लखनऊ में BSP का पावर शो! कांशीराम की पुण्यतिथि पर मायावती की बड़ी रैली, BJP पर लगाया सत्ता के दुरूपयोग का आरोप
Mayawati Rally: लखनऊ आज पूरी तरह 'नीले रंग' में रंगा हुआ है। सड़कों से लेकर चौक-चौराहों तक हर ओर बसपा के झंडे, बैनर और पोस्टर लहरा रहे हैं। कांशीराम स्मारक स्थल को नीली रोशनी और फूलों से सजाया गया है। मौका है बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि का। इसी मौके पर बसपा सुप्रीमो मायावती आज एक बड़ी रैली कर रही हैं।
दावा किया जा रहा है कि इस रैली में करीब पांच लाख से ज्यादा लोग जुटें हैं। चारों ओर से कार्यकर्ताओं का लखनऊ पहुंच चुके है। राजधानी में बसपा समर्थकों का जोश देखते ही बन रहा है। जगह-जगह बसपा के गाने बज रहे हैं और माहौल पूरी तरह नीला हो चुका है।

'भाजपा से सत्ता के दुरूपयोग किया'
पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, "...जब हमने यूपी में चौथी बार अपनी सरकार बनाई, जो कांग्रेस, भाजपा, समाजवादी और अन्य जातिवादी दलों को पसंद नहीं आई। इससे पहले, केंद्र में सत्ता में बैठी भाजपा ने अपनी सत्ता का दुरुपयोग करके मेरे परिवार के खिलाफ झूठे मामले दर्ज करके और हम सभी को जबरन आयकर, सीबीआई आदि के जाल में फंसाकर मेरी छवि खराब करने की कोशिश की थी। यहां तक कि कांग्रेस सरकार ने भी हमें न्याय दिलाने की कोशिश नहीं की..."
मायावती का तीन घंटे लंबा संबोधन, मंच पर 6 बड़े चेहरे
बसपा प्रमुख मायावती आज करीब तीन घंटे तक मंच पर मौजूद रहेंगी। सूत्रों के मुताबिक, इस बार उन्होंने रैली के लिए खास रणनीति तैयार की है। मंच पर उनके साथ भाई आनंद कुमार, भतीजे आकाश आनंद, और वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्र समेत कुल छह प्रमुख नेता मौजूद रहेंगे। मायावती के भाषण के बाद वह कुछ चुनिंदा कार्यकर्ताओं से अलग बैठक भी करेंगी, ताकि रैली के फीडबैक के आधार पर पार्टी संगठन को मजबूत करने और नए लोगों को जोड़ने की योजना बनाई जा सके।
2021 की यादें और 2027 का लक्ष्य
दिलचस्प बात यह है कि चार साल पहले, यानी 2021 में भी, मायावती ने 9 अक्टूबर को इसी जगह पर रैली की थी। तब यूपी विधानसभा चुनाव कुछ ही महीनों बाद होने वाले थे। लेकिन 2022 के चुनाव में बसपा को सिर्फ एक सीट पर ही जीत मिली थी। इस बार भी मायावती ने वही तारीख और वही मंच चुना है। माना जा रहा है कि यह रैली 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए बसपा का आगाज़ मानी जा रही है। पार्टी अब एक बार फिर अपनी खिसकती राजनीतिक जमीन को मजबूत करने की कोशिश में है।
2027 के लिए 'करो या मरो' की तैयारी
बसपा के लिए आने वाला चुनाव किसी 'करो या मरो' लड़ाई से कम नहीं है। पार्टी अब एक बार फिर अपने पुराने वोट बैंक को वापस लाने और नए वोटरों को जोड़ने में जुट गई है। मायावती चाहती हैं कि इस रैली के जरिए बसपा को फिर से एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में जनता के सामने पेश किया जाए। इस बार बामसेफ और बीएस-4 जैसी इकाइयों को भी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि मैदान में पार्टी की पकड़ और मजबूत की जा सके।
सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम: 2000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात
इतने बड़े आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए हैं। कांशीराम स्मारक स्थल और आस-पास के इलाकों में 2114 पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है।
पुलिस उपायुक्त अपराध व यातायात कमलेश दीक्षित ने बताया कि रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी अतिरिक्त बल लगाया गया है।
सुरक्षा बल की तैनाती इस तरह है:
- डीसीपी: 4
- एडीसीपी: 7
- एसीपी: 21
- इंस्पेक्टर: 69
- दरोगा: 549
- महिला दरोगा: 31
- हेड कांस्टेबल: 341
- महिला कांस्टेबल: 165
- होमगार्ड: 182
- पीएसी की 4 कंपनियां
- आरएएफ की 1 कंपनी
रमाबाई स्थल पर ठहराव, कार्यकर्ताओं को मिली जिम्मेदारियां
रैली में आने वाले कार्यकर्ताओं के ठहरने का इंतज़ाम रमाबाई अंबेडकर स्थल पर किया गया है। पार्टी ने जिलावार और विधानसभावार टीमों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंप दी हैं, ताकि रैली में किसी तरह की गड़बड़ी न हो। कांशीराम स्मारक स्थल पर मंच सज चुका है, कुर्सियां लग चुकी हैं और माहौल पूरी तरह तैयार है। अब बस इंतज़ार है मायावती के आगमन और उनके भाषण का, जिसका पार्टी कार्यकर्ताओं को बेसब्री से इंतज़ार है।












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