Rajkumar Bhati Remark: ब्राह्मणों को कहा वैश्या, फिर मांगी माफी! BJP को पेनल्टी कॉर्नर दे रहे भाटी

Rajkumar Bhati Brahmin Remark: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी (SP) के प्रवक्ता राजकुमार भाटी के एक कथित बयान ने राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है।

ब्राह्मण समुदाय को लेकर की गई टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सपा को घेर लिया है, वहीं कांग्रेस ने भी इस बयान की कड़ी निंदा की है। मामला इतना बढ़ गया कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने मंगलवार, 12 मई को राजकुमार भाटी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी साल में इस तरह का विवाद समाजवादी पार्टी के लिए भारी पड़ सकता है, खासकर तब जब पार्टी लगातार ब्राह्मण वोटरों को साधने की कोशिश कर रही है।

Rajkumar Bhati Brahmin Remark का क्या है पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत एक वायरल वीडियो से हुई, जिसमें समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी कथित तौर पर यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं-न तो ब्राह्मण अच्छा होता है और न ही कोई तवायफ। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और देखते ही देखते राजनीतिक विवाद में बदल गया। बीजेपी नेताओं ने इसे ब्राह्मण समाज का अपमान बताते हुए सपा पर हमला बोल दिया।

FIR against SP leader Bhati: पुलिस ने दर्ज किया केस, भारी विरोध के बाद मांगी माफी

मामले में भाजपा नेता अजय शर्मा की शिकायत के आधार पर गाजियाबाद के कवि नगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने राजकुमार भाटी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1) के तहत मामला दर्ज किया है। यह धारा धर्म या समुदाय के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी या वैमनस्य फैलाने से जुड़ी है। शिकायत में कहा गया कि भाटी की टिप्पणी से ब्राह्मण समुदाय की धार्मिक और सामाजिक भावनाएं आहत हुई हैं।

वीडियो वायरल होने और विवाद बढ़ने के बाद राजकुमार भाटी ने सफाई दी और माफी मांग ली। उन्होंने दावा किया कि उनके भाषण के कुछ हिस्सों को काटकर सोशल मीडिया पर फैलाया गया ताकि गलत संदेश दिया जा सके। भाटी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय का अपमान करना नहीं था। हालांकि राजनीतिक दलों ने उनकी सफाई को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और इसे "सपा की मानसिकता" से जोड़कर हमला जारी रखा।

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BJP-कांग्रेस ने सपा पर साधा निशाना

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा-समाजवादी पार्टी का असली चरित्र और उसकी नफरत भरी मानसिकता एक बार फिर सामने आ गई है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि सपा लगातार जातीय और सामाजिक विभाजन की राजनीति करती रही है और यह बयान उसी सोच को दिखाता है।

दिलचस्प बात यह रही कि इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भी समाजवादी पार्टी का बचाव नहीं किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि किसी भी समुदाय के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने लिखा-राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन पूरे समुदाय का अपमान करना बिल्कुल गलत है। सिर्फ माफी मांगना काफी नहीं होगा। ऐसे गैर-जिम्मेदार नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस के इस बयान को राजनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है क्योंकि यूपी में विपक्षी दलों के बीच पहले से ही समीकरणों को लेकर चर्चाएं चलती रहती हैं।

चुनावी साल में सपा के लिए क्यों बड़ा मुद्दा? BJP को मिला पेनल्टी कॉर्नर

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद समाजवादी पार्टी के लिए चुनावी तौर पर नुकसानदायक साबित हो सकता है। उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण वोटर लंबे समय से बीजेपी का महत्वपूर्ण समर्थन आधार माने जाते हैं। हालांकि पिछले कुछ सालों में सपा और अन्य विपक्षी दल भी ब्राह्मण समुदाय को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे में सपा प्रवक्ता का यह बयान विपक्षी पार्टी की रणनीति को झटका दे सकता है।

चुनावी साल से पहले इस तरह की बयाबाजी बीजेपी के लिए पेनल्टी कॉर्नर जैसा मौका बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी इस मुद्दे को ब्राह्मण सम्मान और सामाजिक अपमान के रूप में पेश कर सकती है। खासकर तब जब राज्य में चुनावी माहौल धीरे-धीरे गर्म हो रहा है। बीजेपी पहले भी कई मौकों पर विपक्षी नेताओं के विवादित बयानों को बड़ा चुनावी मुद्दा बना चुकी है।

सोशल मीडिया पर भी तेज हुई बहस

मामले के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। अब नजर इस बात पर है कि समाजवादी पार्टी राजकुमार भाटी के खिलाफ कोई आंतरिक कार्रवाई करती है या नहीं। अब तक पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। फिलहाल यह विवाद सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की जातीय और चुनावी राजनीति का नया मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।

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