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कौन बन सकती हैं यूपी में बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी, 58,000 महिलाओं को इस जॉब में मिलेगा कितना पैसा?

लखनऊ। भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 20 लाख करोड़ फंड के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान के बाद भाजपा शासित प्रदेश सरकारों ने इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भी गुरुवार को प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देने के लिए महिला स्वयंसेवी समूहों को 218.49 करोड़ का फंड दिया। लॉकडाउन के दौरान अन्य प्रदेशों में रोजगार खत्म होने पर लाखों की संख्या में लौट रहे प्रवासियों को रोजगार देने के लिए योगी सरकार ने स्किल आधारित प्रोत्साहन देने की योजना बनाई है। इसी कड़ी में गुरुवार को सीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्वयंसेवी समूहों की महिलाओं और बाहर से लौटे प्रवासियों से बात की। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देने के लिए 58 हजार बैंक कॉरेस्पोंडेंट सखी की तैनाती की घोषणा की और उनके लिए अगले छह महीने तक वेतन व कमीशन का भी ऐलान किया।

कौन बन सकती हैं बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी?

कौन बन सकती हैं बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी?

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के गांवों में बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी की तैनाती का नया काम सरकार करने जा रही है। स्वयंसेवी समूहों की कोई महिला ही बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी बन पाएंगी। बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी बनने की शर्त यह है कि वह महिला उसी गांव की हो जहां उसको काम करना है। उसका काम होगा- ग्रामीणों के बैंक से पैसे संबंधी लेन-देन व अन्य समस्या का समाधान करना। गांववालों को बैंक जाने की जरूरत नहीं होगी, उनका काम बैंक से जुड़ी कॉरेस्पोंडेंट सखी करेंगी। बैंक और ग्रामीणों के बीच ये 58 हजार कॉरेस्पोंडेंट सखियां कड़ी का काम करेंगी। बैंकिंग का ये सारा काम डिजिटल होगा। सखियों को इसके लिए डिवाइस दी जाएगी।

क्या होगा 'सखियों' की आय का जरिया?

क्या होगा 'सखियों' की आय का जरिया?

सीएम योगी आदित्यनाथ ने बताया कि उन्होंने प्रशासन से कहा है कि गांवों में इन 58 हजार बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखियों की तत्काल तैनाती की जाय। इसके लिए प्रशासन ईमानदारी से योग्यता के मुताबिक महिलाओं का चयन करे। बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखियों को अगले छह महीने तक चार हजार रुपए दिए जाएंगे। हर सखी के पास डिवाइस के लिए उनको अलग से 50 हजार रुपए दिए जाएंगे। छह महीने के बाद जब गांव के कई खाताधारी इन सखियों के माध्यम से बैंक से पैसों की लेन-देन करेंगे तो इसके बदले उनको बैंक से कमीशन मिलेगा। इस कमीशन से उन सखियों की हर महीने निश्चित आय होगी। इस तरह से सीधे-सीधे 58 हजार महिलाओं को रोजगार और ग्रामीण स्वाबलंबन को बढ़ावा मिलेगा।

क्यों पड़ी इन 'सखियों' की नियुक्ति की जरूरत?

क्यों पड़ी इन 'सखियों' की नियुक्ति की जरूरत?

सीएम योगी ने बताया कि कोरोना महामारी के संक्रमण के समय सरकारी मदद से मिले पैसों को निकालने के लिए ग्रामीण बैंकों में भीड़ लगा रहे हैं। इससे एक तरफ संक्रमण का खतरा है तो दूसरी तरफ बैंककर्मियों का ज्यादा समय पैसों की लेन-लेन का काम करने ही खत्म हो जा रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए 58 हजार बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखियों की तैनाती की योजना बनाई गई है जिससे गांव के लोगों व महिलाओं को बैंक नहीं जाना पड़ेगा। सीएम योगी ने कहा कि सखियों की नियुक्ति इसलिए की जा रही है ताकि बैंक में लाइन न लगे, लोगों को घर बैठे बैंकिंग सेवा मिले और डिजिटल बैंकिंग और आगे बढ़े।

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