Atiq Ahmed Update: कौन है डी-2 गैंग? जिसके जुड़े हैं अतीक अहमद से तार; दाऊद गैंग से था इंस्पायर्ड
Atiq Ahmed Update: आज से 20 साल पहले आतंक का पर्याय बनी डी-2 गैंग अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम गैंग से इंस्पायर्ड थी। डी-2 गैंग को पुलिस के अभिलेखों में इंटर स्टेट 273 गैंग का नाम दिया गया है।

Atiq Ahmed Update: माफिया डॉन 'अतीक अहमद', प्रयागराज का वो नाम जिसका चैप्टर 7 दिन पहले यानी 15 अप्रैल को क्लोज हो गया। साथ ही उसके भाई अशरफ अहमद का भी सीन खत्म हो गया। लेकिन, अब अतीक-अशरफ हत्याकांड में उनके ही काले कारनामों की किताब के पन्नें एक-एक कर खुलते जा रहे हैं।
अतीक-अशरफ हत्याकांड में यूपी एसटीएफ ने डी-2 गैंग का नाम उजागर किया है। एसटीएफ के मुताबिक, अतीक-अशरफ पर जिस पिस्टल से दनादन गोलियां बरसाई गईं, वो डी टू गैंग के सदस्य रहे बाबर ने शूटरों को दी थीं। यह वही गैंग है, जिसने आज से 20 साल पहले यूपी के कानपुर जिले को अपना अड्डा बनाया था।
कौन है डी-2 गैंग?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डी-टू गैंग एक जनपदीय गिरोह है। आज से 20 साल पहले आतंक का पर्याय बनी डी-2 गैंग अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम गैंग से इंस्पायर्ड थी। उसी की तरह उत्तर प्रदेश में अपना साम्राज्य बसाने में लगी थी। इसका मुख्य फोकस जमीनों की खरीद फरोख्त हुआ करता था। गैंग कानपुर नगर से लेकर प्रदेश के बाहर भी अपनी जड़ें मजबूत करता रहा।
डी-2 गैंग को पुलिस के अभिलेखों में इंटर स्टेट 273 गैंग का नाम दिया गया। साल 2004 में पुलिस मुठभेड़ में डी-टू गैंग का सरगना तौफीक उर्फ बिल्लू पुलिस एनकाउंटर में ढेर हो गया। जिसके बाद गैंग को उसका भाई रफीक संभालने लगा, लेकिन एक साल बाद ही यानी 2005 में रफीक पर भी पुलिस का शिकंजा कसा। पुलिस कस्टडी में ही रफीक को उसकी प्रतिद्वंदी परवेज गैंग ने मारवा दिया।
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अतीक का क्या संबंध?
आपको बता दें कि बीती 15 अप्रैल को अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को प्रयागराज मेडिकल कॉलेज के पास गोलियों से भूनकर मार डाला गया। पत्रकार के भेष में पहुंचे तीन शूटरों से दनादन गोलियां बरसाई, जिसमें 8 अतीक और 5 अशरफ को गलीं। इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई। एसटीएफ की छानबीन में सामने आया कि अतीक-अशरफ के मर्डर के लिए जिस पिस्टल का इस्तेमाल हुआ, उसे डी-2 गैंग के सदस्य बाबर ने उपलब्ध कराई थी। यह बात भी सामने आई है कि कानपुर के कई थानों में बाबर के खिलाफ रंगदारी और हत्या जैसे कई संगीन अपराधों में मुकदमे दर्ज हैं।
डी-2 गैंग का एक्टिव मेंबर है बाबर
मालूम हो कि पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, डी-2 गैंग का साल 2010 में ही खात्मा हो चुका था। लेकिन, अंदर-अंदर कानपुर में गैंग पनपता रहा। साल 2012 में विदेशी हथियारों की तस्करी मामले में आरोपी बने मूलगंज निवासी बाबर को सजा हुई। दो साल पहले ही जेल से बाहर आते ही पिछले साल तीन जून को हुई कानपुर हिंसा में डी-2 गैंग के मेंबर के रुप में उसका नाम उजागर हुआ था।












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