तीन तलाक को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्या बोलीं मायावती?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से तीन तलाक को लेकर 6 महीने के भीतर कानून बनाने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।

लखनऊ। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला देते इस प्रथा को निरस्त कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों में से 3 ने तीन तलाक की प्रथा को असंवैधानिक बताया और तत्काल प्रभाव से इस प्रथा पर रोक लगा दी गई। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से तीन तलाक को लेकर 6 महीने के भीतर कानून बनाने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।

अच्छा होता मुस्लिम लॉ बोर्ड कार्रवाई करता

अच्छा होता मुस्लिम लॉ बोर्ड कार्रवाई करता

यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने तीन तलाक के मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कहा कि बीएसपी इस फैसले का स्वागत करती है। सुप्रीम कोर्ट ने एक सही फैसला दिया है। अच्छा होता कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड खुद ही तीन तलाक के मामले में कार्रवाई करता लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। अब सुप्रीम कोर्ट ने इसपर एक अच्छा फैसला दिया है।

3-2 के बहुमत के आधार पर तीन तलाक असंवैधानिक

3-2 के बहुमत के आधार पर तीन तलाक असंवैधानिक

तीन तलाक मामले पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस खेहर ने कहा कि तालाक-ए-बिद्दत संविधान के अनुच्छेद 14,15,21 और 25 का उल्लंघन नहीं कर रहा है, जबकि तीन अन्य जजों ने ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक बताया। जस्टिस नरीमन, यूयू ललित और जस्टिस कुरियन ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया, ऐसे में 3-2 के बहुमत के आधार पर तीन तलाक को असंवैधानिक करार दे दिया गया।

क्या है तीन तलाक

क्या है तीन तलाक

आपको बता दें कि ट्रिपल तालक मुस्लिम समाज में प्रचलित तलाक का एक रूप है, जिससे एक मुस्लिम व्यक्ति कानूनी तौर पर तीन बार तलाक बोलकर अपनी पत्नी को तलाक दे सकता है। ये मौखिक या लिखित हो सकता है। हाल के दिनों में टेलीफोन, एसएमएस, ईमेल या सोशल मीडिया जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भी तलाक दिया जा रहा था।

समानता के नए युग की शुरुआत

समानता के नए युग की शुरुआत

इससे पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इस फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय मुस्लिम महिलाओं के लिए स्वाभिमान पूर्ण एवं समानता के एक नए युग की शुरुआत है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला जय-पराजय का नहीं, मूलभूत संवैधानिक अधिकार की विजय है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है।

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