UP में 11 फीसदी जाटवों को साधने में जुटी BJP, जानिए बेबीरानी क्यों कर रहीं है जाटव होने का दावा
लखनऊ, 14 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले जातीय समीकरण किस तरह साधे जा रहे हैं इसकी बानगी बीजेपी में दिख रही है। भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बेबीरानी मोर्य अब अपने आपको दलित की बेटी और जाटव समाज का साबित करने पर तुली हुई हैं। लखनऊ में लगे पोस्टरों में बेबीरानी मौर्य के नाम के आगे जाटव भी लगाया जा रहा है। अब वो भी खुद गर्व से कह रही हैं कि दलित की बेटी हूं। हालांकि इनका दावा यूं ही नहीं है। इसके पीछे भी बीजेपी की सोची समझी रणनीति है जिसके तहत ही वो अपने एजेंडे को आगे बढ़ा रही हैं।

यूपी में करीब 21 फीसदी दलित वोट बैंक में जाटवों का एक बड़ा हिस्सा है, लगभग 11 फीसदी है। इस वोट बैंक पर अब तक बसपा की मुखिया मायावती का एकक्षत्र राज था। अब उसमें सेंध लगाने की कोशिश भीम आर्मी के चंद्रशेखर ने की अब बीजेपी बेबीरानी मौर्य को जाटव बताने में जुटी हुई है। दरअसल, सितंबर में उत्तराखंड की राज्यपाल का पद छोड़ने के लगभग 34 दिन बाद आगरा की दलित महिला नेता बेबी रानी मौर्य लखनऊ पहुंचीं। उनके आगमन को लेकर जो तस्वीरें लगाई गईं थी उसमें उनको जाटव के नाम से दर्शाया गया था।
चुनाव से पहले अपने आपको दलित साबित करनी की कोशिश
बेबीरानी मौर्य कहती हैं, "हां, मैं एक 'दलित की बेटी' हूं," उन्होंने अपने आगमन के तुरंत बाद कहा, उन्होंने स्वीकार किया कि 2022 के उत्तर प्रदेश (यूपी) चुनावों में, वह जाटवों को रैली करने की कोशिश करेंगी। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का मुख्य आधार माना जाता है और पार्टी प्रमुख मायावती के कट्टर समर्थक हैं जो भी जाटव हैं। मौर्य के पिता आगरा में कांग्रेस पार्षद थे। पार्टी की अनुसूचित जाति विंग द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह में शामिल होने बेबीरानी मंगलवार को लखनऊ पहुंची थीं।

अम्बेडकर के रास्ते पर चलने वाली बीजेपी अकेली पार्टी
लखनऊ के विश्वेश्वरैया हॉल में सम्मान समारोह में मौजूद पार्टी के एक नेता ने बताया कि कि समारोह के दौरान मौर्य ने भीमराव अम्बेडकर का आह्वान करते हुए मुख्य रूप से दलित श्रोताओं को अम्बेडकर की तीन मुख्य बातों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि, "वह चाहते थे कि समुदाय शिक्षित हो, एकजुट रहे और कुरीतियों के खिलाफ लड़े और अंबेडकर के दिखाए रास्ते पर चलने वाली भाजपा ही एकमात्र पार्टी है।
जाटवों के विकास और समृद्धि का आश्वासन
बेबीरानी मौर्य कहती हैं कि, "मैं इस जाति में पैदा हुई थी। मेरा परिवार चमड़े और जूतों के काम में था और अब भी है। जाटव के तौर पर मैं करीब तीन दशक से बीजेपी के साथ हूं।'' यह पूछे जाने पर कि क्या वह भाजपा को जाटव वोट दिलाने के लिए आश्वस्त हैं, मौर्य ने कहा, '' मायावती ने उनको एक वोट बैँक के तौर पर इस्तेमाल किया। इस समुदाय के गरीब अंततः उस पार्टी के साथ होंगे जिसने उन्हें शिक्षा, विकास और समृद्धि का आश्वासन देगा।''
उन्होंने कहा कि,
''कैडर बेस वोट (बसपा के) के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह सकती, लेकिन यह एक सच्चाई है कि हम चाहते हैं कि वे (जाटव) भाजपा के साथ आएं। आखिरकार, जो लोग अपने बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा या रोजगार चाहते हैं, वे निश्चित रूप से कहीं न कहीं जाएंगे और हमारी सरकार जो अच्छे काम कर रही है, उसके आधार पर हम निश्चित रूप से उन्हें अपने पक्ष में करना चाहेंगे।''
बसपा की तरफ से नहीं आई कोई प्रतिक्रिया
यूपी में 2022 के यूपी चुनावों में बीजेपी द्वारा अपना खुद का जाटव दलित महिला चेहरा पेश करने पर बसपा खेमे की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालाकि, मायावती ने हाल ही में यूपी चुनावों से पहले 'सॉफ्ट हिंदुत्व' को निभाने के इरादे का खुलासा किया था, जिसमें कहा गया था कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आती है, तो उनकी सरकार अयोध्या, मथुरा और वाराणसी के हिंदू पवित्र शहरों में भाजपा द्वारा शुरू की गई विकास परियोजनाओं को जारी रखेगी।












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