Rajya Sabha Election: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन क्यों हुआ खारिज? कांग्रेस ने ECI के सामने उठाए तीखे सवाल

Meenakshi Natarajan Rajya Sabha Nomination Rejected: मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव (18 जून 2026) से ठीक पहले सूबे की सियासत में भूचाल आ गया है। कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) का नामांकन पत्र खारिज किए जाने के बाद यह कानूनी और राजनीतिक लड़ाई अब दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के दरवाजे तक पहुंच गई है।

बुधवार, 10 जून 2026 को कांग्रेस के एक बेहद हाई-प्रोफाइल प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग (ECI) के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की।

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कांग्रेस ने इस फैसले को लोकतंत्र की हत्या और 'सीट की चोरी' करार देते हुए निर्वाचन अधिकारी (Returning Officer) के आदेश को वापस लेने की मांग की है।

Abhishek Singhvi Election Commission Meenakshi case: चुनाव आयोग पहुंचे कांग्रेस के दिग्गज नेता

चुनाव आयोग से मिलने वाले कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन, वरिष्ठ नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, जयराम रमेश, भूपेश बघेल, दीपा दासमुंशी और रणदीप सिंह सुरजेवाला शामिल थे। मुलाकात के बाद कांग्रेस नेताओं ने साफ किया कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज ही नहीं है, इसके बावजूद उनके नामांकन को जानबूझकर खारिज किया गया है।

'दो और दो जोड़कर सात बनाने जैसी गलती' -अभिषेक मनु सिंघवी

चुनाव आयोग के सामने कांग्रेस का पक्ष रखने के बाद मीडिया से बात करते हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने निर्वाचन अधिकारी (RO) के फैसले को समझाते हुए कहा-मीनाक्षी नटराजन को तेलंगाना (हैदराबाद) की एक अदालत से एक निजी शिकायत (Private Complaint) पर सिर्फ एक कारण बताओ नोटिस मिला था। अदालत ने केवल यह पूछा था कि इस शिकायत पर संज्ञान (Cognisance) क्यों न लिया जाए? वहां कोई आपराधिक मामला (Criminal Case) दर्ज ही नहीं है। लेकिन मध्य प्रदेश के रिटर्निंग ऑफिसर ने गलत तरीके से इसे एक लंबित आपराधिक मामला मान लिया। यह एक ऐसी अजीबोगरीब गलती है, जहां दो और दो को जोड़कर सात बना दिया गया है!

क्या है पूरा विवाद? क्यों खारिज हुआ नामांकन?

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बीजेपी के तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार महेश केवट और बीजेपी नेताओं ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई। BJP का दावा है कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने हलफनामे (Affidavit - Form 26) में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित आपराधिक मामले की जानकारी छुपाई है।

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक, उम्मीदवारों को अपने सभी मामलों की जानकारी देना अनिवार्य है। भोपाल में निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा ने बीजेपी की आपत्ति को सही मानते हुए नटराजन का नामांकन 'अधूरा हलफनामा' और 'तथ्य छुपाने' के आधार पर खारिज कर दिया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2025 में हैदराबाद की एक अदालत में एक पूर्व महिला कॉर्पोरेटर ने एक निजी याचिका दायर की थी। इस याचिका में मुख्य आरोप एक अन्य स्थानीय नेता पर था, लेकिन मीनाक्षी नटराजन को तेलंगाना का अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) प्रभारी होने के नाते एक प्रतिवादी (Respondent Number 4) बनाया गया था। कोर्ट ने सिर्फ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था; नटराजन के खिलाफ कोई एफआईआर (FIR) या चार्जशीट दर्ज नहीं है।

वोट चोरी के बाद अब 'सीट चोरी' का खेल: नटराजन

नामांकन रद्द होने के बाद बेहद मायूस लेकिन आक्रामक नजर आईं मीनाक्षी नटराजन ने बीजेपी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा-जब बीजेपी को लगा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट हैं और वे हमारे विधायकों को नहीं तोड़ पा रहे हैं, तो उन्होंने कानूनी नोटिस की आड़ में यह गंदा खेल खेला। हमारे वकीलों की दलीलें सुनी ही नहीं गईं। जो खेल पहले 'वोट चोरी' तक सीमित था, वह अब 'सीट चोरी' में बदल गया है। हम संविधान की रक्षा के लिए इस फैसले को हर स्तर पर चुनौती देंगे।

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मध्य प्रदेश में राज्यसभा का गणित और कांग्रेस की रणनीति

मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में इस समय प्रभावी संख्या 229 है (एक सीट खाली होने के कारण)। इस गणित के हिसाब से एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 58 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता है।

बीजेपी के पास 164 विधायक हैं। वह अपने दो उम्मीदवारों (तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल) को आसानी से जिता सकती है। दो सीटें जीतने के बाद बीजेपी के पास 48 अतिरिक्त वोट बचते हैं, जो तीसरी सीट के लिए जरूरी 58 वोटों से 10 कम हैं।

वहीं कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं (जिनमें से दो वोटिंग के लिए पात्र नहीं होने के कारण प्रभावी संख्या 61-62 है)। यानी कांग्रेस के पास अपनी इकलौती उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को जिताने के लिए पर्याप्त बहुमत था।

इसी जोड़-तोड़ और क्रॉस-वोटिंग के डर से कांग्रेस 10 जून को अपने विधायकों को चार्टर्ड प्लेन से बेंगलुरु भेजने की तैयारी में थी, लेकिन ऐन वक्त पर नटराजन का नामांकन खारिज होने से पूरा चुनावी समीकरण ही बदल गया और अब बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट की राह आसान हो गई है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुलाई आपात बैठक

इस बड़े राजनीतिक झटके और देश के मौजूदा घटनाक्रमों को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व बेहद सतर्क हो गया है। कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी दी कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने गुरुवार, 11 जून 2026 को दिल्ली में कांग्रेस के सभी महासचिवों और प्रदेश प्रभारियों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस बैठक में राज्यसभा चुनावों की रणनीति और इस कानूनी लड़ाई को कोर्ट में ले जाने पर अंतिम फैसला होगा।

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