चंद्रनाथ से पहले भी सुवेंदु के PA और सिक्योरिटी गार्ड की हुई थी हत्या! कौन थे प्रदीप झा और शुभब्रत चक्रवर्ती?
Suvendu Adhikari PA Death Story: पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। मध्यमग्राम में 6 मई देर रात हुई गोलीबारी के बाद बीजेपी इसे राजनीतिक साजिश बता रही है। लेकिन इस सनसनीखेज मर्डर के बीच अब एक पुरानी घटना फिर चर्चा में आ गई है। चारों तरफ चर्चा है कि आखिर सुवेंदु के इतने करीबी शख्स को निशाना क्यों बनाया गया? लेकिन अगर आप बंगाल की सियासत के पन्ने पलटेंगे, तो यह कोई पहली घटना नहीं है। ठीक 11 साल पहले, सुवेंदु अधिकारी के एक और बेहद खास निजी सहायक (PA) की मौत बिल्कुल इसी तरह की रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई थी।
यह महज एक इत्तेफाक है या कोई गहरा पैटर्न, यह तो जांच का विषय है, लेकिन प्रदीप झा और चंद्रनाथ रथ की कहानियों में गजब की समानताएं हैं। दरअसल साल 2013 में भी सुवेंदु अधिकारी के एक और निजी सहयोगी प्रदीप झा की मौत ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। उस समय सुवेंदु तृणमूल कांग्रेस में थे और तमलुक से सांसद थे। आइए 2013 के उस फ्लैशबैक में चलते हैं जिसने उस वक्त भी सुवेंदु अधिकारी के खेमे में हड़कंप मचा दिया था।

▶️ 2013 का वो खौफनाक मंजर: स्ट्रैंड रोड पर मिली थी प्रदीप झा की लाश
तारीख थी 3 अगस्त, 2013। उस समय सुवेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता थे और तामलुक से सांसद हुआ करते थे। सुबह-सुबह कोलकाता पुलिस के कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि स्ट्रैंड रोड के फुटपाथ पर एक शख्स बेहोश पड़ा है। पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें अस्पताल ले गई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। वो शख्स कोई और नहीं, सुवेंदु अधिकारी के तत्कालीन पीए प्रदीप झा थे।
42 साल के प्रदीप झा बरasat के रहने वाले थे। उनकी मौत की खबर ने उस समय पूरे राजनीतिक गलियारे में सनसनी फैला दी थी। हाजी नूरुल इस्लाम (TMC विधायक जिनका 2024 में निधन हुआ) ने तब बताया था कि प्रदीप उनके पास काम करने के बाद सुवेंदु के साथ जुड़े थे और वे एक बेहद 'होनहार' युवक थे।

