भाजपा मंत्री के काफिले की गाड़ियों ने रौंद दी फसल, पैरों पर गिरा किसान
जालौन। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार और भारतीय जनता पार्टी भले ही सूखे का दंश झेल रहे बुंदेलखंड के किसानों के प्रति हमदर्दी जता रही हो मगर उनके मंत्री ही किसानों की फसल रौंद रहे हैं। एक ऐसा ही वाकया जालौन जिले के उरई संभाग में देखने को मिला, जहां जिले के प्रभारी मंत्री जयकुमार सिंह जैकी के काफिले ने एक दलित किसान की तीन बीघे सरसों की फसल रौंद डाली। मंत्री के पैरों में गिरकर गिड़गिड़ाने पर भाजपाइयों ने उसे सिर्फ चार हजार रुपये बतौर मुआवजा थमा दिया है।

मामला उरई शहर के बघौरा बाईपास का है, यहां नगर पालिका प्रशासन ने बुधवार को गौशाला निर्माण कराए जाने के लिए भूमि पूजन में जिले के प्रभारी मंत्री/कारागार राज्य मंत्री जयकुमार सिंह जैकी को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया था, इसी भूखंड़ के बगल में दलित किसान देवेन्द्र दोहरे का तीन बीघे खेत है, जिसमें उसने कर्ज लेकर सरसों की फसल बोई थी। मंच तक पहुंचने की हड़बड़ाहट में मंत्री और उनके काफिले में शामिल तीन दर्जन गाड़ियां पूरी फसल रौंद दी और वहीं गाड़ियों की पार्किंग करा दी गईं।
जब किसान को पता चला तो वह मंच में ही पहुंच कर मंत्री के पैरों में गिर गिड़गिड़ाने लगा, लेकिन मंत्री जी नहीं पसीजे। कार्यक्रम समाप्ति के बाद मीडियाकर्मियों द्वारा नष्ट फसल की फोटो लेने के बाद भाजपाइयों ने चंदा करके पीड़ित किसान को सिर्फ चार हजार रुपये बतौर मुआवजा थमा कर मामले को ठंडा करने की कोशिश की।
पीड़ित किसान देवेन्द्र दोहरे ने शुक्रवार को बताया कि उसने कर्ज लेकर अपने तीन बीघे खेत में सरसों की फसल बोई थी और हाल ही में पांच हजार रुपये का पानी खरीद कर सिंचाई की थी, जिसे मंत्री जी के काफिले ने रौंद कर बर्बाद कर दिया है।' उसने बताया कि 'उसके पास केवल तीन बीघे ही कृषि भूमि है, जिस पर उसे तीस से चालीस हजार रुपये की फसल पैदा होने की उम्मीद थी।' उसने बताया कि 'मंत्री जी के पैरों के गिरने के बाद भी मंत्री जी कुछ नहीं बोले, बाद में स्थानीय भाजपा नेताओं ने चंदा कर उसे सिर्फ चार हजार रुपये देकर शांत रहने को कहा।'
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बुंदेलखंड के किसान पिछले कई सालों से सूखे का दंश झेल रहे हैं। एक तरफ सरकार किसानों को कर्जमाफी प्रमाण पत्र वितरित कर उन्हें उबारना चाह रही है, वहीं दूसरी तरफ उसके मंत्री फसल रौंद रहें है। ऐसे में सरकार की नीति और नीयत में संदेह पैदा होता है।












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