ई-सिगरेट के धुएं का असर, पिच पर एकदम लचर, रियान पराग और चहल की बदहाली के आंकड़ों ने चौंकाया
IPL 2026: इस सीजन आईपीएल 2026 में अनुशासनहीनता और ई-सिगरेट विवाद ने खेल की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। राजस्थान रॉयल्स के रियान पराग और पंजाब किंग्स के युजवेंद्र चहल को लाखों युवा अपना आदर्श मानते हैं। दोनों अपने गैर-जिम्मेदाराना बर्ताव के कारण आलोचनाओं के केंद्र में हैं। इन खिलाड़ियों के शर्मनाक आचरण का असर अब उनके प्रदर्शन के आंकड़ों में भी साफ झलकने लगा है, जो इनके करियर के गिरते ग्राफ की गवाही दे रहे हैं।
रियान पराग को ड्रेसिंग रूम में ई-सिगरेट का कस लगाते हुए देखा गया था। इसके बाद युजवेंद्र चहल का भी एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह विमान में सिगरेट पी रहे हैं। पंजाब किंग्स का यह वीडियो था, जिसे बाद में हटा लिया गया।

अब सवाल यह है कि क्या आईपीएल अब इन सब चीजों का ही अड्डा बनकर रह गया है। पराग को 14 करोड़ और चहल को 18 करोड़ रुपये मिले हैं। प्रदर्शन देखा जाए, तो दोनों की बोली एक करोड़ लगनी चाहिए। सिर्फ सिगरेट के छल्ले बनाने से प्रदर्शन आता, तो हर खिलाड़ी यही करता। चहल और रियान पराग के इस सीजन के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं।
रियान पराग का फ्लॉप खेल
रियान पराग ने इस सीजन में अब तक 10 मैच खेले हैं और उनके बल्ले से केवल 207 रन निकले हैं। हालांकि उन्होंने दिल्ली के खिलाफ 90 रनों की एक पारी जरूर खेली, लेकिन उसके अलावा वे पूरी तरह फ्लॉप रहे हैं। उनका 23 का औसत यह साफ करता है कि वह क्रीज पर समय बिताने में नाकाम रहे हैं। 143.75 के स्ट्राइक रेट के बावजूद पराग निरंतरता के लिए तरसते दिखे हैं। करियर के 94 मैचों में 1773 रन बनाने वाले खिलाड़ी से उम्मीद की जा रही थी कि वह इस सीजन में अपनी टीम के लिए मैच विनर बनेंगे, लेकिन ड्रेसिंग रूम में ई-सिगरेट मामले के अलावा प्रदर्शन को लेकर उनकी चर्चा देखने को नहीं मिली।
चहल की स्पिन को लगा जंग
दूसरी ओर पंजाब किंग्स के अनुभवी स्पिनर युजवेंद्र चहल की स्थिति और भी ज्यादा निराशाजनक नजर आती है। चहल ने इस सीजन के 10 मैचों में 180 गेंदें फेंककर केवल 8 विकेट हासिल किए हैं। उनके करियर की इकोनॉमी जहां 8.04 की रही है, वहीं इस सीजन में उन्होंने 9.53 की महंगी इकोनॉमी से रन लुटाए हैं। 35.75 का औसत और 22.50 का स्ट्राइक रेट यह बताने के लिए काफी है कि उनकी फिरकी अब बेअसर साबित हो रही है।
आईपीएल की हुई है जगहंसाई
खिलाड़ियों का यह पतन केवल उनके व्यक्तिगत आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खेल के प्रति उनके समर्पण पर भी सवाल उठाता है। ई-सिगरेट जैसे विवादों ने इनकी छवि को गहरा धक्का पहुंचाया है। अगर इन खिलाड़ियों ने समय रहते अपनी आदतों और अनुशासन में सुधार नहीं किया, तो मैदान पर गिरते ये आंकड़े इनके शानदार करियर के अंत की शुरुआत भी साबित हो सकते हैं। इस तरह की चीजों से इस साल आईपीएल का नाम पूरी दुनिया में बदनाम हुआ है।












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