▶️ सुवेंदु के 'ऑफिस मैनेजर' माने जाते थे प्रदीप
उस समय की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदीप झा सुवेंदु अधिकारी के राजनीतिक और संगठनात्मक कामकाज में अहम भूमिका निभाते थे। तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यकर्ता ने उस समय दावा किया था कि प्रदीप झा सुवेंदु अधिकारी के कार्यालय, सांसद फंड अकाउंट और राजनीतिक कार्यक्रमों का समन्वय देखते थे। यानी पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले भरोसेमंद सहयोगी के तौर पर उनकी पहचान थी। यही वजह है कि आज कई लोग चंद्रनाथ रथ और प्रदीप झा के बीच समानताएं तलाश रहे हैं।
प्रदीप को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनकी मौत की गुत्थी आज भी अनसुलझी है:
- अजीब परिस्थितियां: प्रदीप के दोनों मोबाइल फोन गायब थे। उनके वॉलेट में पैसे नहीं थे, सिर्फ विजिटिंग कार्ड्स थे। सबसे हैरान करने वाली बात ये थी कि उनके अंतःवस्त्र (Undergarments) उल्टे पहने हुए थे।
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट: रिपोर्ट में उनके पेट में 700 मिलीलीटर शराब मिली थी और दम घुटने को मौत की वजह बताया गया।
- हत्या का आरोप: प्रदीप की मां जगततारिणी झा ने इसे हत्या बताया था। उस वक्त खुद सुवेंदु अधिकारी और हाजी नूरुल इस्लाम ने भी इस मामले में गहरी साजिश का शक जताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। हालांकि, मामला धीरे-धीरे ठंडा पड़ गया और आज तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई।
▶️2018: बॉडीगार्ड शुभब्रत चक्रवर्ती की रहस्यमयी 'खुदकुशी'
प्रदीप झा की मौत के पांच साल बाद, सुवेंदु अधिकारी के एक और वफादार साथी की जान चली गई। शुभब्रत चक्रवर्ती, जो 2009 से सुवेंदु के साये की तरह उनके अंगरक्षक (Bodyguard) थे, 13 अक्टूबर 2018 को लहूलुहान मिले। उनके सिर में गोली लगी थी और यह घटना सुवेंदु के कांथी स्थित घर के ठीक सामने पुलिस बैरक में हुई थी।
अगले दिन उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया। उस समय इसे सुसाइड नोट के आधार पर खुदकुशी मान लिया गया था। लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब 2021 में (सुवेंदु के बीजेपी में जाने के बाद) शुभब्रत की पत्नी सुपर्णा चक्रवर्ती ने इसे हत्या बताते हुए एफआईआर दर्ज कराई। सीआईडी ने जांच शुरू की, सीन रीक्रिएट किया और सुवेंदु अधिकारी को भी पूछताछ के लिए बुलाया। लेकिन प्रदीप झा केस की तरह ही, इसमें भी आज तक न तो कोई पकड़ा गया और न ही किसी को सजा हुई।

▶️कौन थे चंद्रनाथ रथ? (Chandranath Rath Life Story)
चंद्रनाथ रथ की कहानी भी बेहद दिलचस्प रही है। पूर्व मेदिनीपुर के चांदीपुर इलाके के रहने वाले चंद्रनाथ पहले इंडियन एयरफोर्स में थे।करीब 20 साल तक उन्होंने वायुसेना में सेवा दी। बाद में उन्होंने VRS लिया और कुछ समय कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि रामकृष्ण मिशन की सोच और आध्यात्मिक जीवन का उनके ऊपर गहरा असर था। एक समय वह संन्यास लेने तक के बारे में सोच चुके थे। लेकिन बाद में उनका झुकाव राजनीतिक संगठन की तरफ बढ़ा और वह सुवेंदु अधिकारी की टीम का हिस्सा बन गए।
▶️'Mr Dependable' कैसे बने चंद्रनाथ?
बीजेपी नेताओं के मुताबिक चंद्रनाथ रथ सिर्फ एक PA नहीं थे। वह सुवेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद लोगों में शामिल थे।नंदीग्राम और भवानीपुर जैसे हाई प्रोफाइल चुनावों में उन्होंने चुनावी रणनीति और संगठनात्मक काम संभाला था।
बीजेपी नेता अग्निमित्रा पॉल ने उन्हें "Mr Dependable" कहा था। पार्टी के अंदर माना जाता था कि अगर सुवेंदु अधिकारी को सरकार में बड़ा पद मिलता, तो चंद्रनाथ को भी बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी मिल सकती थी।

▶️क्या बंगाल की राजनीति और हिंसक हो गई है?
चंद्रनाथ रथ की हत्या ऐसे समय हुई है जब बंगाल चुनाव के बाद राज्य में राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। बीजेपी और टीएमसी दोनों एक-दूसरे पर हिंसा फैलाने के आरोप लगा रहे हैं। पुलिस ने भी माना है कि चंद्रनाथ रथ की हत्या पहले से प्लान की गई लगती है और कई दिनों तक रेकी की गई थी।
ऐसे माहौल में 2013 के प्रदीप झा केस का फिर चर्चा में आना यह दिखाता है कि बंगाल की राजनीति में भरोसेमंद राजनीतिक सहयोगियों की भूमिका कितनी संवेदनशील और जोखिम भरी हो चुकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चंद्रनाथ रथ केस की जांच उन तमाम सवालों का जवाब दे पाएगी, जो साल 2013 से लेकर आज तक राजनीतिक गलियारों में गूंज रहे हैं।














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