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CM योगी के सम्मान में छोड़ी कुर्सी या 'फर्जीवाड़े' के डर से भागे? डिप्टी कमिश्नर के इस्तीफे का चौंकाने वाला सच

Ayodhya GST Deputy Commissioner Resignation: अयोध्या में जीएसटी डिप्टी कमिश्नर के इस्तीफे ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सपोर्ट और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की टिप्पणियों से आहत होकर दिया गया यह इस्तीफा अब एक नई कानूनी और पारिवारिक जंग में तब्दील होता दिख रहा है।

अयोध्या में तैनात जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने मंगलवार को अपने पद से अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। उन्होंने अपने निर्णय का आधार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति अपनी अटूट निष्ठा को बताया।

prashant Kumar

प्रशांत कुमार का कहना है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री पर की गई अपमानजनक टिप्पणियों से उनका मन अत्यंत व्यथित था। इस्तीफे के बाद अपनी पत्नी से फोन पर बात करते हुए वे भावुक हो गए और कहा कि 'जिसका नमक खाते हैं, उसका सिला अदा करना चाहिए।' उनका तर्क है कि एक लोक सेवक होने के नाते वे शासन के नेतृत्व के खिलाफ अमर्यादित भाषा सुनकर चुप नहीं रह सकते थे।

पारिवारिक आरोपों से गहराया विवाद

इस्तीफे की इस 'भावुक लहर' के बीच एक गंभीर मोड़ तब आया जब प्रशांत कुमार के अपने ही बड़े भाई, विश्वजीत सिंह ने उन पर संगीन आरोप लगाए। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्वजीत सिंह का दावा है कि प्रशांत कुमार ने साल 2011 में पीसीएस की नौकरी फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के आधार पर हासिल की थी।

उनके अनुसार, प्रशांत ने 40 प्रतिशत विकलांगता का प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ लिया था, जिसकी जांच मऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) स्तर पर पहले से लंबित है। भाई का आरोप है कि जब जांच को मैनेज करना मुश्किल हो गया, तब कानूनी कार्रवाई और रिकवरी से बचने के लिए प्रशांत ने इस्तीफे का यह रास्ता चुना।

VIDEO: जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का बयान

प्रशासनिक घेराबंदी और पुलिसिया कार्रवाई

इस्तीफे के बाद करीब 5 घंटे तक उनके कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल रहा। सीडीओ, एडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट सहित भारी पुलिस बल उनके दफ्तर पहुंचा। लंबी बातचीत के बाद अधिकारी प्रशांत कुमार को अपने साथ लखनऊ ले गए। हालांकि, प्रशासन ने इस कार्रवाई के उद्देश्य को पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि यह उनके इस्तीफे की प्रक्रिया और उन पर लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए किया गया है। गौरतलब है कि उनकी बहन, जो कुशीनगर में तहसीलदार हैं, उनके विरुद्ध भी इसी तरह के फर्जी प्रमाण पत्र की जांच चलने की बात कही जा रही है।

दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम प्रयागराज माघ मेले में शुरू हुए विवाद से जुड़ा है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोके जाने के बाद प्रशासन और संतों के बीच ठन गई थी। मुख्यमंत्री द्वारा 'कालनेमि' शब्द के प्रयोग और जवाब में शंकराचार्य द्वारा दी गई तीखी प्रतिक्रिया ने माहौल को राजनीतिक रूप से गरमा दिया है। एक तरफ बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने शंकराचार्य के समर्थन में इस्तीफा दिया, वहीं प्रशांत कुमार ने मुख्यमंत्री के समर्थन में अपना पद छोड़ा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन इस्तीफों और साथ ही लगे गंभीर आरोपों पर क्या रुख अपनाती है।

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