चुनाव से पहले हेल्थ इंडेक्स पर भाजपा-सपा में रार, यूपी की सबसे खराब रैंकिंग पर नीति आयोग ने क्यों दी सफाई?
लखनऊ, 29 दिसंबर। नीति आयोग की हेल्थ इंडेक्स 2019-20 रिपोर्ट में 19 बड़े राज्यों की रैंकिंग में उत्तर प्रदेश को सबसे नीचे स्थान मिला। सोमवार को जारी हुई इस रिपोर्ट में बताया गया कि स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में यूपी का ओवरऑल परफॉर्मेंस सबसे खराब रहा। नीति आयोग के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवाओं में परफॉर्मेंस से जुड़े संकेतकों के आधार पर प्रदेशों की रैंकिंग की गई। रिपोर्ट में यूपी को एक मामले में नंबर वन का दर्जा भी दिया गया। नीति आयोग ने कहा कि 2018-19 और 2019-20 की अवधि में डेल्टा रैंकिंग में यूपी सबसे बेस्ट रहा है। डेल्टा रैंकिंग में यह देखा जाता है कि पिछले सालों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्रदेश ने क्या-क्या किया है। जबकि ओवरऑल रैंकिंग में कई चीजें देखी जाती है जिसमें यूपी सबसे फिसड्डी रहा। बहरहाल, नीति आयोग की रिपोर्ट पर यूपी चुनाव में सियासी तीर चलने लगे। एक तरफ भाजपा ने नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के बयान को ट्वीट कर कहा कि भाजपा सरकार के प्रयास लाए रंग, स्वास्थ्य सुविधाओं में यूपी नंबर वन। वहीं अखिलेश यादव ने कहा कि नीति आयोग के हेल्थ इंडेक्स में यूपी सबसे नीचे, ये है यूपी की भाजपा सरकार की सच्ची रिपोर्ट। आइए जानते हैं कि हेल्थ इंडेक्स को लेकर इस सियासी रार के पीछे का सच क्या है और नीति आयोग को इस पर सफाई देनी क्यों पड़ गई?
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भाजपा का पैमाना- डेल्टा रैंकिंग
नीति आयोग की रिपोर्ट में यूपी को डेल्टा रैंकिंग में नंबर वन बताए जाने पर भाजपा के किसी बड़े नेता का बयान नहीं आया है। न ही, भाजपा की चुनावी रैलियों में नीति आयोग की रिपोर्ट का कहीं जिक्र सुनने में आया है। भाजपा उत्तर प्रदेश के ट्विटर हैंडल से नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के बयान का वीडियो ट्वीट किया गया है जिसमें वे कह रहे हैं कि स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में सबसे ज्यादा सुधार उत्तर प्रदेश में हुआ है। उन्होंने कहा कि डेल्टा या इंप्रूव्ड रैंकिंग में पिछले एक-दो सालों में यूपी का परफॉर्मेंस बहुत अच्छा रहा है। हेल्थ सेक्टर में यूपी ने बहुत इंप्रूव किया है। जैसे, यूपी में मेडिकल कॉलेज 42 से बढ़कर 65 हो गए हैं और डेल्टा रैंकिंग में यूपी ने लॉन्ग जंप लिया है। हलांकि, नीति आयोग के सीईओ के इस बयान में ओवरऑल रैंकिंग का जिक्र नहीं है जिसमें यूपी की रैंकिंग सबसे खराब, सबसे नीचे है। शायद इसलिए भी भाजपा इस मुद्दे पर सिर्फ एक ट्वीट करके रह गई। अखिलेश यादव ने जिस आधार पर अपनी बात कही है, वह ओवरऑल रैंकिंग पर है जिस सूची में यूपी सबसे अंत में है।

अखिलेश का पैमाना- ओवरऑल रैंकिंग
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने ट्वीट कर लिखा, नीति आयोग के 'हेल्थ इंडेक्स' में स्वास्थ्य और चिकित्सा के मामले में यूपी सबसे नीचे! ये है उप्र की भाजपा सरकार की सच्ची रिपोर्ट। दुनियाभर में झूठे विज्ञापन छपवाकर सच्चाई बदली नहीं जा सकती। यूपी की सेहत ख़राब करनेवालों को जनता बाइस में जवाब देगी। दरअसल, यूपी चुनाव से ठीक पहले नीति आयोग की रिपोर्ट में यूपी की सबसे खराब रैंकिंग आने पर योगी सरकार की आलोचना होने लगी जिसके बाद डैमेज कंट्रोल के लिए सीईओ अमिताभ कांत को इस पर सफाई देनी पड़ गई। उन्होंने कहा कि डेल्टा रैंकिंग ही देखनी चाहिए जिसमें यूपी नंबर वन है और 2017 के बाद हेल्थ सेक्टर में काफी सुधार आया है। 2017 में ही योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी थी। डेल्ट रैंकिंग का हवाला देकर एक तरह से सीईओ अमिताभ कांत ने योगी सरकार का बचाव किया।

हेल्थ इंडेक्स रिपोर्ट में सबसे नीचे है यूपी
वर्ल्ड बैंक और केंद्र सरकार की थिंक टैंक नीति आयोग की रिपोर्ट में कई संकेतकों के आधार पर जो ओवरऑल रैंकिंग दी गई उसमें बड़े राज्यों में यूपी को सबसे निचला स्थान मिला। केरल जहां 82.20 अंक के साथ टॉप पर रहा वहीं यूपी 30.57 अंक के साथ बॉटम में जगह बना पाया। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही ओवरऑल परफॉर्मेंस में उत्तर प्रदेश को सबसे कम स्कोर मिला लेकिन हेल्थ सेक्टर में सुधार (इंक्रीमेंटल परफॉर्मेंस) करने के मामले में यह टॉप पर रहा। एक साल में यूपी का ओवरऑल परफॉर्मेंस स्कोर भी 20 प्रतिशत बेहतर हुआ है। पिछली अवधि में यह 25.06 था जो अब बढ़कर 30.57 हो गया है। यूपी ने 43 इंडिकेटर्स में से 33 में पहले से बेहतर प्रदर्शन किया। नीति आयोग की रिपोर्ट एक तरफ तो यह बता रही है कि यूपी के हेल्थ सेक्टर में तेजी से सुधार हो रहा है लेकिन साथ ही यह भी दर्शा रही है कि अन्य राज्यों के मुकाबले अभी भी यह सबसे पीछे है।












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