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Bahraich Mela News: संभल की नेजा मेला के बाद बहराइच के 'जेठ मेला' पर भी लग सकता है बैन? जानिए इसका इतिहास

Bahraich Mela News: यूपी के संभल जिले में लगने वाले 'नेजा मेला' पर रोक लगाने के बाद ऐसी सुगबुगाहट चल रही है कि बहराइच और मुरादाबाद में भी मेले पर रोक लगाने की मांग की जा सकती है। "नेजा मेला" महमूद गजनवी के भांजे सैय्यद सालार मसूद गाजी की याद में लगाया जाता था। प्रशासन ने इस मेले पर रोक लगा दी है क्योंकि कुछ हिंदू संगठन इसे एक लुटेरे और आक्रमणकारी की स्मृति में आयोजित किए जाने का विरोध कर रहे थे।

'नेजा मेला' की तरह बहराइच में भी हर साल सलार मसूद गाजी की याद में जलसा लगता है। यह मेला 'जेठ मेला' के नाम से जाना जाता है। संभल में लगने वाली 'नेजा मेला' पर इस साल प्रशासन ने रोक लगा दिया है। एएसपी श्रीश चंद्र ने कहा कि ऐसे विदेशी आक्रांता जिसने कई बार सोमनाथ मंदिर को लूटा था। ऐसे व्यक्ति के नाम पर मेले का आयोजन कर उसका गुणगान किया जाना ठीक नहीं है।

Bahraich Mela

गौरतलब है कि महमूद गजनवी के भांजे सैय्यद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर भी हर साल जेठ मेला लगाया जाता है। मिली जानकारी के मुताबिक ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि विश्‍व हिंदू परिषद के सदस्‍य इस मेले को लेकर डीएम को ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।

बीते गुरुवार(20 मार्च) को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ बालार्क ऋषि की तपोभूमि, वीर शिरोमणि महराजा सुहलदेव की भूमि बहराइच की तहसील मिहींपुरवा के मुख्य भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे थे। जहां उन्होंने कहा कि बहराइच की पहचान बालार्क ऋषि के नाम से है यह एक ऐतिहासिक भूमि है। महाराजा सुहेलदेव ने बहराइच को विजय भूमि के रूप में बदल दिया था। बहराइच साधना की पवित्र धरती है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा किसी भी आक्रांता का महिमामंडन करने का मतलब देशद्रोह की नींव को पुख्ता करना है,स्वतंत्र भारत किसी देशद्रोही को स्वीकार नही कर सकता,जो भारत के महापुरुषों को अपमानित करता हो,उन आक्रांताओं का महिमामंडन करता हो,जिन्होंने भारत की सनातन संस्कृति को रौंदने का काम किया था,हमारी आस्था पर प्रहार किया था,उसे आज का नया भारत कतई स्वीकार नही कर सकता। सीएम के इस बयान से मेले को लेकर हलचल और तेज हो गई है।

संभल का 'नेजा मेला' का आयोजन क्यों किया जाता है?

'नेजा मेला' भारत के उत्तर प्रदेश के संभल जिले में मनाया जाने वाला एक पारंपरिक मेला है। जिसे विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय द्वारा काफी हर्षोल्लास से आयोजित किया जाता है। यह मेला सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी (गाजी मियां) की याद में मनाया जाता है। जो विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी के सेनापति और भांजे थे। इन्हें गाजी मियां के नाम से भी जाना जाता है। इस मेले का मुख्य आकर्षण 'नेजा' (ध्वज) होता है। यह मेला धार्मिक आस्था का प्रतीक है। लोग यहां मन्नतें मांगते हैं और पूरी होने पर नेजा चढ़ाते हैं। इस मेले में हजारों की संख्या में लोग आते हैं। मेले में झांकियां, घुड़सवारी और पारंपरिक नृत्य भी प्रस्तुत किए जाते हैं। यह मेला 106 सालों से लग रहा था।

बहराइच के जेठ मेला का आयोजन क्यों किया जाता है?

नेजा मेला के भांति बहराइच का जेठ मेला भी उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में सैयद सालार मसूद गाजी (गाजी मियां) की दरगाह पर आयोजित किया जाता है। यह मेला हर साल जेठ महीने में लगता है, इसलिए इसे "जेठ मेला" कहा जाता है। कहा जाता है कि 1034 ईस्‍वी में बहराइच में महाराजा सुहेलदेव ने 21 पासी राजाओं के साथ मिलकर सालार मसूद गाजी को युद्ध में हरा दिया था। युद्ध में मारे गए गाजी के शव को बहराइच में ही दफना दिया गया था। उसकी दरगाह पर हर साल जलसे का आयोजन किया जाता है।

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