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Bahubali Baba कौन हैं? 18 साल से नंगे पैर, साइकिल से 25 हजार KM का सफर, जानें अघोरी से संत बनने की पूरी कहानी

Bahubali Baba Mahakumbh 2025: महाकुंभ 2025 में जहां अनेक संत और महात्मा अपनी विशेष परंपराओं और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध हैं, वहीं एक साधु अपनी सादगी, पर्यावरण प्रेम और संकल्पों के लिए अलग पहचान बना रहे हैं। ये हैं बाबा राम बाहुबली दास (Baba Ram Bahubali Das) महाराज, जिन्हें लोग पर्यावरण बाबा (Environmental Baba) भी कहते हैं। उनका मिशन है धरती मां का संरक्षण और प्रकृति से जुड़ने का संदेश।

बाबा राम बाहुबली पिछले 22 सालों से साइकिल यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने अब तक 25,000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा की है, और लगभग 200 से अधिक जिलों में भ्रमण कर चुके हैं। उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य त्रिवेणी पौधरोपण (पीपल, बरगद, और पाकड़ के वृक्ष) को बढ़ावा देना और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।

Bahubali Baba

जीवन का बड़ा मोड़: बेटे की मृत्यु और अघोर साधना

बाबा का जीवन साधारण था। वे एक मास कम्युनिकेशन ग्रेजुएट हैं और पहले कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में विशेषज्ञता रखते थे। लेकिन जब उनके माता-पिता और बेटे का निधन हुआ, तो उन्होंने संसार त्याग दिया।

बाबा ने बताया कि बेटे की मृत्यु ने मुझे एहसास दिलाया कि जीवन क्षणभंगुर है। इसी दुख से उबरने के लिए मैंन अघोर साधना शुरू की। मैं वर्षों तक वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर अघोरियों के साथ रहा। लेकिन, बाद में समझ आया कि मेरा लक्ष्य कुछ और है।"

कैसे बने पर्यावरण बाबा?

अरुणाचल प्रदेश के परशुराम कुंड में गायों की दुर्दशा देखकर बाबा को गहरा धक्का लगा। उन्होंने वहां गोवंश की रक्षा और पर्यावरण के लिए संघर्ष किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपने जीवन को पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित कर दिया। बाबा अब पंचवटी और त्रिवेणी पौधरोपण संस्कार के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैला रहे हैं।

18 सालों से नंगे पैर चलने का संकल्प

धरती मां के सम्मान और छोटे जीव-जंतुओं की रक्षा के लिए बाबा पिछले 18 वर्षों से नंगे पैर चल रहे हैं। उनका मानना है कि यह उन्हें प्रकृति से गहराई से जोड़ता है।

हिमाचल से प्रयागराज तक की यात्रा

महाकुंभ में बाबा ने हिमाचल प्रदेश से 1,500 किलोमीटर की साइकिल यात्रा कर प्रयागराज पहुंचने का सफर तय किया। संगम क्षेत्र में वे श्रद्धालुओं और साधु-संतों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। वे देवराहा बाबा शिविर में रहकर गंगा, यमुना और सरस्वती की पवित्रता और हरियाली को बनाए रखने का आह्वान कर रहे हैं।

'पेड़-पौधे लगाना यज्ञ के समान है'

बाबा का कहना है कि हर व्यक्ति को कम से कम पांच पेड़ अवश्य लगाने चाहिए। उनका मानना है कि पेड़-पौधे लगाना यज्ञ करने जैसा है, जो न केवल पर्यावरण को शुद्ध करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को जीवन का उपहार भी देता है।

निवेदन यात्रा और पर्यावरण संदेश

  • बाबा ने 12 जनवरी को निवेदन यात्रा निकाली, जिसमें उन्होंने हर शिविर में जाकर तुलसी और शमी के पौधे वितरित किए।
  • वे पर्यावरण बचाने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं और जागरूकता फैला रहे हैं।

क्या है बाबा का संदेश ?

"सनातन का युवा भागता नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए डटा रहता है। पेड़ों की रक्षा, जल का संरक्षण और पृथ्वी का सम्मान हमारा सबसे बड़ा धर्म है।"

बाबा की पहचान:

  • कोई स्थायी आश्रम नहीं: बाबा साइकिल और अपने मिशन को ही अपना घर मानते हैं।
  • पुस्तकें लिखीं: बाबा ने "प्रकृति से परमात्मा की ओर" नामक पुस्तक लिखी है, जिसमें प्रकृति और पर्यावरण के महत्व को समझाया गया है।
  • आंदोलन और संघर्ष: 2007 और 2013 में बाबा ने जंतर-मंतर पर पर्यावरण के मुद्दों पर प्रदर्शन किया।

बाबा क्यों हैं अनोखे?

बाबा राम बाहुबली दास को आप चमत्कारी संतों से अलग पाएंगे। वे दिखावे और प्रचार से दूर हैं और पूरी तरह से पर्यावरण और धरती मां की सेवा में समर्पित हैं।

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