अयोध्या में ओबीसी-दलित-मुस्लिम वोटों से ही नहीं हारी बीजेपी, राम नगरी में बड़ी हार की इनसाइड स्टोरी
Inside Story of BJP lost in Ayodhya: इस साल जनवरी में अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में भगवान राम लला की प्राण प्रतिष्ठा हुई तो लगा कि बीजेपी अगले कई चुनावों तक प्रदेश में अजेय बन सकती है। लेकिन, अयोध्या (फैजाबाद संसदीय क्षेत्र) में ही पार्टी हार गई तो बहुत ही ज्यादा हैरानी हुई।
सोशल मीडिया पर जो संदेश वायरल हो रहे हैं, उससे यही लगता है कि भगवान राम की नगरी में भाजपा की हार को पार्टी समर्थक पचा नहीं पा रहे हैं। क्योंकि, अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण तो बीजेपी का चिरस्थायी वादा था, जो पूरा भी हो चुका है।

अयोध्य में पिछला दोनों चुनाव जीती बीजेपी
फैजाबाद लोकसभा सीट बीजेपी पिछला दोनों चुनाव जीती थी और दोनों ही बार लल्लू सिंह सांसद चुने गए थे। उससे पहले लल्लू सिंह तीन बार स्थानीय विधायक भी रहे और प्रदेश में मंत्री भी बनाए गए। 2019 में बीजेपी को इस सीट पर 48.65% वोट आए थे और सपा के आनंद सेन 42.63% वोट लेकर हार गए थे।
सपा ने इस बार पलट दी बाजी
इस बार सपा प्रत्याशी अवधेश प्रसाद ने कहानी पलट दी और उन्हें 48.59% वोट मिले और लल्लू सिंह महज 43.81% वोट ही जुटा सके। यूपी में इस बार जिस तरह से समाजवादी पार्टी की अगुवाई वाले इंडिया ब्लॉक ने बीजेपी और एनडीए को पछाड़ा है, उसके बाद आमतौर पर यही कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव का पीडीए समीकरण काम कर गया।
विपक्ष ने आरक्षण खत्म होने का खूब डर दिखाया
पीडीए मतलब पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (मुसलमान)। फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र में अनुमानित 22% ओबीसी, 21% दलित और 18% मुस्लिम वोटर हैं। फैजाबाद से सांसद चुने गए अवधेश प्रसाद पासी (दलित) समाज से हैं। उनके बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने लल्लू सिंह के 'संविधान में संशोधन' करने वाले वाले बयान को गांव-गांव में जाकर खूब भुनाया।
ओबीसी और दलितों के बीच जमकर यह प्रचार किया गया कि बीजेपी आरक्षण खत्म कर देगी। जाहिर है कि इस चुनाव में यूपी में विपक्षी दलों के इस नरेटिव ने काफी असर डाला है। फैजाबाद सीट पर भी यह नरेटिव कोई अपवाद नहीं है और बीजेपी के खिलाफ इस चुनाव में ये वर्ग इस वजह से गोलबंद भी हुए हैं।
महिलाओं को सालाना एक लाख रुपए देने वाला वादा भी भाजपा के खिलाफ गया
इनके अलावा कांग्रेस की ओर से हर महीने सभी महिलाओं और लड़कियों को खाते में 8,500 रुपए डालने वाले वादे ने भी भरपूर प्रभाव डाला है। स्थानीय लोग बताते हैं कि विपक्ष ने एक प्रचार यह भी किया कि जहां तक 5 किलो राशन की बात है तो वो क्या मोदी-योगी अपनी जेब से देते हैं?
अयोध्या में बीजेपी की अप्रत्याशित हार की इनसाइड स्टोरी
लेकिन, अयोध्या में भाजपा की हार की जो वजह हम बताने जा रहे हैं, वह ऊपर की वजहों तक सीमित नहीं है। निश्चित रूप से इन कारणों को जानने के बाद भाजपा समर्थकों को बड़ा झटका लग सकता है।
लल्लू सिंह पर ब्राह्मण-विरोधी होने का लग रहा है आरोप
वन इंडिया ने अयोध्या में राम मंदिर के नजदीक रहने वाले लोगों की भावनाएं समझने की कोशिश की है। हमने उनसे बात की तब नए तथ्य हमारे सामने आए हैं। बीजेपी उम्मीदवार लल्लू सिंह ठाकुर समाज से हैं। उनकी छवि भाजपा समर्थक ब्राह्मणों में ब्राह्मण विरोधी नेता की बन चुकी है। उनके बारे में लोग कहते हैं कि वे सिर्फ ठाकुरों की फिक्र करते हैं।
सवर्णों ने भी बीजेपी को नहीं दिया वोट- अयोध्या के सवर्ण मतदाता
राम मंदिर के बिल्कुल पास रहने वाले ब्राह्मण समाज के एक व्यक्ति ने कहा कि ब्राह्णों का वोट सपा को गया है। दरअसल, यहां पवन पांडे समाजवादी पार्टी के दिग्गज ब्राह्मण चेहरा हैं और सपा सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।
लोगों के मुताबिक उनकी वजह से ब्राह्मणों ने अबकी बार सपा को वोट दिया है। हमारी पड़ताल में एक बात और सामने आई है कि अयोध्या में ठाकुर वोटरों ने भी अबकी बार भाजपा से मुंह फेरा है, जो कि गुजरात के भाजपा नेता के बयान की वजह से पार्टी से नाराज बताए जा रहे है।
सड़क चौड़ीकरण और मुआवजे के मुद्दे ने स्थानीय लोगों को भड़का दिया है
स्थानीय लोगों का कहना है कि फैजाबाद में बीजेपी की जीत का बड़ा कारण उसे अयोध्या शहर से मिलने वाला वोट होता था। लेकिन, सड़क चौड़ीकरण की वजह से जिनके मकान और दुकान टूटे हैं, वह भी पार्टी से खफा हैं। इनमें बड़ी तादाद बनियां मतदाताओं की है।
खासकर मुआवजे को लेकर स्थानीय लोग सरकार और उससे भी ज्यादा विकास प्राधिकरण पर भड़के हुए हैं। मुआवजा नहीं मिलना, कम मुआवजा मिलना और ऊपर से जमीन का मूल्य बढ़ गया है, ये कहकर टैक्स का नोटिस थमा देना, जैसे रवैए ने लोगों को बहुत मायूस कर रखा है।
स्थानीय बीजेपी विधायक पर भी उठ रही है उंगली
बीजेपी के स्थानीय लोगों को पता था कि इस बार का चुनाव आसान नहीं रहने वाला है और स्थानीय सांसद के खिलाफ बहुत ज्यादा एंटी-इंकंबेसी फैक्टर काम कर रहा है, लेकिन फिर भी पार्टी इसे संभालने में नाकाम रही। स्थानीय लोग पार्टी के लोकल विधायक वेद प्रकाश गुप्ता पर भी उंगलियां उठा रहे हैं और उनपर पूरी तरह से उदासीन रहने के आरोप लगा रहे हैं।
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