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ज्योतिष से जिहाद तक: 'छांगूर बाबा' उर्फ जलालुद्दीन शाह ने कैसे खड़ा किया 300 करोड़ की काली सल्तनत

Chhangur Baba conversion racket: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर धर्मांतरण का मुद्दा सुर्खियों में है, और इस बार केंद्र में हैं एक ऐसा व्यक्ति जिसने गांव-गांव साइकिल पर रत्न बेचने और हाथ देख भविष्य बताने से शुरुआत की थी, और अब वह एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय धर्मांतरण सिंडिकेट का 'मास्टरमाइंड' बनकर उभरा है, जिसका जाल मुंबई से सऊदी अरब और नेपाल की सीमाओं तक फैला हुआ है।

जी हां! यहां हम बात कर रहे हैं जलालुद्दीन शाह उर्फ 'छांगूर बाबा' की - एक ऐसा नाम जिसने सूफी संत के भेष में करोड़ों की अंधाधुंध अवैध कमाई और धर्मांतरण के खेल को अंजाम दिया।

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कैसे शुरू हुआ छांगूर बाबा का खेल?

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाके से ताल्लुक रखने वाला छांगूर, पहले ज्योतिषी और रत्न बेचने वाला था। लेकिन उसकी असली 'उड़ान' मुंबई और सऊदी अरब के दौरों के बाद शुरू हुई। इन जगहों पर उसने ऐसा नेटवर्क खड़ा किया जो उसे भारत लौटकर 'पीर बाबा' या 'हजरत जलालुद्दीन' के रूप में स्थापित करने में मददगार बना।

बीते एक दशक में वह बलरामपुर के चंदौलिया बाबा दरगाह के पास एक आश्रम से अपनी गतिविधियों का संचालन करता रहा। इस आश्रम को वह आध्यात्म और चमत्कार का केंद्र बताता था, लेकिन अब खुलासा हुआ है कि यह धर्मांतरण रैकेट का मुख्य केंद्र था।

Chhangur Baba ऐसे आया ATS और ED की गिरफ्त में

यूपी एटीएस ने जलालुद्दीन शाह और उसकी सहयोगी नसीम उर्फ नीतू को 5 जुलाई को गिरफ्तार किया। यह वही नसीम है, जो पहले नीतू रोहरा नाम से जानी जाती थी और जिसे बाबा ने कथित तौर पर मुंबई में ब्रेनवॉश कर इस्लाम कबूल करवाया और बलरामपुर बुलाकर अपने नेटवर्क का अहम हिस्सा बना लिया।

गिरफ्तारी के बाद कोर्ट से एक हफ्ते की रिमांड भी एटीएस को मिल गई है और अब इस केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कूद चुका है। PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू हो चुकी है।

ऐसे बना 300 करोड़ की संपत्ति का मालिक

जांच में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि बाबा और उसके गिरोह ने बीते कुछ वर्षों में करीब ₹300 करोड़ की संपत्ति खड़ी की है। इसमें पुणे से लेकर बलरामपुर तक बेशकीमती जमीनें, बंगलों, लक्जरी गाड़ियों, और लगभग 40 से ज्यादा NGO और ट्रस्ट शामिल हैं।

इन NGOs के नाम पर खोले गए दर्जनों बैंक खातों में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध लेन-देन पाए गए हैं। यूपी एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह भी आशंका जताई जा रही है कि इस नेटवर्क को विदेशों से फंडिंग मिल रही थी।

पुणे की 200 करोड़ की जमीन डील

एक और हैरान करने वाला मामला पुणे की जमीन डील का है, जिसमें उत्तर प्रदेश के उतरौला तहसील के एक अदालत क्लर्क और उसकी पत्नी के नाम से ₹16 करोड़ की ज़मीन खरीदी गई। बाज़ार मूल्य के अनुसार आज इसकी कीमत 200 करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है। यह सौदा भी बाबा के नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।

प्रेम-जाल और लालच से धर्मांतरण की साजिश

एटीएस की जांच में सामने आया है कि यह रैकेट बहुत ही सुनियोजित तरीके से गरीब, दलित, और वंचित तबकों को धर्मांतरण के लिए निशाना बनाता था।

  • ब्राह्मण, क्षत्रिय या सिख लड़कियों के धर्मांतरण के लिए ₹15-16 लाख तक वसूले जाते थे
  • ओबीसी वर्ग की लड़कियों के लिए ₹10-12 लाख
  • अन्य वर्गों के लिए ₹8-10 लाख

इसके अलावा, "लव जिहाद" का इस्तेमाल कर महिलाओं को प्रेमजाल में फंसाकर पहले शादी और फिर जबरन धर्मांतरण कराया जाता था। लखनऊ की गुंजा गुप्ता इसका एक उदाहरण हैं, जिन्हें 'अमित' बनकर मिले अबू अंसारी ने पहले प्रेम में फंसाया और फिर उनका नाम बदलकर अलीना अंसारी रख दिया।

आश्रम बना था काली गतिविधियों का अड्डा

बलरामपुर के मधुपुर गांव में तीन बीघा जमीन पर बना आश्रम, जो ग्रामसभा की जमीन पर अवैध कब्जा था, को अब गिरा दिया गया है। इस आश्रम में 50 से ज्यादा लोगों के रहने की व्यवस्था थी और यह CCTV से लैस था। अब यह स्पष्ट हो चुका है कि यह बाबा के काले साम्राज्य का केंद्र था।

छांगूर बाबा के साथ गिरफ्तार नसीम और उसके पति जमालुद्दीन, जलालुद्दीन के बेटे महबूब, और लगभग 14 अन्य आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। ATS की मानें तो यह केस अभी और परतें खोलेगा। धर्म के नाम पर इस स्तर का धोखा और संगठित अपराध देश की धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।

छांगूर बाबा की गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति का पर्दाफाश नहीं है, यह उस सोच पर प्रहार है जो धर्मांतरण को एक धंधा और साधन बना देती है। सरकार और एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि इस तरह की गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई हो, और समाज को इस काले जाल से मुक्त किया जाए। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस रैकेट की जड़ें और कितनी गहरी और दूर तक फैली हुई हैं।

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