीष पटेल ने ANI से बातचीत में बताया कि, 'विपक्ष ने महिलाओं के खिलाफ अघोषित एजेंडा तय किया है कि देश की महिलाओं को उनका हक न मिले। 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास हुआ जब सभी पार्टियां एकजुट हुईं। कोई विवाद नहीं था। लेकिन जब जमीनी स्तर पर लागू करने की बारी आई तो विपक्ष ने रोड़ा अटकाया। हमने 2023 में समर्थन किया और आगे भी महिलाओं के हित में संशोधन का काम करेंगे।'
'सपा और कांग्रेस को चुकानी पड़ेगी कीमत'
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कह कि, 'महिलाएं अपने घरों से बड़ी संख्या में निकल रही हैं अपने असंतोष को व्यक्त करने। विपक्ष ने जिस तरह महिला आरक्षण विधेयक को रोका, वो बेहद दुखद है। महिलाएं बेहद आक्रोशित हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को आने वाले चुनावों में इसका भारी मूल्य चुकाना पड़ेगा।'
इस दौरान मेयर सुषमा खरकवाल ने इस दौरान कहा कि, 'कई सदियों से महिलाएं अपना हक मांग रही हैं। प्रधानमंत्री ने हमें हमारा हिस्सा दिया, लेकिन विपक्ष उसी का विरोध कर रहा है। देश के हित में सत्ताधारी और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है। लेकिन विपक्ष की नियत गलत है।
लोकसभा में क्या हुआ?
दरअसल, 16-18 अप्रैल 2026 की तीन दिवसीय विशेष सत्र में तीन महत्वपूर्ण बिल पर चर्चा हुई:
- 1. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक - महिला आरक्षण लागू करने के लिए
- 2. परिसीमन विधेयक
- 3. केंद्रशासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक
17 अप्रैल को वोटिंग हुई। संविधान संशोधन बिल पर विभाजन के बाद:
- पक्ष में: 298 सदस्य
- विरोध में: 230 सदस्य
कैसे रद्द हुआ विधेयक?
दो-तिहाई बहुमत न मिलने से 131वां संशोधन विधेयक असफल। इंडिया ब्लॉक ने परिसीमन प्रक्रिया पर असहमति जताई। बहस में पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, अखिलेश यादव, असदुद्दीन ओवैसी, केसी वेणुगोपाल शामिल। बिल गिरने के बाद सरकार ने बाकी दो विधेयक वापस ले लिए क्योंकि वे परस्पर जुड़े थे।
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